गोरखपुर में ठंड से गेहूं सुरक्षित, सब्जियों में झुलसा रोग से बचाव जरूरी
Gorakhpur News - गोरखपुर में, शीत लहर से गेहूं की फसल पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं है, लेकिन 21 से 25 दिन पुरानी फसलों को हल्की सिंचाई की सलाह दी गई है। आलू, टमाटर, प्याज और लहसुन में झुलसा रोग से बचाव के लिए विशेष उपाय बताए गए हैं। सरसों की फसल में भी हल्की सिंचाई करने की सलाह दी गई है।

गोरखपुर के कृषि विशेषज्ञ डॉ. एसपी सिंह के अनुसार वर्तमान शीतलहर गेहूं के लिए नुकसानदेह नहीं है, लेकिन 21 से 25 दिन की फसल में हल्की सिंचाई करना जरूरी है। ध्यान रहे कि पानी ज्यादा न भरें, वरना फसल पीली पड़ सकती है और पैदावार कम हो जाएगी। खरपतवार खत्म करने के लिए यह सबसे अच्छा समय है, जिसके लिए आप क्लैडिनोफाप और कार्पेंटाजोंन जैसी दवाओं का सही मात्रा में छिड़काव कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बेहतर बढ़त के लिए प्रति एकड़ 30 से 40 किलो यूरिया का इस्तेमाल करें या नैनो यूरिया का घोल बनाकर स्प्रे करें। आलू, टमाटर, प्याज और लहसुन जैसी फसलों को इस मौसम में झुलसा रोग से बचाना बहुत जरूरी है। इसके लिए कार्बेन्डाजिम और मेंकोजेब के घोल का छिड़काव करें और अगर आलू की पत्तियां मुड़ने लगें तो घुलनशील उर्वरक 0:0:50 का प्रयोग करें। सरसों और लाही की फसल में अभी फूल और फलियां बन रही हैं, इसलिए पाले से बचाने के लिए हल्की सिंचाई करते रहें ताकि खेत का तापमान बना रहे।
जहां तक आम के पेड़ों की बात है, उन पर सल्फर पाउडर के घोल का छिड़काव करने से बौर अच्छी आएगी। पुराने और बड़े आम के पेड़ों में अभी पानी न दें, केवल नए लगाए गए पौधों में ही जरूरत के हिसाब से सिंचाई करें। इन छोटी सावधानियों को अपनाकर किसान भाई अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और अच्छी पैदावार हासिल कर सकते हैं।

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