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बच्चों के नाटकों तक सीमित रह गई है गांधी टोपी

बच्चों के नाटकों  तक सीमित रह गई है गांधी टोपी

शहर में गांधी टोपी पहनने वालों की संख्या साल दर साल कम होती जा रही है। स्कूलों या कॉलेजों में होने वाले नाटकों में ही इन टोपियों को पहने हुए देखा जा सकता है। शहर में अब गांधी टोपी पहने हुए इक्का-दुक्का लोग ही दिखाई देते हैं। उनमें से ज्यादातर की उम्र 60 वर्ष के पार है।

अब गांधी की टोपी स्कूलों व कॉलेजों में आयोजित होने वाले नाटकों के लिए ही खरीदी जाती है। जहां पहले यह टोपी सत्य की पहचान हुआ करती थी। अब यह टोपी बच्चों व युवाओं के नाटकों तक ही सीमित रह गई है। गांधी आश्रम के गांधी टोपी काउन्टर इंचार्ज सर्वेश पाण्डेय ने बताया कि कांग्रेस पार्टी से जुड़े पुराने लोग ही गांधी टोपी पहने हुए ही दिखाई देते हैं। शहर में ऐसे लोगों की तादाद बेहद कम है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के अस्तित्व में आने से गांधी आश्रम में टोपी की मांग अचानक से बढ़ गई थी।

गांधी टोपी के व्यापार में तेजी से इजाफा हुआ। इससे लगभग 50 फीसदी टोपी का व्यापार बढ़ा। आम आदमी पार्टी से जुड़े कार्यकर्ता व पदाधिकारी सभी गांधी आश्रम से ही खरीद कर टोपी पहनते थे लेकिन धीरे-धीरे उनकी संख्या में भी कमी होती गई जिसके चलते बाजार से गांधी टोपी बिल्कुल ही गायब हो गई।

गांधी आश्रम के कर्मचारी शिशुपाल सिंह ने बताया कि अब नए फैशन के दौर में गांधी टोपी को कोठ्र पूछने वाला नहीं रह गया। राष्ट्रीय पर्वों पर ही अब उनकी मांग होती है। इन्हीं अवसरों पर लोगों को गांधी टोपी पहनते देखा जा सकता है जबकि विद्यालयों में कार्यक्रम करने वाले बच्चे ही इसकी खरीदारी कर रहें हैं। पिछले पांच वर्षों में गांधी टोपी का व्यापार घटकर लगभग एक तिहाई हो गया। वर्ष 2014-15 में जहां गांधी टोपी की बिक्री 1500 से 2000 हुआ करती थी अब घटकर इसकी संख्या 500 से 600 तक पहुंच गई है।

बोले जिम्मेदार

पिछले पांच सालों में गांधी टोपी लगाने वालों की संख्या में काफी कमी आई है। जहां पहले सालाना डेढ़ से दो हजार टोपियां बिकती थीं। अब उनकी संख्या 500 ही रह गई है। जबकि इन पांच वर्षों में गांधी टोपी की कीमत में मात्र 5 से 10 रुपये का ही इजाफा हुआ है।

अभिमन्यु सिंह, व्यवस्थापक, गांधी आश्रम

राष्ट्रीय पर्व पर ही गांधी टोपी खरीदने के लिए लोग आते हैं। इसके अलावा विशेष प्रदर्शन करने के लिए कुछ संस्थाएं या पार्टियां गांधी टोपी की खरीदारी करती हैं। पांच साल पहले टोपी की कीमत 25 से 30 रुपये हुआ करती थी। अब इसका मूल्य 35 रुपये है।

धीरेन्द्र नाथ मिश्र, काउन्टर इंचार्ज, गांधी आश्रम

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  • Web Title:Gandhi cap is limited to children s plays