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आक्‍सीजन त्रासदी: एक बरस बीता, नहीं थमा मौतों का सिलसिला

एक बरस बीता, नहीं थमा मौतों का सिलसिला

आज से ठीक एक बरस पहले 10/11 अगस्त की रात पूर्वांचलवासियों के लिए मनहूस बन गई। बीआरडी मेडिकल कालेज में लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति ठप हो गई। इसके कारण बालरोग में भर्ती 33 मासूम और मेडिसिन वार्ड में भर्ती 18 मरीजों के लिए वह जिंदगी की आखिरी रात साबित हुई।

एक साल बाद भी ऑक्सीजन त्रासदी के दंश से बीआरडी मेडिकल कालेज उबर नहीं सका है। कालेज के चार कर्मचारी आज भी जेल की सलाखों के पीछे हैं। इस मामले में 10 महीने जेल में रहे कालेज के तीन शिक्षक आज भी निलंबित हैं। ऑक्सीजन आपूर्ति करने वाली फर्म बदल दी गई। फिर भी डॉक्टरों और कर्मचारियों के जेहन में दहशत कायम है।

फर्म ने ठप कर दी आपूर्ति

बीआरडी में उस समय लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति की जिम्मेदारी पुष्पा सेल्स के पास थी। करीब 70 लाख रुपए के बकाए में फर्म ने आपूर्ति ठप कर दी। बीआरडी में हुई इस घटना से मेडिकल कालेज में इंतजामों की पोल खुल गई।

एक दिन पहले ही सीएम ने किया था दौरा

इस घटना से एक दिन पहले ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने कालेज का दौरा किया था। इस दौरान महकमे के सभी आला हुक्मरान मौजूद रहे। किसी को इतनी बड़ी चूक की भनक नहीं लगी। सीएम सिटी में हुई इस त्रासदी से सरकार की जमकर किरकिरी हुई।

हादसे के बाद शुरू हुआ डैमेज कंट्रोल

बीआरडी में हादसे के बाद सरकार डैमेज कंट्रोल में जुट गई। सरकार ने बीआरडी में लिक्विड ऑक्सीजन आपूर्ति करने वाली फर्म को बदल दिया। अब आईनॉक्स लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रही है। हांलाकि ऑक्सीजन के रेट को लेकर उस पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। घटना के बाद बालरोग विभाग में 79 बेड का फैब्रिक्रेटेड वार्ड बना। नेत्र विभाग के रोगियों के लिए बने वार्ड नंबर 11 को बच्चों के लिए परिवर्तित कर दिया गया। बीआरडी में एक साल पहले जब घटना हुई थी तब 16 वार्मर थे। आज वार्मर की संख्या बढ़कर 48 हो गई है। बच्चों के तीमारदारों के लिए रैन बसेरा का निर्माण हुआ है। वार्डों में संक्रमण पर अंकुश के लिए भी विशेष इंतजाम किये गए हैं। तीमारदारों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक हैं। अंदर की खबरें और स्थिति बाहर नहीं आ सके, इसके लिए मेडिकल कालेज प्रशासन द्वारा मीडिया के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।

अभी होना यह इंतजाम

बीआरडी के बालरोग में मरीजों के इलाज में दवाओं की कमी को भी दूरा करने का प्रयास किया गया। इसके लिए बालरोग में अतिरिक्त ड्रग स्टोर बनाने की योजना है। डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए बालरोग विभाग में डीसीएच के लिए 20 डॉक्टरों को भेजा गया है। नवजातों की मौतों को कम करने के लिए बालरोग विभाग में एक डीएम नियोनेटोलॉजी को तैनात किया गया।

