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यहां ट्रेन के रुकते ही सहम जाते हैं गार्ड और ड्राइवर

गोरखपुर से मुजफ्फरपुर का रेल सफर यूं तो बहुत ही सुहाना है लेकिन जब ट्रेन बाल्मीकि नगर के जंगल में पहुंचती है तो चालक और गार्ड सहम जाते हैं। जगंल में टे्रन के प्रवेश करने से पहले से ही गार्ड अपने ब्रेक वान का दरवाजा और खिड़कियां बंद कर लेते हैं। 
गार्डों और चालकों के अंदर यह डर किसी अंधविश्वास की वजह से नहीं बल्कि बाल्मीकि नगर में रहने वाले शेर और हाथी की वजह से है। 

इस जंगल में खुले में शेर और हाथी घूमते हैं। चारदीवारी बनने के बाद भी अक्सर रात के समय शेर ट्रैक के पास आ जाते हैं। इंजन और ब्रेक यान का दरवाजा बंद होने के बाद दो किलोमीटर लम्बे जंगल पार होने तक चालक और गार्ड की सहमें रहते हैं। अगर ट्रेन चलती रहती है तो कोई खास दिक्कत नहीं होती है लेकिन अगर रात के समय में किन्हीं कारणों से यहां ट्रेन रुक गई तो गार्ड और चालक बुरी तरह से सहम जाते हैं। आए दिन खासकर रात में शेर ट्रैक के आसपास आ आ जाते हैं लेकिन सुखद यह है कि अभी तक किसी प्रकार की कोई अनहोनी नहीं हुई। 

मालगाड़ी के चालकों को लगता है सर्वाधिक डर
मालगाड़ी के चालकों को इस जगंल में सर्वाधिक डर लगता है। दरअसल मालगाड़ी का ब्रेक यान खुला होता है। उस ब्रेक यान में कोई भी जानवर आसानी से चढ़ सकता है। ऐसे में जब मालगाड़ी जंगल के रास्ते गुजरती है तो गार्ड चौकन्ने हो जाते हैं।

दो किलोमीटर पार होने के बाद लेते हैं राहत की सांस
बाल्मीकि नगर जंगल में करीब दो किलोमीटर लम्बी रेल लाइन पड़ती है। एहतिहात के तौर पर यहां ट्रेन कर रफ्तार कम कर दी जाती है। यहां से 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेन चलती है।    

केस-1
शीतल प्रसाद, गार्ड एक्सप्रेस
मैं अक्सर इस रूट पर मुजफ्फरपुर तक टे्रन लेकर जाता हंू। दिन में कोई दिक्कत नहीं होती है लेकिन जब रात के समय ट्रेन वहां से गुजरती है तो मन में डर बैठ जाता है। चारदीवारी बनाए जाने के बाद भी वहां अक्सर शेर दिख जाते हैं। रफ्तार कम रहती है इसलिए ट्रेन को जगंल पार करने में 7 से 8 मिनट लग जाता है। जंगल पार होने के बाद ही राहत की सांस ले पाता हंू। हालांकि अभी किसी के साथ कोई अनहोनी नहीं हुई है। 

केस-1
जटाशंकर दुबे, मालगाड़ी गार्ड
मैं मालगाड़ी का गार्ड हंू। केबिन तो है लेकिन काफी हिस्सा खुला भी है। रात के समय जैसे ही मालगाड़ी जंगल में प्रवेश करती है तो मन में भय बैठ जाता है। बस यही मनाता हंू कि जल्दी से जंगल पार हो जाए। अक्सर ट्रेन के आसपास शेर दिख जाते हैं। अच्छी बात तो यह है कि कभी कोई हादसा नहीं हुआ और चारदीवारी की वजह से हाथी ट्रेन के आसपास नहीं आ पाते हैं। 

गोरखपुर से मुजफ्फरपुर रूट पर जाने वाली मेल एक्सप्रेस और सवारी ट्रेनों की संख्या-6
गोरखपुर से मुजफ्फरपुर रूट पर जाने वाली मालगाड़ियों की संख्या-13    
         

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  • Web Title:Diver and Guard afraid when train stopped in Jungle