DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पूर्वांचल के दवा बाजार में दो अरब की एफडीसी दवाएं हुई डंप

पूर्वांचल के दवा बाजार में दो अरब की एफडीसी दवाएं हुई डंप

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश भर में तत्काल प्रभाव से 329 फिक्स डोज कम्बीनेशन दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी है। इन फिक्स डोज कम्बीनेशन (एफडीसी) दवाओं में विक्स ऐक्शन 500, सेरिडॉन, फेंसिडील, जिंटाप, डिकोल्ड, कोरेक्स, सुमो, जीरोडॉल, और कई तरह के ऐंटीबायॉटिक्स, पेन किलर्स, शुगर और दिल के रोगों की दवाएं शामिल हैं।

सरकार के इस फैसले से एफडीसी की छह हजार से ज्यादा प्रकार की दवाओं की बिक्री पर रोक लग गई। इसके कारण पूर्वांचल के दवा बाजार में गुरुवार को मंदी छा गई। करीब दो अरब की दवा मंडी में डंप हो गई। सरकार के इस फैसले से थोक विक्रेता और फुटकर विक्रेता परेशान हैं। उधर दवा कंपनियों ने अब तक कोई गाइडलाइन भी जारी नहीं की है। जिससे दवा विक्रेता पेशोपेश में हैं।

पूर्वांचल की सबसे बड़ी दवा मंडी में पसरा सन्नाटा

एफसीडी के रेंज में करीब छह हजार प्रकार की दवाएं शामिल हैं। इन दवाओं का निर्माण करने वाली फार्मा कंपनियों में सन, एबॉट, मैनकाइन्ड, ग्लैक्सो, फाइजर, मैकलॉड्स, पैनडेम, सुमो और जीरोडॉल समेत करीब 150 कंपनियां शामिल हैं। एफसीडी दवाओं की बिक्री पर रोक से गुरुवार को थोक दवा मंडी भालोटिया में सन्नाटा पसरा रहा। करीब 200 थोक विक्रेताओं के पास इन दवा कंपनियों की एजेंसियां हैं। इन दुकानों पर बिक्री बेहद कम हुई। भालोटिया मार्केट के थोक विक्रेताओं के पास करीब 80 करोड़ रुपए की दवाएं फंस गई हैं।

फुटकर दुकानदार भी हैं परेशान

जिले में करीब 1600 फुटकर दवा विक्रेता हैं। माना जा रहा है कि इन दवा दुकानदारों के पास करीब 60 से 80 करोड़ रुपए की दवाएं हैं। दवाओं की बिक्री पर रोक की खबर के बाद गुरुवार को विक्रेता बचे हुए माल को वापस करने की जद्दोजहद में लगे रहे।

गोरखपुर और बस्ती मंडल में करीब दो अरब का माल फंसा

भालोटिया के अलावा बस्ती , संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज में भी दवाओं का स्टॉक डंप हुआ है। छह जिलों में करीब तीन हजार दवा की दुकाने हैं। व्यापारियों की माने तो इनमें करीब 60 करोड़ की दवाएं डंप हो गई।

विक्रेताओं को टीस रही है कंपनियों की चुप्पी

थोक दवा विक्रेता और ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री दिलीप सिंह ने बताया कि दवाओं की बिक्री पर रोक से पहले सरकार ने कोई संकेत नहीं दिया। करोड़ों का माल फंस गया है। फुटकर व थोक दवा व्यापारियों के साथ ही स्टॉकिस्ट भी परेशान हैं।

कंपनियां फौरन वापस ले दवाएं

दवा विक्रेता समिति के महामंत्री आलोक चौरसिया ने कहा कि सरकार के फैसले से फुटकर दवा व्यापारियों को बड़ा झटका लगा है। वह छोटी पूंजी से व्यापार संचालित करते हैं। जब तक कंपनियां दवा वापस लेने का फैसला नहीं करती तब तक उनका पूंजी फंसी रहेगी। इससे व्यापार प्रभावित होगा। सरकार को दवा व्यापारियों को कुछ समय देना चाहिए था।

यह है फिक्स डोज कम्बीनेशन (एफडीसी)

फिक्स डोज कम्बीनेशन (एफडीसी) दो या ज्यादा प्रकार के दवाओं को मिलाकर बनाई जाने वाली दवा होती है। इनकी पावरफुल एंटीबायोटिक के कम्बीनेशन की तरह बिक्री होती है। देश में एफडीसी से हजारों दवाएं तैयार होती हैं। एफडीसी से सबसे ज्यादा दर्द निवारक दवाएं बनती हैं।

नुकसानदायक हैं एफडीसी दवाएं

ज्यादा मात्रा में एंटीबायोटिक का इस्तेमाल शरीर के लिए खतरनाक होता है। इससे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है। ये दवाएं लिवर के लिए भी नुकसानदेह हैं। एफडीसी से तैयार एंटीबायोटिक के ज्यादा सेवन से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। आम डॉक्टर मरीजों को ऐसी दवाएं देते हैं। ये दवाएं केमिस्ट की दुकानों पर आसानी से मिल जाती हैं। कई देशों में एफडीसी दवाओं पर पहले से रोक लगी हुई है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:FDC medicines of 200 crores dumped in East UP Market