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इंसेफेलाइटिस मरीजों की होगी स्क्रब टॉयफस की जांच

इंसेफेलाइटिस के मरीजों में स्क्रब टॉयफस के पहचान की कवायद तेज हो गई है। शासन ने सभी इंसेफेलाइटिस मरीजों की स्क्रब टॉयफस जांच कराने का आदेश जारी किया है। निदेशक संचारी रोग द्वारा जारी इस आदेश में इंसेफेलाइटिस मरीजों का सैंपल मेडिकल कॉलेज लैब भेजने का निर्देश दिया गया है।

सतर्कता
निदेशक संचारी रोग ने दिया आदेश
जिला अस्पताल एवं ईटीसी से बीआरडी मेडिकल कालेज भेजे जाएंगे सैंपल

शासन के तमाम कवायदों के बाद भी इंसेफेलाइटिस का प्रकोप कम नहीं हो रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में मरीज भी बढ़े और मौतों की संख्या भी।  आईसीएमआर (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) और एनआईवी (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी) के वैज्ञानिकों ने एईएस के मरीजों में स्क्रब टायफस का संक्रमण पाया था। विशेषज्ञ अब इसे एईएस का संभावित कारण मानते हुए शोध को आगे बढ़ा रहे हैं। पिछले दिनों शोध के नतीजे शासन तक पहुंचे। इसके बाद निदेशक संचारी रोग डॉ. बद्रीविशाल ने मंडल के सभी सीएमओ को इंसेफेलाइटिस मरीजों के सैंपल मेडिकल कॉलेज भेजने को कहा। इन सैंपलों में स्क्रब टायफस की जांच होगी।

जिला अस्पताल समेत ईटीसी से भेजे जाएंगे सैंपल
मेडिकल कॉलेज के साथ ही ईटीसी और जिला अस्पताल के इंसेफेलाइटिस वार्ड में आने वाले मरीजों के सैंपल अब मेडिकल कॉलेज भेजे जाएंगे। इसके पीछे मंशा यह है कि ज्यादा से ज्यादा सैंपल जांचकर विशेषज्ञ एईएस के कारण को लेकर सटीक नतीजे पर पहुंच सकें।

इंसेफेलाइटिस मरीजों की होगी स्क्रब टॉयफस की जांच
इंसेफेलाइटिस, बीआरडी मेडिकल कालेज, गोरखपुर, स्क्रब टायफस
Encephalitis patients will be checks for Scrub Typhus
Encephalitis, BRD Medical College, Gorakhpur, Scrub Typhus

इंसेफेलाइटिस के मरीजों में स्क्रब टॉयफस के पहचान की कवायद तेज हो गई है। शासन ने सभी इंसेफेलाइटिस मरीजों की स्क्रब टॉयफस जांच कराने का आदेश जारी किया है। निदेशक संचारी रोग द्वारा जारी इस आदेश में इंसेफेलाइटिस मरीजों का सैंपल मेडिकल कॉलेज लैब भेजने का निर्देश दिया गया है।

सतर्कता
निदेशक संचारी रोग ने दिया आदेश
जिला अस्पताल एवं ईटीसी से बीआरडी मेडिकल कालेज भेजे जाएंगे सैंपल

शासन के तमाम कवायदों के बाद भी इंसेफेलाइटिस का प्रकोप कम नहीं हो रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में मरीज भी बढ़े और मौतों की संख्या भी।  आईसीएमआर (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) और एनआईवी (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी) के वैज्ञानिकों ने एईएस के मरीजों में स्क्रब टायफस का संक्रमण पाया था। विशेषज्ञ अब इसे एईएस का संभावित कारण मानते हुए शोध को आगे बढ़ा रहे हैं। पिछले दिनों शोध के नतीजे शासन तक पहुंचे। इसके बाद निदेशक संचारी रोग डॉ. बद्रीविशाल ने मंडल के सभी सीएमओ को इंसेफेलाइटिस मरीजों के सैंपल मेडिकल कॉलेज भेजने को कहा। इन सैंपलों में स्क्रब टायफस की जांच होगी।

जिला अस्पताल समेत ईटीसी से भेजे जाएंगे सैंपल
मेडिकल कॉलेज के साथ ही ईटीसी और जिला अस्पताल के इंसेफेलाइटिस वार्ड में आने वाले मरीजों के सैंपल अब मेडिकल कॉलेज भेजे जाएंगे। इसके पीछे मंशा यह है कि ज्यादा से ज्यादा सैंपल जांचकर विशेषज्ञ एईएस के कारण को लेकर सटीक नतीजे पर पहुंच सकें।

ढाई साल पहले हुई बीमारी की पहचान
करीब ढाई वर्ष से इंसेफेलाइटिस के मरीजों में स्क्रब टॉयफस के लक्षणों की पहचान डॉक्टरों व शोधकर्ताओं ने की। पिछले साल करीब दो हजार मरीज बीआरडी मेडिकल कालेज में भर्ती हुए। इनमें से नौ सौ के नमूनों की जांच लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी(केजीएमयू) में हुई। जांच में करीब 100 मरीजों में स्क्रब टॉयफस की पुष्टि हुई। बीआरडी के एनआईवी में हुई जांच में करीब 60 फीसदी मरीजों में स्क्रब टॉयफस के लक्षण मिले। 

बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है स्क्रब टॉयफस
यह बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है। यह बैक्टीरिया एक खास प्रकार के कीड़े के लार में होता है। यह कीड़ा बड़े घास के मैदान, चूहों या गिलहरियों के शरीर में रहता है। इसे चीलर भी कहते हैं। यह कीड़ा जब छोटे बच्चों को काटता है तो लार के जरिए बैक्टीरिया बच्चों के खून में मिल जाता है। 
 

 

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