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पांच मृतक आश्रितों को मिली नौकरी, पांच शिक्षकों को नोटिस

हिन्दुस्तान टीम,गोरखपुरNewswrap
Thu, 08 Jul 2021 05:11 AM
पांच मृतक आश्रितों को मिली नौकरी, पांच शिक्षकों को नोटिस

गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन अब एक्शन के मोड में आ गया है। मंगलवार को कुलपति के लौटते ही विवि प्रशासन ने कई फैसलों को अमली जामा पहना दिया। पांच मृतक आश्रितों को नौकरी के लिए हरी झंडी मिल गई हैं। वहीं विवि के पांच वरिष्ठ शिक्षक भी रडार पर आ गए हैं। उन्हें नोटिस जारी कर दिया गया है।

विवि प्रशासन द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के पूर्व पदाधिकारियों एवं शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को कुलपति प्रो. राजेश सिंह से मुलाकात की। इस में प्रो. जितेंद्र तिवारी पूर्व अध्यक्ष, प्रो. सुषमा पांडेय पूर्व उपाध्यक्ष, डॉ राम प्रताप यादव, प्रो राजेश कुमार सिंह, प्रो शिवाकांत सिंह, डॉ सचिन कुमार सिंह, डॉ अमित उपाध्याय, प्रो विनय कुमार सिंह, डॉ टीएन मिश्रा, डॉ. ओ पी सिंह, डॉ आलोक कुमार, डॉ आशीष शुक्ला, डॉ प्रशान्त शाही, दीपेंद्र मोहन सिंह, डॉ अभय चंद्र मल्ल, डॉ अनुराग द्विवेदी, डॉ. मनीष कुमार पांडेय, डॉ. सर्वेश कुमार, डॉ दीपक प्रसाद, डॉ. स्मृति मल्ल शामिल रहे। इस दौरान शिक्षकों ने हाउस अलॉटमेंट, विभागों में इंटरनेट सुविधा, हाउस रिपेयर, ऑनलाइन मूल्यांकन के लिए प्रशिक्षण, वार्षिक परीक्षाओं, कोविड से मृतक शिक्षकों को शिक्षक कल्याण कोष से मिलने वाली अनुग्रह राशि देने और मृतक आश्रितों को नियुक्ति देने की मांग की।

प्रो.शरद की पत्नी समेत पांच को मिली नौकरी

इस मुलाकात का असर दिखा। कुलपति ने अनुग्रह राशि मृतक आश्रितों से आवेदन करने पर इसे जारी करने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही कोविड से मृतक शिक्षकों और कर्मचारियों के पांच मृतक आश्रितों की नियुक्ति का आदेश देर शाम जारी कर दिया गया। जिनमें कोविड से मृत शिक्षक डॉ शरद चंद्र श्रीवास्तव की पत्नी अलका श्रीवास्तव तथा कर्मचारी झिंकान के पुत्र बलिंदर को तृतीय श्रेणी में नियुक्ति का आदेश जारी किया गया है। इनके अलावा तीन अन्य मृतक आश्रितों में अमन चौधरी को तृतीय श्रेणी तथा इरफान और मनोज कुमार को चतुर्थ श्रेणी में नियुक्ति का आदेश जारी किया है। विवि प्रशासन ने बताया कि नियुक्ति की प्रक्रिया अभी चल रही है। शैक्षणिक दस्तावेजों के सत्यापन और कार्यपरिषद से अनुमोदन की प्रत्याशा में नियुक्ति आदेश जारी किया गया।

तीन हफ्ते में आवंटित होंगे आवास

विभिन्न शिक्षकों से चर्चा करते हुए कुलपति ने शिक्षकों द्वारा दिए गए सुझावों पर सकारात्मक कार्रवाई की बात कही। आवास आवंटन को आए हुए आवेदनों पर 2 से 3 हफ्ते में आवास आवंटन करने की बात कही। इसके साथ ही आवास की मरम्मत और विभागों को इंटरनेट की सुविधा से लैस करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजे जाने की बात बताई।

शिक्षकों और छात्रों से वार्ता के बाद होगा चुनाव पर फैसला

चुनावों के आयोजन पर भी कुलपति ने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि प्रवेश परीक्षाओं के बाद वह शिक्षकों और विद्यार्थियों के एक बड़े समूह से मिलकर चर्चा करेंगे। इसमें प्राप्त सुझावों के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्नातक द्वितीय और तृतीय वर्ष की परीक्षाओं का मॉडल पेपर सात दिन के अंदर तैयार कर विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। विवि प्रशासन द्वारा अगले तीन से चार दिन के अन्दर ही अनुदानित महाविद्यालयों के प्राचार्य के साथ बैठक की जाएगी।

