Experts said in Gorakhpur now its difficult to challenge India - अब किसी भी देश को बहुत भारी पड़ेगी भारत से दुश्मनी DA Image

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अब किसी भी देश को बहुत भारी पड़ेगी भारत से दुश्मनी

अंतरिक्ष में सैटेलाइट मार गिराने की क्षमता हासिल करने के बाद एक तरह से भारत ने पूरी दुनिया को बता दिया है कि किसी भी देश के लिए भारत से दुश्मनी बहुत भारी पड़ेगी। आज दुनिया के सभी देशों में रोजमर्रा के काम सैटेलाइट पर ही पूरी तरह से आधारित हैं। सैटेलाइट को मार गिराने से वहां की पूरी संचार प्रणाली ध्वस्त हो जाएगी। रोजमर्रा के कार्य ठप हो जाएंगे। 

मिशन शक्ति के सफल परीक्षण पर वैज्ञानिकों ने कहा, अग्नि 5 के प्रक्षेपण के बाद ही शुरू हो गई थी डीआरडीओ व इसरो की तैयारी
अमेरिका, चीन व रूस के बाद सैटेलाइट मार गिराने वाला चौथा देश बना भारत

वैज्ञानिकों व रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अभी वैश्विक समझौते के तहत दूसरे देश के सैटेलाइट को मार गिराना युद्ध की श्रेणी में माना जाता है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया है कि देश ने जो क्षमता हासिल की है, वह किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि तेजी से बदल रहे भारत की रक्षात्मक पहल है। भारत ने अंतरिक्ष में (लो अर्थ ऑर्बिट में) सैटेलाइट मार गिराने की क्षमता प्राप्त कर ली है। जिस सैटेलाइट को परीक्षण के दौरान मार गिराया गया, वह अंतरिक्ष में तीन सौ किमी की दूरी पर लाइव था। महज तीन मिनट में इसे एंटी सैटेलाइट मिसाइल से मार गिराया गया। यह टारगेट पहले से तय था। यह मिशन पूरी तरह से मेक इन इंडिया है, यानी इस मिशन को इसरो और डीआरडीओ की सहायता से ही पूरा किया गया है।

अग्नि 5 के बाद ही देश में शुरू हुआ था काम-प्रो. आरपी ओझा
इस बारे में डीडीयू के वैज्ञानिक प्रो. आरपी ओझा का कहना है कि अग्नि 5 के प्रक्षेपण के बाद ही इसरो व डीआरडीओ ने एंटी सैटेलाइट मिसाइल पर काम करना शुरू कर दिया था। अमेरिका व रूस के पास तो यह क्षमता पहले से थी, 2007 में चीन ने भी इसका परीक्षण किया था। यह क्षमता प्राप्त होने से नि:संदेह हिन्दुस्तान दुनिया की बड़ी ताकत बन गया है। यह ताकत मिलने से आम लोगों के जीवन पर तो कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा मगर देश के वैज्ञानिकों के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। इसरो व डीआरडीओ की भविष्य की योजनाओं के लिए भी यह बड़ा कदम साबित होगा। ताकत हासिल करने का मतलब यह नहीं कि हम किसी के खिलाफ हैं। जिन देशों ने भी इस क्षेत्र में सफलता हासिल की है, वह सभी यूएन के समझौते से बंधे हैं। किसी ने दूसरे देश के खिलाफ इसका इस्तेमाल नहीं किया है मगर दूसरे देश यह जानने के बाद उसे आंख दिखाने से डरते हैं। 

चंद्रयान टू व स्पेश ह्यूमन मिशन की ओर बढ़ा भारत-प्रो. शांतनु रस्तोगी
भौतिकी विभाग के प्रोफेसर शांतनु रस्तोगी ने कहा कि पहले हमारे पास सैटेलाइट मारने की क्षमता नहीं थी। तीन सौ किमी स्पेश में इसे मार गिराने की क्षमता मिलने का असर यह होगा कि दुश्मन देश हमारे खिलाफ कोई उकसाने वाली कार्रवाई से डरेंगे। जैसा अमेरिका, चीन व रूस के मामले में होता है। लो आर्बिट में वही सैटेलाइट होते हैं, जो जासूसी आदि के लिए छोड़े जाते हैं। यह नयी सफलता है। इसका आम आदमी से कोई लेना देना नहीं है मगर यह देश के वैज्ञानिकों का उत्साह बढ़ाने वाला बड़ा कदम है। पिछले दिनों गोरखपुर आए इसरो के चेयरमैन ने कहा था कि चंद्रयान टू व स्पेस ह्यूमन मिशन पर काम चल रहा है। चंद्रयान टू के तहत चांद पर रोवर लैडर उतारना है, जबकि स्पेस ह्यूमन मिशन में स्पेस में लैब स्थापित करने की योजना है। प्रारंभ में तीन अंतरिक्ष वैज्ञानिक अंतरिक्ष में उतारे जाएंगे।    

