खोवा जब्त किया, फैक्टरी पकड़ी, फिर भी बाहर से आ रहा मिलावटी खोवा
संक्षेप: Gorakhpur News - फोटो- -खाद्य सुरक्षा विभाग ने अभियान के तहत अब तक 23 कुंतल खोवा जब्त किया

गोरखपुर, निज संवाददाता। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से मारे गए छापे में अब तक कई कुंतल खोवा जब्त हुआ, जबकि गोरखपुर के फर्टिलाइज में नकली खोवा बनाने की फैक्टरी भी पकड़ी। इसके बावजूद जिले में कानपुर में बना हुआ खोवा ट्रेन और बस से बेधड़क गोरखपुर आ रहा है। अब इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर मिलावटी खोवा का धंधा क्यों नहीं रूक रहा है? खाद्य सुरक्षा विभाग ने दो दिन पहले प्राइवेट बस से आए 10 कुंतल और हमसफर एक्सप्रेस से आए 4 कुंतल खोवा जब्त किया था। दोनों खोवा कानपुर से आया था। इसके पहले फर्टिलाइजर में कानपुर की तरह बनाए जा रहे खोवा की फैक्टरी पकड़ी गई, जिसमें 8.5 कुंतल खोवा जब्त किया गया है, उसे नष्ट कराया जाएगा।
यह कार्रवाई दीपावली अभियान में हुई है। बावजूद इसके नकली खोवा का धंधा नहीं रुक रहा है। बताते हैं कि इसमें पहले होली के त्योहार में मार्च में ट्रेन से आए 20 कुंतल व बस से आए 8 बोरी खोवा पकड़ा गया था। रक्षाबंधन में 31 बोरी खोवा रोडवेज स्टेशन पर पकड़ा गया था। कानपुर से आया खोवा असुरक्षित होली में रेलवे बस स्टेशन पर पकड़े गए खोवा की रिपोर्ट असुरक्षित आई है। इसमें खोवा मंडी के तीन व्यापारियों ने नमूना भरवाया और खोवा बेच दिया। अब कानपुर के धंधेबाज के साथ तीनों व्यापारियों के खिलाफ वाद भी दर्ज हो चुका है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में खोवा के तीन नमूने असुरक्षित हुए हैं। चौरीचौरा में शादी समारोह में जा रहे खोवा की रिपोर्ट असुरक्षित आई है, जबकि खोवा मंडी का खोवा भी असुरक्षित आया है। यह खोवा भी कानुपर से आया था। मार्बल डस्ट की मिलावट खोवा में दुध के अलावा कोई और तत्व नहीं होना चाहिए, जबकि मिलावटखोर उसमें पावडर, रिफाइंड आयल, स्टार्च, ग्लूकोज, डिटर्जेंट मिलाते हैं। धंधेबाज खड़िया पाउडर और मार्बल डस्ट को भी मिलाकर काली कमाई कर रहे हैं। कानून सख्त बने और मिलावटखोर की तस्वीर चौराहों पर लगे अधिवक्ता शुभेंद्र सत्यदेव ने कहा, खाद्य पदार्थों में मिलावट करना लोगों की जान के साथ जानबूझकर खिलवाड़ करना है, जो प्रकृति में हत्या के प्रयास जैसा अपराध है। इस मामले में कानून को सख्त बनाने की आवश्यकता है। साथ ही नमूना परीक्षण के लिए अधिकाधिक स्वतंत्र प्रयोगशालाओं का जाना जरूरी है। यदि किसी खाद्य पदार्थ को खाने से तबीयत खराब होती है तो चिकित्सकीय प्रमाण अवश्य प्राप्त करना चाहिए। मिलावटखोरों की तस्वीर चौराहों पर लगाया जाना चाहिए। यह है सजा और जुर्माना का प्रावधान - यदि कोई नमूना असुरक्षित है और उसे किसी ने खाया नहीं है तो तीन माह सजा एवं एक लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान है। - किसी असुरक्षित खाद्य पदार्थ को खाने से सेहत खराब हुई तो छह माह सजा एवं एक लाख रुपये जुर्माना है - किसी असुरक्षित खाद्य पदार्थ को खाने से व्यक्ति की स्थिति गंभीर हो जाए तो एक वर्ष की सजा एवं तीन लाख रुपये जुर्माना। - असुरक्षित खाद्य पदार्थ से किसी की तबीयत खराब होने से मृत्यु हो जाए तो सात साल की सजा और आजीवन कारावास का सजा का प्रावधान है। खाद्य सुरक्षा विभाग खोवा सहित अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए लगातार छाप मार रहा है और कार्रवाई भी की जा रही है। लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है कि कहीं मिलावट की जानकारी हो तो सूचना दें, उनका नाम गोपनीय रखा जाएगा। डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा

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