पर्याप्त आपूर्ति न होने के कारण गैस का संकट बरकारार

Newswrap हिन्दुस्तान, गोरखपुर
share

Gorakhpur News - संतकबीरनगर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में गैस की आपूर्ति में कमी के कारण उपभोक्ताओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गैस सिलेंडर की डिलीवरी में 7 से 10 दिन की देरी हो रही है। लोग घंटों लाइन में लगने के बावजूद खाली हाथ लौट रहे हैं। टोकन सिस्टम लागू किया गया है, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हो रहा।

पर्याप्त आपूर्ति न होने के कारण गैस का संकट बरकारार

संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में एजेंसियों पर पर्याप्त आपूर्ति न होने के कारण गैस का संकट बरकारार है। एजेंसियों की मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो रही है। आपूर्ति न होने से वेटिंग में उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ रही है। उन्हें देरी से सिलेण्डर मिल रहा है। एजेंसी पर लगने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए। टोकन सिस्टम लागू किया जा रहा है।बघौली क्षेत्र में पर्याप्त आपूर्ति न होने के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालत यह है कि कई उपभोक्ता घंटों इंतजार के बाद भी बिना सिलेंडर लिए वापस लौटने को मजबूर हैं।

गैस संकट के चलते सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण और मध्यम वर्गीय परिवारों को हो रही है। समय से गैस बुकिंग के बावजूद डिलीवरी में 7 से 10 दिन की देरी हो रही है। लोगों को एजेंसी पर बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे है। फोन कॉल और ऑनलाइन शिकायतों का संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है। उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को भी समय से सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय निवासी राम शब्द ने बताया कि तीन बार एजेंसी गए, लेकिन हर बार सप्लाई नहीं आई कहकर लौटा दिया जा रहा है। वहीं एजेंसी संचालकों का कहना है कि ऊपर से आपूर्ति कम मिल रही है, जिससे सभी उपभोक्ताओं को समय पर गैस देना संभव नहीं हो पा रहा। कुछ स्थानों पर टोकन सिस्टम लागू किया गया है, ताकि भीड़ नियंत्रित रहे और क्रमवार वितरण हो सके। इसके अलावा, उपभोक्ताओं को ऑनलाइन बुकिंग और होम डिलीवरी का विकल्प भी दिया जा रहा है, लेकिन सीमित स्टॉक के चलते यह व्यवस्था भी पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो रही है। कुछ एजेंसियां उपभोक्ताओं को वैकल्पिक तिथियां देकर आश्वस्त कर रही हैं और सीमित संख्या में सिलेंडर वितरण कर रही हैं। वहीं, बुजुर्ग और महिलाओं को प्राथमिकता देने का दावा भी किया जा रहा है।जब मदद नहीं मिलती, ऐसे चला रहे कामगैस न मिलने की स्थिति में लोग वैकल्पिक ऊर्जा लकड़ी और कोयले के चूल्हों का उपयोग बढ़ गया है। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले रामकुमार ने बताया कि गैस नहीं मिलने पर फिर से चूल्हा जलाना पड़ रहा है, जिससे समय और मेहनत दोनों बढ़ रहा है।बुकिंग के सापेक्ष कम सिलेंडर आने से एजेंसी पर बढ़ रही भीड़पौली स्थित भारत गैस एजेंसी पर घरेलू गैस सिलेंडर की किल्लत और केवाईसी की अनिवार्यता के कारण उपभोक्ताओं को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बुकिंग के सापेक्ष कम सिलेंडर आने से एजेंसी पर लगातार भीड़ बढ़ रही है। सिलेंडर का लोड पहुंचते ही एजेंसी पर लंबी कतारें लग जाती हैं। तेज धूप और भीषण गर्मी में घंटों खड़े रहने के बावजूद कई उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। गैस लेने आए रमेश, हरिश्चंद, राम पलट, बुझारत, हरिराम आदि का कहना है कि गैस बुकिंग और वितरण की रफ्तार बेहद धीमी है। काफी दिक्कत हो रही है। एजेंसी पर न तो छाया की व्यवस्था है और न ही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस इंतजाम। गैस एजेंसी के मालिक ने बताया कि बुकिंग के मुकाबले इस समय गैस की आपूर्ति कम हो रही है। गैस बुकिंग 245 सिलेंडर का हुआ थी। मांग पत्र 360 सिलेंडर का भेजा गया कल शाम को 180 सिलेंडर ही मिला पाया।वहीं धनघटा में दो दिन से गैस की गाड़ी नहीं आ रही है। लोग सुबह 5 बजे से ही गैस गोदाम पर लाइन में लगा कर इंतजार करने के बाद वापस जाने को मजबूर हो रहे हैं। एजेंसी के हॉकर सरकार के घर-घर जा कर डिलेवरी करने के आदेश को ठेंगा दिखा रहे हैं।