इसके प्रयोग से दुश्मन देश में ब्लैक आउट की स्थित पैदा होगी-प्रो. हर्ष
रक्षा विशेषज्ञ प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा ने कहा कि दो बातें बहुत महत्वपूर्ण हैं। पहला भारत अब विश्व की एक प्रमुख आर्थिक शक्ति होने के साथ साथ एक उभरती हुई सैन्य शक्ति भी है। अब हम शक्ति के एक ऐसे राजमार्ग पर चल रहे हैं जिस पर ताकत के हर संभव उपकरण और हर मुहावरा हमें हासिल करते ही जाना होगा। दूसरा अंतरिक्ष तकनीक में हम बेहद अग्रणी मुकाम रखते हैं। एक साथ सौ से अधिक उपग्रहों का प्रक्षेपण, चन्द्रयान मिशन और अब गगनयान मिशन जैसी परियोजनाओं पर काम करते हुए जरूरी था कि हम अंतरिक्ष में अपनी सुरक्षा चिंताओं और संभावित खतरों के जवाब  तय कर लें। आज हमने यह तय कर लिया है।

ऐसी तकनीक दुश्मन के किसी भी सैटेलाइट को जाम कर सकती है या नष्ट कर सकती है। ऐसा करने पर दुश्मन को अपने सैनिकों के मूवमेंट या परमाणु मिसाइलों की पोजिशनिंग करने में परेशानी आ सकती है। युद्ध शुरू होने से ऐन पहले दुश्मन के सैटेलाइट को निशाना बनाने से उसकी संचार व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। ऐसे में ऑडियो और विजुअल ब्लाकेड से दुश्मन देश में ब्लैक आउट की स्थिति पैदा हो जाएगी। नेविगेशन और जासूसी से जुड़े मिलिट्री सैटेलाइट अंतरिक्ष में काफी लो एल्टीट्यूड पर होते हैं। भारत ने लो एल्टीट्यूड पर ही सैटेलाइट को ध्वस्त करने का टेस्ट किया है। 

फिफ्थ जेनरेशन के युद्ध का हथियार-प्रो. विनोद कुमार सिंह
डीडीयू में रक्षा अध्ययन विभाग के प्रो. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि भविष्य के युद्ध अत्याधुनिक तकनीकी औजारों से लड़े जाएंगे। यह सैटेलाइट सिस्टम फिफ्थ जनरेशन के युद्ध का मारक हथियार होगा। इसके माध्यम से शत्रु के सभी सैटेलाइट को ध्वस्त कर सरलता पूर्वक उसे घुटने टेकने पर मजबूर किया जा सकता है। इस क्षमता से लैस होकर आज भारत बड़ी शक्तियों की श्रेणी में आ गया। अब भारत दुनिया की बड़ी शक्तियों के समकक्ष खड़ा हो गया है। 

अब हमें संचार के पुराने तार प्रणाली पर सोचना होगा-प्रो. राकेश तिवारी
डीडीयू में भौतिकी विभाग के प्रोफेसर राकेश कुमार तिवारी का कहना है कि सैटेलाइट नष्ट की क्षमता हासिल करने के बाद अब हम दुनिया की बड़ी ताकत बन चुके हैं। अब हमें इस ओर भी सोचना होगा कि पुराने तार वाले संचार प्रणाली को बेतार प्रणाली के चक्कर में नष्ट न करें। जब भी ऐसी स्थिति आएगी तब तार वाले संचार प्रणाली से काम होंगे। इस मामले में दुनिया के अन्य सक्षम देशों के मुकाबले में अपना देश पीछे है।

जद में आएंगे छोटे आर्बिट वाले सैटेलाइट-डॉ. प्रभुनाथ 
स्पेश मामलों के जानकार डीडीयू में भौतिकी के शिक्षक डॉ. प्रभुनाथ प्रसाद ने कहा कि अपने देश में तीन से 5 हजार किमी दूरी तक स्थापति सैटेलाइट हैं, यह एक ही जगह फिक्स होते हैं। इन्हें इसरो ने ही स्थापित किया है। हम जो डिश टीवी देखते हैं, वह उन्हीं की बदौलत हैं। छोटे आर्बिट के सैटेलाइट किसी न किसी तत्कालिक उद्देश्य से भेजे जाते है। इनमें ऐसे सैटेलाइट भी होते हैं, जो जासूसी करते हैं। इन्हें मार गिराने की क्षमता हासिल करना पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।  

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