नहीं थम रही हैं मौतें

इस वर्ष के सात महीने (जनवरी से जुलाई) में इंसेफेलाइटिस से 92 मासूमों की मौत हो चुकी है। पिछले दो वर्षों के तुलना में इन सात महीनों में इंसेफेलाइटिस के मरीजों की संख्या और मौत में कमी है लेकिन मृत्यु दर काफी अधिक है। बीआरडी मेडिकल कालेज में एक जनवरी से 31 जुलाई तक इंसेफेलाइटिस के 278 मरीज भर्ती हुए। इनमें करीब 33 फीसदी मृत्यु दर रही। मरने वालों में अधिकतर बेटियां हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि लड़कियों में कुपोषण की समस्या अधिक होने से उनके मृत्यु का दर लड़कों की तुलना में अधिक है। बालरोग विभाग में इस साल अब तक 2100 से अधिक नवजात भर्ती हुए। जिनमें करीब 800 नवजातों की मौत हो गई। इंसेफेलाइटिस के अलावा दूसरी अन्य बीमारियों से भी करीब 1259 मरीज भर्ती हुए। जिनमें से 360 की मौत हो गई है।

कालेज को है डॉक्टरों की दरकार

मेडिकल कालेज में डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। रेजीडेंट के अधिकांश पद रिक्त हैं। सीनियर डॉक्टरों में एक निलंबित चल रहे हैं। हादसे के बाद हुई पुलिसिया कार्रवाई और प्रशासनिक दबाव के कारण दो सीनियर डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया। मरीजों का इलाज पूरी तरह से संविदा डॉक्टरों के हवाले है।

एक साल में नहीं खरीदे जा सके उपकरण

हादसे से चंद दिन पहले ही शासन ने बालरोग विभाग के डॉक्टरों की मांग पर उपकरणों के लिए सवा सात करोड़ रुपए दिए। यह रकम आज तक खर्च नहीं की जा सकी है। इसकी खरीद में कोई डॉक्टर शामिल नहीं होना चाहता।

डिगा है आत्मविश्वास

ऑक्सीजन त्रासदी के बाद बीआरडी में हुई पुलिसिया कार्रवाई से डॉक्टर और कर्मचारी सकते में आ गए। जांच के नाम पर पुलिस ने डॉक्टर व कर्मचारियों को मानसिक प्रताड़ना दी। उसका असर आज भी डॉक्टरों व कर्मचारियों के जेहन पर है। उनका आत्मविश्वास डिग गया है। कोई डॉक्टर बालरोग विभाग में जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। उपकरणों की खरीद की कमेटी में डॉक्टर शामिल नहीं होना चाहते। डर इतना है कि विभाग के स्थाई शिक्षक इंसेफेलाइटिस मरीजों के बेड हेड टिकट(बीएचटी) पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं।

इन वार्डों में ठप हुई थी लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई

-ट्रॉमा सेंटर

-100 बेड वाला इंसेफेलाइटिस वार्ड

- नियोनेटल यूनिट

- इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड-14

- मेडिसिन आईसीयू

-एपीडेमिक मेडिसिन वार्ड-12

- बालरोग वार्ड 6

- वार्ड नंबर 2

- एनेस्थिसिया आईसीयू

- लेबर रूम

- जनरल सर्जरी, न्यूरो सर्जरी ओटी

इस मामले में दर्ज मुकदमे का स्टेटस

इस मामले में डीजीएमई डॉ. केके गुप्ता की तहरीर पर लखनऊ के हजरतगंज थाने में पुष्पा सेल्स के संचालक मनीष भंडारी, पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र, उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला, एनेस्थिसिया के विभागाध्यक्ष डॉ. सतीश कुमार, एनएचएम के नोडल अधिकारी डॉ. कफील , सहायक लेखाकार संजय त्रिपाठी, गजानन जायसवाल, उदय शर्मा और सुधीर पाण्डेय के खिलाफ गैर इरादतन हत्या, कर्त्तव्य में लापरवाही, भ्रष्टाचार और साजिश रचने का मुकदमा दर्ज किया गया। इनमें से पुष्पा सेल्स के संचालक मनीष भंडारी, पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र, उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला, एनेस्थिसिया के विभागाध्यक्ष डॉ. सतीश कुमार, एनएचएम के नोडल अधिकारी डॉ. कफील को जमानत मिल चुकी है। चारों कर्मचारी आज भी जेल में बंद हैं। सुधीर पाण्डेय ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी है।

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  • Web Title:Deaths continuestion not stopped even after one year of oxygen tragedy in BRD