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21 नवंबर, 2020|7:12|IST

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बेटी ने निभाया फर्ज,पिता की चिता को मुखाग्नि देकर किया अंतिम संस्कार

जिस पिता के कंधों पर बेटी खेलकर बड़ी हुई थी। रविवार को उसी पिता की अर्थी को उसने कंधा भी दिया। मुखाग्नि देकर बेटे का फर्ज निभाया। बेटी को पिता की अर्थी कंधे पर ले जाते देख लोगों की आंखे नम हो गईं। आम तौर पर पुरुष प्रधान समाज में बेटा ही अर्थी को कंधा देता है। लेकिन इस परंपरा को तोड़ते हुए ग्राम महुआपार की बेटी प्रियंका ने ही पिता रामकिशुन निषाद के अंतिम क्रिया कर्म के सभी संस्कार पूरे किए।

महुआपार निवासी रामकिशुन निषाद (45 वर्ष)  पांच वर्ष से ब्लड कैंसर से पीड़ित थे। परिवार के गैर जानकारी में उन्होंने पहले इलाज कराना शुरू कर दिया, ताकि ठीक हो जाए । परिवार गंभीर बीमारी को जानेगा तो हौसला टूट जाएगा। कहने मात्र के वह एलआई सी ऐजेंट थे परन्तु उनका बीमा काम भी नहीं चलता था । दो बीघे जमीन पूरे परिवार का खर्च हालत काफी बिगड़ती गई।  परिवार के लोगों को जब  बीमारी की जानकारी हुई तो वे डट कर अंतिम तक मुकाबला किए, परंतु बचा नहीं पाए । राम किशुन रविवार की सुबह इस संसार को छोड़कर चले गए । वह अपनी बेटियों को- प्रियंका, प्रतिभा, अर्चना व कस्तूरबा को सेना में भर्ती के काबिल  बनाना चाहते थे। ताकि बड़ी होकर उनकी बच्चियां देश सेवा करें।  अपने पिता व परिवार का नाम रोशन कर सकें। परन्तु ख्वाब अधूरा रह गया । कैंसर से चार वर्षों से संघर्ष करते हुए वह रविवार को हार गए। 

बड़ी बेटी प्रियंका के कंधे पर परिवार का भार आ पड़ा । पिता की मृत्यु के बाद, असहाय महसूस कर रहे परिवार की तरफ किसी ने हाथ नहीं बढ़ाया, तो बेटियां अपने पिता के अंतिम संस्कार के लिए कंधा दिया।  मुखाग्नि देकर एक औलाद का फर्ज पूरा किया।

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  • Web Title:Daughter gave mukhagni to father completed last rituals