प्लांट बंद होने से गैस सप्लाई बाधित, खाली हाथ लौटे उपभोक्तामेंहदावल क्षेत्र में घरेलू गैस की आपूर्ति पूरी तरह से बाधित रही। प्रतिदिन की तरह बड़ी संख्या में उपभोक्ता गैस एजेंसियों पर पहुंचे, लेकिन सप्लाई न होने के कारण उन्हें निराश होकर खाली हाथ वापस लौटना पड़ा। एजेंसी संचालकों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह से अनियंत्रित नहीं है। जिन उपभोक्ताओं ने पहले से गैस बुकिंग कर रखी है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही हॉकर भी मोहल्लों में गैस सिलेंडर की आपूर्ति के लिए सक्रिय हो गए हैं, जिससे कुछ हद तक राहत मिल रही है।इसके बावजूद क्षेत्र में कमर्शियल गैस सिलेंडर की भारी कमी बनी हुई है। चाय दुकानदारों, मिठाई व्यवसायियों और होटल संचालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन व्यवसायों का संचालन काफी हद तक गैस पर निर्भर होता है, ऐसे में कमर्शियल सिलेंडर की अनुपलब्धता से उनका काम प्रभावित हो रहा है।गैस एजेंसी पर कौन लोग रात भर लगा रहे चारपाईकांटे क्षेत्र में गैस सिलेंडर की भारी किल्लत से उपभोक्ता परेशान हैं। कुछ गैस एजेंसियों के बाहर रात में लाईन लगा रहे हैं। वे सुबह अपनी बारी सुनिश्चित करने और सिलेंडर प्राप्त करने के लिए दिन-रात एक कर रहे हैं। इस किल्लत के बीच कालाबाजारी का मामला भी सामने आया है। क्षेत्र के कुछ लोगों ने बताया कि बस्ती जनपद की मुंडेरवा एजेंसी पर देर शाम से ही कुछ लोग खाली सिलेंडर लेकर लाइन में लग जाते हैं। वे रात भर पूरी व्यवस्था के साथ चारपाई लगाकर रहते हैं। सुबह जब अन्य ग्राहक सिलेंडर लेने एजेंसी पहुंचते हैं, तो लंबी लाइन देखकर वे मायूस हो जाते हैं। इसी दौरान कुछ लोग खाली सिलेंडर लेकरआए ग्राहकों से 200 से 400 रुपये की मांग करते हैं। मांग पूरी होने पर वे अपनी लाइन में लगा सिलेंडर ग्राहक को दे देते हैं और उनका खाली सिलेंडर ले लेते हैं। इस मामले को लेकर गैस एजेंसी के मालिक चंद्र प्रकाश ने बताया कि इस तरह की शिकायतें सुनने में आ रही हैं और वे इसकी जानकारी कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जिन घरों में शादी समारोह हैं, उनके लिए 19 किलोग्राम का सिलेंडर उपलब्ध है। इसके लिए डीएसओ से शादी का कार्ड दिखाकर मंजूरी मिलने पर सिलेंडर दिया जाएगा। वहीं कुछ दुकान संचालकों ने नाम न छापने पर बताया कि सिलेंडर के लिए मोटे दाम 1800 सौ रुपया देने पर कोई ओटीपी नहीं देना पड़ता है सिलेंडर मिल जाता है। दुगुना दाम देने पर दुकान बंद नहीं होती लेकिन बचत नहीं हो पाती है।ओटीपी और ई-केवाईसी बनी नई मुसीबतनाथनगर क्षेत्र में घरेलू गैस सिलेंडर की किल्लत से आम उपभोक्ता अभी ठीक ढंग से उबर ही नहीं सके। इसी बीच ई केवाईसी और ओटीपी परेशानी से मध्यम वर्ग और ग्रामीण परिवारों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। उपभोक्ताओं को सबसे बड़ी समस्या समय पर गैस सिलेंडर की डिलीवरी न मिलना है। कई एजेंसियों पर बुकिंग के बाद 4 से 5 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। इसके अलावा ओटीपी आधारित डिलीवरी सिस्टम ने भी नई परेशानी खड़ी कर दी है। कई उपभोक्ताओं के मोबाइल पर ओटीपी नहीं पहुंच रहा। जिससे सिलेंडर लेने में दिक्कत हो रही है। ई-केवाईसी की प्रक्रिया भी उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। नेटवर्क की समस्या, दस्तावेज़ों की कमी या तकनीकी गड़बड़ी के चलते कई लोगों का केवाईसी पूरी नहीं हो पा रही है। इससे उनका कनेक्शन अस्थायी रूप से बाधित हो रहा है।ओटीपी-केवाईसी की बाध्यता से गैस उपभोक्ता परेशानबेलहर क्षेत्र में रसोई गैस उपभोक्ताओं को इन दिनों ओटीपी और केवाईसी की अनिवार्यता के चलते भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले स्थानीय दुकानों से आसानी से गैस सिलेंडर मिल जाता था, जिससे न तो ओटीपी की झंझट होती थी और न ही कागजी केवाईसी की आवश्यकता पड़ती थी। लेकिन अब गैस लेने के लिए मोबाइल नंबर पर ओटीपी आना अनिवार्य कर दिया गया है, साथ ही केवाईसी प्रक्रिया पूरी न होने पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। इससे खासकर उन उपभोक्ताओं को दिक्कत हो रही है जिनके मोबाइल नंबर लिंक नहीं हैं या तकनीकी जानकारी का अभाव है। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि उनका गैस कनेक्शन दूर-दराज की एजेंसियों जैसे मेंहदावल, घोसहारी और अन्य स्थानों पर है, जहां तक पहुंचना उनके लिए आसान नहीं है। परिवहन के साधनों की कमी और आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे गैस लेने से वंचित हो रहे हैं। पहले कुछ दुकानदारों के माध्यम से अतिरिक्त पैसे देकर सिलेंडर की व्यवस्था हो जाती थी, लेकिन अब वह भी संभव नहीं है। बेलहर और आसपास के कई गांवों में स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।

Voice of UP
Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।