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डीडीयू में भाषाओं की बेकद्री, संस्‍कृत-अंग्रेजी की लैब पर पांच साल से ताला

पूर्वांचल के युवाओं की बड़ी समस्या उच्चारण दोष सुधारने की मंशा पर जिम्मेदारों की लापरवाही ने पानी फेर दिया। डीडीयू में पांच साल पहले स्थापित लैंग्वेज लैंबों पर ताला लटका है। विभागीय सूत्रों की मानें तो एक आध सप्ताह के बाद इनका इस्तेमाल बंद हो गया और लैंब में ऐसे ताले बंद हुए कि फिर नहीं खुले। 

-लाखों रुपये खर्च कर बने थे डीडीयू के अंग्रेजी व संस्कृत विभाग में लैंग्वेज लैब 
-सुन व देख कर उच्चारण सुधारने को हुआ था दोनों लैब का निर्माण 
-25 लाख से अधिक के उपकरण लगाए गए थे, पांच साल से नहीं खुला लैबों का ताला
-पूर्वांचल के विद्यार्थियों में उच्चारण की है बड़ी समस्या, सुधार की मंशा अधूरी

पूर्वांचल के युवाओं में उच्चरण दोष बड़ी समस्या है। खास कर अंग्रेजी और संस्कृत भाषा में सर्वाधित विद्यार्थियों में यह समस्या पाई जाती है। पांच साल पहले डीडीयू के शिक्षकों ने तत्कालीन कुलपति प्रो. पीसी त्रिवेदी के सामने यह बात उठाई तो उन्होंने खुद भी इसे चेक किया। योजना तैयार कर दोनों विभागों में लैंग्वेज लैब की स्थापना कराई गई। इसके लिए करीब 25 लाख के उपकरण खरीदे गए। सुनकर व देख कर उच्चारण सुधार के लिए प्रोजेक्टर व ऑटोमेटिकली उच्चारण वाले इलेक्ट्रॉनिक ईयर फोन खरीद कर सभी उपकरणों को इंस्टॉलेशन किया गया। दोनों विभागों में अलग से एक-एक कक्ष इसके आवंटित कर उन्हें साउंड प्रूफ बनाने पर भी धन खर्च हुआ। शुरू में कुछ दिन तक इनका इस्तेमाल भी हुआ मगर बाद में बंद हो गया। 

अंग्रेजी विभाग के लोग बताते हैं कि लैंग्वेज लैब स्थापित होने के बाद पहली ही बरसात में पानी भर गया। इसके बाद उपकरण दूसरी कक्ष में स्थापित करने की मांग की गई। सुनवाई नहीं होने पर ताला बंद हो गया और तबसे अभी तक ताला बंद है। संस्कृत विभाग में खुले लैंग्वेज लैब में हालांकि पानी आदि की समस्या नहीं हुई मगर विद्यार्थियों की अरुचि व शिक्षकों अभाव के कारण इसे बंद करना पड़ा। तबसे दोनों लैब उपेक्षित पड़े हैं। यह न तो खुलते हैं और न ही उपकरणों की सुधि लेने वाला ही कोई बचा है। बताते हैं कि अब इनमें से कई उपकरण उपयोग व रख रखाव के अभाव में बेकार हो गए हैं। दोनों विभागों के शिक्षकों का कहना है कि लैब संचालन में शिक्षकों की कमी बड़ी समस्या है। क्लास लेने वालों की ही संख्या बेहद कम है तो लैब संचालन कौन करे?

कोट-लैंग्वेज लैब में ताला बंद होने की जानकारी मिली है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बारे में यह सच है कि इनका इस्तेमाल नहीं होने से खराब होने लगते हैं। खुद ताला खुलवा कर निरीक्षण करूंगा। जल्द ही खराब उपकरणों को ठीक कराकर दोबारा लैब संचालन शुरू कराया जाएगा। -शत्रोहन वैश्य, कुलसचिव, डीडीयू 
   

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  • Web Title:Five years of lock on Sanskrit English language lab in DDU