Family of policemen will remain in 12-storey apartment - 12 मंजिला अपार्टमेंट में रहेगा पुलिसकर्मियों का परिवार DA Image
11 दिसंबर, 2019|11:41|IST

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12 मंजिला अपार्टमेंट में रहेगा पुलिसकर्मियों का परिवार

12 मंजिला अपार्टमेंट में रहेगा पुलिसकर्मियों का परिवार

जर्जर आवास और बैरकों में जैसे-तैसे दिन गुजार रहे पुलिसकर्मियों के लिए अच्छी खबर है। उनके लिए पुलिस लाइन में 12 मंजिला अपार्टमेंट बनने जा रहा है। बजट की स्वीकृति होने के साथ ही अपार्टमेंट के लिए पुलिस लाइन परिसर में ही जमीन का भी चयन कर लिया गया है।

एसएसपी के मुताबिक इसी सप्ताह उनके पास अपार्टमेंट नक्शा भी आ जाएगा। आवास को लेकर पिछले महीने ही शासन को प्रस्ताव भेजा गया था जिसकी बीते दिनों स्वीकृति मिलने के साथ बजट भी जारी कर दिया गया है। यही नहीं, महिला सिपाहियों के लिए एक गर्ल्स हॉस्टल भी बनाया जाएगा। इसकी भी स्वीकृति मिल गई है। 40 कमरों के गर्ल्स हॉस्टल में एक कमरे में दो से तीन महिला सिपाही रह सकेंगी।

लिफ्ट के साथ अंडरग्राउंड पार्किंग की भी व्यवस्था : अत्याधुनिक बैरक के प्रथम तल से लेकर 12वीं मंजिल पर जाने के लिए लिफ्ट लगाई जाएगी। इससे पुलिसकर्मियों को सीढ़ी पर चढ़ने की थकान से मुक्ति मिल सके और आवागमन सहज हो सके। बैरक में रहने वाले पुलिसकर्मियों के वाहनों की सुरक्षा के लिए अंडरग्राउंड पार्किंग स्थल बनाया जाएगा।

12-12 मंजिला के होंगे दो ब्लाक

पुलिस लाइन परिसर में अत्याधुनिक बैरक के 12वीं मंजिल के दो ब्लॉक बनाए जाएंगे। प्रत्येक ब्लॉक में 48 फ्लैट होंगे। दो कमरे के इस फ्लैट में पुलिसकर्मी और उनका परिवार आराम से रह सकेगा। ऊपरी मंजिल तक जाने के लिए लिफ्ट की भी व्यवस्था होगी।

1910 में स्थापित हुई थी पुलिस लाइन

वर्ष 1910 में स्थापित पुलिस लाइन परिसर में बने आठ बैरक में एक ध्वस्त हो चुका है जबकि सात निष्प्रयोज्य हो चुके बैरकों में जान हथेली पर रखकर लगभग 500 पुलिसकर्मी रहते हैं। शासन द्वारा नए बैरक भवन के लिए धन आवंटित करने से इन पुलिसकर्मियों को राहत मिल जाएगी।

पुलिसवालों के रहने के लिए 12-12 मंजिला भवन के दो ब्लॉक और महिला पुलिसकर्मियों के लिए गर्ल्स हॉस्टल बनाने की मंजूरी मिल चुकी है। इन भवनों के लिए पुलिस लाइन में ही स्थान का चयन भी कर दिया गया है। जल्द ही इस पर काम शुरू हो जाएगा।

डॉ. सुनील कुमार गुप्ता, एसएसपी

जर्जर भवन में परिवार के साथ रहने को मजबूर हैं पुलिसकर्मी

- पुलिस लाइन परिसर में धर्मशाला की तरफ का आवास सबसे जर्जर

- टूट कर गिर रहा आवासों का छत का प्लास्टर व रेलिंग का छज्जा

आम लोगों की सुरक्षा कर पुलिसवाले जब अपने घर को लौटते हैं तब अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के डर के साए में रात बीताते हैं। बारिश के दिनों में यह डर और बढ़ जाता है। जर्जर आवास के चलते आए दिन छत का प्लास्टर व रेलिंग का छज्जा टूट कर गिरता रहता है।

