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पांच हजार बच्चों ने प्राइवेट स्कूल छोड़ परिषदीय स्कूलों की पकड़ी राह

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परिषदीय विद्यालयों को लेकर एक आम धारणा रहती है कि इन स्कूलों में पढ़ाई का स्तर काफी नीचे होता है, विद्यालय में गंदगी होती है और यहां पढने वाले बच्चे आधुनिकता से दूर होते हैं। लेकिन इस मिथक को तोड़ने का काम जिले के कई प्राथमिक विद्यालयों ने किया है। इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे अंग्रेजी बोलते हैं, लैपटॉप चलाते हैं, प्रोजेक्टर पर काम करते हैं। कुछ शिक्षकों के विद्यालय की सूरत बदलने की सोची तो इसके सकारात्मक परिणाम भी दिखने को मिले। जिसमें सबसे बड़ा बदलाव ये देखने को मिला कि प्राइवेट स्कूल को छोड़कर बच्चे प्राथमिक विद्यालयों में प्रवेश लेने लगे। नगर क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालय दाऊदपुर, प्राथमिक विद्यालय आराजी बसडीला पिपराइच, प्राथमिक विद्यालय सिक्टौर खोराबार, प्राथमिक विद्यालय तिनकोनिया नम्बर 3 चरगावां, प्राथमिक विद्यालय कौड़ीराम, प्राथमिक विद्यालय राजी जगदीशपुर में 200 से अधिक ऐसे बच्चों ने नये सत्र 2019-20 में प्रवेश लिया जो पहले प्राइवेट स्कूल में शिक्षा लेने जाते थे। पूरे जिले की बात करें तो बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेन्द्र नारायण सिंह के अनुसार नये सत्र में पांच हजार बच्चों ने प्राइवेट स्कूल को छोड़ प्राथमिक विद्यालयों की राह पकड़ी है। प्राइवेट स्कूल से प्राथमिक विद्यालय में प्रवेश लेने वाले जिले के बच्चों को विवरण शासन को भेज दिया गया है। 

 
प्राथमिक स्कूल में प्रवेश लेने वाले बच्चों की  संख्या
-प्राथमिक विद्यालय कौड़ीराम प्रथम- 65
-प्राथमिक विद्यालय राजी जगदीशपुर-42
-प्राथमिक विद्यालय दाऊदपुर- 32
-प्राथमिक विद्यालय सिक्टौर खोराबार-30
-प्राथमिक विद्यालय जंगल कौड़िया चरगावां- 23
-प्राथमिक विद्यालय आराजी बसडीला- 22

इन प्राइवेट स्कूलों को बच्चों ने छोड़ा
-ब्लूमिंग बर्ड पब्लिक स्कूल  
-सत्या पब्लिक स्कूल  
-श्रद्धा पब्लिक स्कूल
-वेल्स इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल  
-मथुरा पब्लिक स्कूल
-सरस्वती पब्लिक स्कूल
-पवित्रा पब्लिक स्कूल
-सीवी सिंह पब्लिक स्कूल
-वाई पब्लिक स्कूल
-आरपीएस पब्लिक स्कूल
-आईडियल पब्लिक स्कूल
-लक्ष्मीना पब्लिक पब्लिक स्कूल
-यूएस सेन्ट्रल पब्लिक स्कूल
-विद्या निकेतन पब्लिक स्कूल

पढ़ाई के स्तर और साफ-सफाई से बदली तस्वीर
प्राइवेट स्कूल से प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के प्रवेश लेने में सबसे बड़ी भूमिका कुछ शिक्षकों की मेहनत का नतीजा है। प्राथमिक विद्यालय दाऊदपुर, प्राथमिक विद्यालय आराजी बसडीला पिपराइच, प्राथमिक विद्यालय सिक्टौर खोराबार, प्राथमिक विद्यालय तिनकोनिया नम्बर 3 चरगावां, प्राथमिक विद्यालय कौड़ीराम के शिक्षकों ने आगे बढ़कर अपने विद्यालय को स्मार्ट बनाया। स्कूलों में प्राइवेट स्कूलों जैसी साफ-सफाई रखी। लैपटॉप, प्रोजेक्टर के माध्यम से पढ़ाई शुरू की। बच्चों को अंग्रेजी में दक्ष करने का काम किया। प्राइवेट स्कूल से परिषदीय स्कूल में प्रवेश लेने वाले बच्चों के अभिभावकों का भी मानना है कि लो शिक्षा और माहौल हमें 400 और 500 रुपये महीना देकर मिलता है। वैसा ही पढ़ाई का माहौल हमे परिषदीय विद्यालयों में फ्री मिलने लगा है। इसलिए बच्चों का प्रवेश कराया। 

70 सालों में पहली बार किसी  सरकार ने बच्चों को दी कुर्सी और बेंच

आजादी के बाद से लेकर 2017 तक उत्तर प्रदेश में प्राइमरी स्कूल के बच्चों को टाट-पट्टी या बोरा बिछाकर जमीन पर ही बैठना पड़ता था मगर सूबे में नई सरकार आने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने फैसला लिया गया कि अब प्राइमरी स्कूल के बच्चे टाट-पट्टी में नहीं बैठेंगे। योगी सरकार ने तत्काल सभी प्राइमरी विद्यालयों में कुर्सी और बेंच की व्यवस्था कराई। आज सभी प्राइमरी विद्यालयों में बच्चों को बैग,कॉपी-किताबें, टाई,शर्ट,जूता,मोजा,स्वेटर आदि फ्री में दिया जा रहा है। गोरखपुर में अभी तक  3,71,975  बच्चों को किताबें वितरित की जा चुकी हैं। 3,07,994 बच्चों को जूते-मोजे,2,73,910 बच्चों को ड्रेस,3,69937 बच्चों को बैग वितरित किये जा चुके हैं। 

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  • Web Title:Five thousand children leave private schools and catch up with council schools