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खलीलाबाद -बलरामपुर रेल लाइन के भूमि अधिग्रहण में ही बीत गए पांच वर्ष

हिन्दुस्तान टीम, संतकबीरनगर। संतकबीरनगर जिला मुख्यालय खलीलाबाद से बलरामपुर-बहराइच रेल लाइन...

खलीलाबाद -बलरामपुर रेल लाइन के भूमि अधिग्रहण में ही बीत गए पांच वर्ष
हिन्दुस्तान टीम,गोरखपुरWed, 24 Apr 2024 01:15 PM
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हिन्दुस्तान टीम, संतकबीरनगर।
संतकबीरनगर जिला मुख्यालय खलीलाबाद से बलरामपुर-बहराइच रेल लाइन का शिलान्यास हुए पांच वर्ष बीत चुका है, लेकिन अभी तक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। जिम्मेदारों को पांच वर्ष लग गए जनपद में अधिग्रहण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में, ऐसे में काम शुरू होने और पूरा होने में कितना समय लगेगा इसका किसी को अंदाजा नहीं है। शिलान्यास के समय ही इस रेल लाइन के पूरा होने का समय 2025 निर्धारित किया गया था। लेकिन इसकी प्रगति देख लग रहा है कि अभी पांच साल का और समय लग जाएगा।

खलीलाबाद, बलरामपुर-बहराइच रेल लाइन का शिलान्यास 2 मार्च 2019 को हुआ था। तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोयल के साथ ही रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने शिलान्यास किया था। शिलान्यास हुआ तो लगा अब जल्द ही काम शुरू हो जाएगा। 240 किमी लंबी इस रेल लाइन के लिए 4939.78 करोड़ रुपए आवंटित हुआ था। भूमि अधिग्रहण के लिए जनपद के किसानों को भुगतान के लिए सरकार ने जिला प्रशासन को धन उपलब्ध करा दिया था। धन मिलने के बाद से ही अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई। लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही और सुस्ती के कारण यह अभी तक पूरी नहीं हो सकी है।

फाइनल अधिसूचना जारी हुई और किसानों से आपत्ति भी दिसम्बर 2023 में ही ले ली गई थी। लेकिन आपत्ति निस्तारण के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। जबकि सिद्धार्थनगर जनपद में अधिग्रहण का कार्य तेज है। अन्य जनपदों में भी प्रक्रिया चल रही है। खलीलाबाद-बहराइच के बीच छोटे बड़े कुल 32 रेलवे स्टेशन व हॉल्ट बनेंगे।

जिले के 54 गांवों से होकर गुजरेगी रेल लाइन

इसमें जिले के 54 गांव, सिद्धार्थनगर के 93 गांव, बलरामपुर के 65, श्रावस्ती के 30 और बहराइच में 19 गांवों से होकर रेल लाइन बिछाई जानी है।

प्रथम चरण में खलीलाबाद से बांसी तक होना है कार्य

प्रथम चरण में खलीलाबाद से बांसी तक 54 किलोमीटर दूरी तक कार्य होना है। इसमें जिले के खलीलाबाद तहसील क्षेत्र के 29 गांवों के किसानों की 75,128 हेक्टेयर जमीन और मेंहदावल तहसील क्षेत्र के 25 गांवों की 66,862 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की जानी है। तमाम कोशिशों के बावजूद भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई में तेजी नहीं आ रही थी। इसकी वजह यह रही कि पूर्व में भूमि अधिग्रहण की जिम्मेदारी बस्ती से हो रही थी। बताया जा रहा है कि अक्टूबर-नवंबर 2023 में ही अधिग्रहण की तैयारी पूरी कर ली गई थी, लेकिन रेलवे के अलाइनमेंट बदलने से कार्य रुक गया था। अब एडीएम को इसकी जिम्मेदारी मिली है। हालांकि उसके बाद भी से भी तेजी नहीं आई है।

42 वर्ष के संघर्ष के बाद लाइन को मिली थी स्वीकृति

खलीलाबाद-बलरामपुर, बहराइच रेल लाइन को स्वीकृत होने में 42 साल लग गए थे। सन 1977 में जनता पार्टी की सरकार में इसका सर्वे हुआ था। लेकिन 22 वर्षों तक जब कुछ नहीं हुआ तो 2002 में रेल लाइन संघर्ष समिति का गठन हुआ और आन्दोलन शुरू हुआ। इसके बाद भी कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। 2014 में केन्द्र में भाजपा सरकार बनने के बाद शरद त्रिपाठी, जगदम्बिका पाल सहित अन्य ने इसके लिए प्रयास तेज किया तो रेल लाइन को 2017 में स्वीकृति मिली और फिर 2019 में शिलान्यास हुआ।

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