DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

धूल फांक रहे हैं 100 करोड़ के अस्पताल, डॉक्टर हैं न मरीज

स्वास्थ्य विभाग जिले में अस्पताल दर अस्पताल तैयार कर रहा है। उसे डॉक्टर नहीं मिल रहे हैं। विभाग के कई भवन सफेद हाथी बने हुए हैं। करीब 100 करोड़ के भवन बन कर तैयार हैं अब इन्हें डॉक्टर का इंतजार है। करोड़ों की लागत से बने आधा दर्जन अस्पतालों में सिर्फ ओपीडी संचालित हो रही है। इनमे से कई अस्पतालों में एमबीबीएस के बजाए आयुर्वेद और होम्योपैथ इलाज कर रहे हैं। इसके कारण यह आम जनता के लिए बेकार साबित हो रहे हैं। पेश है एक रिपोर्ट। 

दो साल से चल रही है 20 करोड़ के अस्पताल में ओपीडी 
सरकारी लालफिताशाही का सबसे बड़ी मिसाल एअरफोर्स के पास बना 100 बेड का टीबी सह सामान्य अस्पताल है। इसके निर्माण की लागत 20 करोड़ रुपये से अधिक है। बीते दो साल से इस अस्पताल में सिर्फ ओपीडी चल रही है। एक डॉक्टर सीएमओ ने संबद्ध किया और दो एडी हेल्थ ने। मरीजों को ज्यादातर दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही है। इस अस्पताल में टीबी जांच की सुविधा नहीं है।

‘‘स्वास्थ्य विभाग का हाल
100 बेड वाले टीबी अस्पताल में नहीं भर्ती होते मरीज
आठ डॉक्टरों की जगह पर तैनात हैं सिर्फ एक डॉक्टर
ओपीडी केन्द्र बनकर रहे गए हैं 30-30 बेड वाले छह सीएचसी
जिले में डॉक्टरों के 40 फीसदी पद रिक्त
सीएचसी संचालन के लिए 133 डॉक्टरों की है दरकार
12 डॉक्टरों ने विभाग को सौंप दिया है इस्तीफा’’


छह करोड़ के अस्पताल में चलती है ओपीडी 
 गुलरिहा के खुटहन के पास छह करोड़ की लागत से 30 बेड की चरगावां सीएचसी का निर्माण हुआ है। इसका उद्घाटन सीएम योगी आदित्य नाथ ने किया। सीएचसी में आज तक एक भी मरीज भर्ती नहीं हुआ है। सीएचसी से एक डॉक्टर और कुछ कर्मचारी संबद्ध है। शुक्रवार को अस्पताल में दो मरीज मिले। मरीजों ने बताया कि जांच के लिए शहर जाना पड़ता है।

तीन साल से चल रही है सिर्फ ओपीडी 
उरूवा के अरांव जगदीशपुर में तीन करोड़ से बनी 30 बेड की सीएचसी में तीन साल से ओपीडी चल रही है। यहां डॉक्टर के पद सृजित हैं आठ और तैनात हैं एक। वह भी अस्पताल हफ्ते में एक या दो दिन इलाज करने पहुंचते हैं। अस्पताल में मरीजों को इलाज की ज्यादातर सुविधाएं नहीं मिलती। खून-पेशाब की जांच भी नहीं होती। 

10 साल से सीएचसी में नहीं तैनात हुए डॉक्टर
चौरीचौरा के विश्वम्भरपुर-तीहा में 2009 में बना डॉ. भीम राव अम्बेडकर सीएचसी को आज भी डॉक्टर का इंतजार है। आज तक इस सीएचसी में किसी डाक्टर की और न ही किसी स्वास्थ्य कर्मी की तैनाती हुई। 30 बेड वाली यह सीएचसी ज्यादातर बंद रहती है। सीएचसी में लगे पंखा व दूसरे उपकरण चोरी हो गए। सीएचसी की देख रेख के लिये गार्ड की तैनाती भी नही हुई है। 

आयुर्वेद विशेषज्ञ करते हैं मरीजों का इलाज
खोराबार शिवपुर सीएचसी में तो विभाग को कोई एमबीबीएस डॉक्टर ही नहीं मिला। यहां आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. राजेश्वर गुप्ता सहित 8 की संख्या में स्टाफ की नियुक्ति की गई है। ऐसे में मरीजों को इलाज के लिए पीएचसी खोराबार या जिला अस्पताल जाना पड़ता है। एक्सरे रूम बना हुआ है लेकिन एक्सरे मशीन नदारद है। पैथौलॉजी जांच के लिए डॉ. तनुश्री पाठक की नियुक्ति हुई मगर उन्हें खोराबार अटैच कर दिया गया है।

करोड़ों के न्यू पीएचसी के भवन हो रहे हैं जर्जर
इसके अलावा बासूडिहा, पिपरौली सीएचसी में भी डॉक्टर नहीं रहते। इनमें मरीजों की भर्ती नहीं होती। सभी सीएचसी की लागत तीन से पांच करोड़ रुपये है। जिले में 58 एडिशनल और न्यू पीएचसी भी जिले में बने हैं जहां पद सृजित नहीं हुए हैं। इनके निर्माण व संसाधनों पर करीब 70 करोड़ रुपए खर्च हुए। 

150 डाक्टरों की है दरकार
जिले में सीएमओ के अधीन 293 डॉक्टरों के पद सृजित हैं। इनमें से 133 पद रिक्त हैं। 12 डॉक्टरों ने इस्तीफे की पेशकश की है और वह ड्यूटी पर हाजिर नहीं हो रहे हैं। कई अस्पतालों में पद सृजित न होने से दूसरे अस्पताल से डॉक्टरों को संबद्ध किया गया है। माना जा रहा है कि पद सृजन के बाद जिले में करीब 150 नए डॉक्टरों की दरकार होगी।

कमीशन के खेल में बन रहे भवन
डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग में नए अस्पतालों का निर्माण बंद नहीं हुआ है। चार नए सीएचसी का निर्माण चल रहा है। इनमें से एक तो सीएचसी बासूडिहा से महज दो किलोमीटर के फासले पर ही निर्मित हो रही है। 

‘‘डॉक्टरों की तैनाती शासन के स्तर से होती है। डॉक्टरों के जो पद रिक्त हैं और जहां पद सृजित नहीं हैं उनकी सूचना शासन को दे दी गई है। वहां से डॉक्टर मिलेंगे तो उन्हें प्राथमिकता के आधार पर तैनात किया जाएगा।’’
डॉ. आईवी विश्वकर्मा, प्रभारी सीएमओ

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Dust cleansing is 100 million hospital