पुलिसकर्मियों को रहने के लिए पुलिस परिसर, पुलिस चिकित्सालय और परेड ग्राउण्ड के पास मिलाकर 700 से ज्यादा आवास बने हुए हैं। भवनों का लम्बे समय से मरम्मत का काम न होने से यह जर्जर हो चुके हैं। सबसे बदहाल स्थिति पुलिस लाइन परिसर में धर्मशाला बाजार के पास स्थित आवास की है। यहां के आवासों की छतों और रेलिंग का छज्जा आए दिन टूटकर गिर रहा है। विभाग की ओर से मरम्मत न कराने से उसमें रहने वोले मजबूरन भवन के अंदर की तो रंगाई-पोताई करवा देते हैं लेकिन बाहरी हिस्से की स्थिति जस की तस बनी रहती है।‘ओ और ‘क्यू ब्लॉक बदहाल : सबसे बदहाल स्थिति ओ और क्यू ब्लॉक की है। ओ ब्लॉक में रह रहे एक पुलिसकर्मी के परिवार के लोगों ने बताया कि आठ साल पहले अक्टूबर 2012 में विभाग ने मरम्मत कराया था। इसके बाद से कोई सुधि लेने वाला नहीं है। इसी ब्लाक की एक पुलिसकर्मी के परिवार की महिला ने बताया कि मेरे कमरे के अंदर दरवाजा तक टूट गए हैं। पुलिस अधिकारियों से कई बार इसकी शिकायत की पर बजट न होने का हवाला देकर काम नहीं करवा जा रहा।

निष्प्रयोज्य हो चुके बैरकों में रहते हैं 1100 पुलिस कर्मी

दूसरों की सुरक्षा की गारंटी लेने वाले 1100 पुलिसकर्मी वर्ष 1910 में स्थापित पुलिस लाइन में बने सात जर्जर व निष्प्रयोज्य हो चुके बैरकों में अपनी जान हथेली पर रखकर रहने को मजबूर हैं। पुलिसकर्मियों को केवल इतनी ही परेशानी नहीं है। गंदे पानी का जमाव व झाड़-झंखाड़ और गंदगी के बीच पुलिसकर्मियों का परिवार रहता है। पुलिस लाइन परिसर के अलावा अन्य कॉलोनियों तक न तो अफसर निरीक्षण कर पाते हैं और न ही यहां सफाई होती है।

बैरकों की छत बारिश में टपकती है, फर्श टूट चुकी है और 50 की क्षमता वाली प्रत्येक बैरक में 150 सिपाही रहने को मजबूर हैं। क्राइम ब्रांच कार्यालय के सामने स्थित पुलिस हास्पिटल कालोनी में रहने वाले परिवारों को ताजी हवा तक नहीं मिलती। मकानों में खिड़कियां तो हैं लेकिन पीछे इतनी गंदगी है कि कोई भी खिड़की खोलकर देखना ही नहीं चाहता। वहीं परेड ग्राउंड के सामने की कालोनी में गंदगी का अम्बार, साफ-सफाई के लिए इस कालोनी के लोग तरस जाते हैं।

स्थिति सुधारने को चाहिए तीन करोड़

पुलिस लाइन, परेड ग्राउंड और हॉस्पिटल के सामने वाली कॉलोनी में मिलाकर पुलिसकर्मियों के रहने के लिए 700 आवास हैं। इसमें 60 फीसदी जर्जर हो चुके है। आवास, नाली और सड़क की मरम्मत के लिए अधिकारियों ने पुलिस हेड क्वार्टर से तीन करोड़ रुपये मांगे हैं।

हो चुके है हादसे

18 सितंबर 2017 : पुलिस लाइंस में हेड कांस्टेबल जनरैल सिंह के मकान का छज्जा गिर गया। घर के एक सदस्य को हल्की चोटें भी आई थीं।

21 जुलाई 2017 : पुलिस लाइंस में सिपाही राजनाथ के मकान का छज्जा गिर गया। परिवार के लोग बाल-बाल बच गए थे लेकिन बाइक क्षतिग्रस्त हो गई थी।

वर्ष 2018 : पुलिस लाइंस में आईजी के पीआरओ रहे नागेश्वर सिंह के मकान का छज्जा गिर गया था।

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