
सामान्य गले-कान का दर्द समझकर खाई दवाएं, जांच में निकला ईगल सिंड्रोम
Gorakhpur News - कान के नीचे और जबड़े के बीच बढ़ रही हड्डी बना रही दिव्यांगता का कारण छह माह के अंदर 60 मरीज इलाज के लिए एम्स पहुंचे लेट पहुंचने वाले मरीजों का
गोरखपुर, कार्यालय संवाददाता। बार-बार गले और गर्दन में दर्द होना, कान तक फैलना और निगलने में अगर कठिनाई हो रही है, तो इसे नजर अंदाज न करें। यह गंभीर बीमारी ईगल सिंड्रोम हो सकती है। इस सिंड्रोम की वजह से मरीज दिव्यांगता का शिकार भी हो सकते हैं। ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ी है। एम्स में ऐसे मरीज इलाज के लिए आ तो रहे हैं, लेकिन इनमें पांच से सात फीसदी मरीज ऐसे हैं, जिनके इलाज में देरी की वजह से सर्जरी तक करनी पड़ रही है। एम्स के विशेषज्ञों का मानना है कि इलाज में देरी की वजह से यह सामान्य दर्द ईगल सिंड्रोम का रूप ले लिया है।
अगर सही समय पर मरीज इलाज के लिए आ जाते तो मरीजों को यह बीमारी नहीं होती और सर्जरी नहीं करनी पड़ती। नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋचा बताती हैं कि सिर या गर्दन में असामान्य संरचनाएं चेहरे या गले में दर्द का कारण बनती हैं। इसके लिए एक लम्बी स्टाइलॉयड प्रक्रिया (कान के नीचे की हड्डी) या एक सख्त स्टाइलोहायॉइड लिगामेंट (स्टाइलॉयड प्रक्रिया और जबड़े के बीच ऊतक की पट्टी) जिम्मेदार होती है। यह बीमारी ईगल सिंड्रोम है। लेकिन, सामान्य तौर पर मरीज इस बीमारी को समझ नहीं पाते हैं। इस बीमारी से पहले एक से दो केस हर माह आते थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 10 से 12 हो गई है, जिसके संकेत अच्छे नहीं है। क्योंकि, इस बीमारी में सही समय पर इलाज न होने से सुनने की क्षमता चले का खतरा 90 फीसदी है। बताया कि इस बीमारी में करीब दो से ढाई सेंटीमीटर लंबी स्टाइलॉयड प्रोसेस हड्डी बढ़ जाती है, जो ग्लोसोफेरींजल नाम की नस को दबाती है, जिसकी वजह से असहनीय दर्द कानों और गले में होता है। हड्डी बढ़ने के बाद सर्जरी की एकमात्र विकल्प है।

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