पांच शिक्षकों को नोटिस

कुलपति के संज्ञान में लाया गया है कि विवि प्रशासन की चेतावनी के बाद भी कुछ शिक्षकों द्वारा सोशल नेटवर्किंग साइट्स और समाचार पत्रों में लगातार बयान देकर विश्वविद्यालय की छवि और गरिमा को धूमिल किया जा रहा है। जो विश्वविद्यालय के सर्विस कंडक्ट के विरुद्ध है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारियों और एक कमेटी ने ऐसा कृत्य करने वाले कुछ शिक्षकों को चिन्हित किया है। इनमें हिंदी विभाग के प्रो. कमलेश गुप्ता और विमलेश मिश्रा, राजनीति विज्ञान के प्रो. गोपाल प्रसाद, अर्थशास्त्र के प्रो: आलोक कुमार गोयल और रक्षा अध्ययन विभाग के प्रो. विनोद कुमार सिंह का नाम शामिल है। सभी शिक्षकों को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किया जा रहा है। शीघ्र ही उनके विरुद्ध विश्वविद्यालय के एक्ट और आर्डिनेंस के मुताबिक कार्यवाही की जाएगी।

प्रो.कमलेश ने कुलपति पर दागे सवाल

गोरखपुर। विश्वविद्यालय में कुलपति और शिक्षकों के बीच टकराव खत्म होता नहीं नजर आ रहा है। दोनों पक्ष आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा शिक्षकों को सोशल मीडिया पर बयान जारी करने से रोक लगाने का आदेश बेमानी साबित हो रहा है। हिंदी विभाग के प्रो. कमलेश कुमार ने एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए विवि प्रशासन व कुलपति को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कुलपति पर सवाल दागे हैं। सोशल मीडिया पर लिखे पत्र में उन्होंने गुआक्टा के शिक्षकों का समर्थन किया है। उन्होंने अभिव्यक्ति की आजादी पर पाबंदी लगाए जाने वाला विश्वविद्यालय प्रशासन का कोई भी आदेश मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने विवि प्रशासन से पूछा है कि लोगों की समस्याओं को सुलझाने, उनकी शिकायतों को सुनने के लिए निर्धारित समय तय करने और उस समय पर मौजूद रहने के शासन के निर्देश क्या विवि पर लागू नहीं होते। कुलपति प्रतिदिन किसी खास समय पर सबके लिए उपलब्ध होते हैं। उन्होंने ऑनलाइन अपॉइंटमेंट की व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा किया। उन्होंने इसे अंत्योदय के सिद्धांत के विरुद्ध करार दिया। उन्होंने कहा कि इसमें गरीब विद्यार्थी जो ऐसे मोबाइल की सुविधा से रहित हैं, उनका कुलपति से मिल पाना संभव नहीं है।

कुलाधिपति को गुआक्टा भेजेगा कुलपति का निंदा प्रस्ताव

गोरखपुर। विवि से संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों के संगठन गुआक्टा को कुलपति का रवैया रास नहीं आ रहा है। मंगलवार को गुआक्टा कार्यकारिणी की वर्चुअल बैठक डा. केडी तिवारी की अध्यक्षता में हुई। इसमें विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा शिक्षकों के प्रति किए गए अभद्र एवं अमर्यादित आचरण का निंदा एवं भर्त्सना की गई। बैठक में शिक्षकों ने कुलपति पर कई गंभीर आरोप लगाए। सदस्यों ने कुलपति के चहेते शिक्षकों को चौकड़ी करार दिया। उनकी शिकायत एवं कार्यों की जांच राजभवन तक करने की बात कही है। बैठक में निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालय के किसी भी काम में महाविद्यालय शिक्षक अपना सहयोग स्थगित रखेंगे। महाविद्यालय इकाई शिक्षक संघ अपने सभी शिक्षकों से हस्ताक्षरित पत्र कुलाधिपति, उच्च शिक्षा मंत्री एवं मुख्यमंत्री को भेजेंगे। जिसमें कुलपति के कृत्यों की चर्चा और निंदा होगी।

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