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आईडीएफसी बैंक का तत्कालीन मैनेजर पर भी केस, विवेचना में बढ़ा नाम

आईडीएफसी बैंक का तत्कालीन मैनेजर पर भी केस, विवेचना में बढ़ा नाम

संक्षेप:

Gorakhpur News - गोरखपुर में ऑनलाइन गेमिंग एप के जरिए करोड़ों रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस ने आईडीएफसी बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक की भूमिका पर शक जताया है। मुख्य आरोपी राकेश प्रजापति के साथ बैंक प्रबंधक की करीब 750 बार बातचीत हुई है। कई म्यूल खातों का इस्तेमाल कर ठगी की गई।

Jan 11, 2026 02:10 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गोरखपुर
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गोरखपुर, वरिष्ठ संवाददाता। ऑनलाइन गेमिंग एप के जरिए करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के मामले में पुलिस जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। गुलरिहा थाना क्षेत्र में कॉल सेंटर खोलकर ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर सट्टेबाजी और म्यूल खातों के जरिए बड़े पैमाने पर साइबर फ्रॉड करने के मामले में अब आईडीएफसी बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। पुलिस ने ठोस साक्ष्य मिलने के बाद बैंक मैनेजर का नाम विवेचना में बढ़ा दिया है। जांच में सामने आया है कि इस साइबर फ्रॉड नेटवर्क के संचालन में आईडीएफसी बैंक सहित विभिन्न बैंकों के करीब 55 म्यूल खातों का इस्तेमाल किया गया।

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इन खातों में ऑनलाइन गेमिंग एप के माध्यम से ठगी की रकम जमा कराई जाती थी और फिर कुछ ही समय में निकासी कर ली जाती थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, गुलरिहा थाना क्षेत्र के नारायणपुर नंबर दो टोला हरिजनगंज निवासी मुख्य आरोपी राकेश प्रजापति प्रतिदिन पांच से छह बार गुलरिहा स्थित आईडीएफसी बैंक शाखा में आता-जाता था। बैंक कर्मचारी कमलेश से उसकी नजदीकी के बाद म्यूल खातों के संचालन का यह नेटवर्क सक्रिय हुआ। जांच में यह भी सामने आया है कि विजय नामक व्यक्ति के खाते में एक महीने के भीतर करीब 2.60 लाख रुपये का लेनदेन हुआ, जबकि जान आलम के खाते में उसी अवधि में लगभग 21 लाख रुपये जमा कराए गए, जिनमें से करीब 20 लाख रुपये निकाल लिए गए। साइबर ठगी की सूचना मिलने के बाद ये खाते बंद कर दिए गए। मैनेजर की भूमिका पर गहराया शक पुलिस का कहना है कि बिना शाखा प्रबंधक की अनुमति के चालू खात खुलना संभव नहीं होता। ऐसे में आईडीएफसी बैंक के तत्कालीन मैनेजर सुजीत दुबे की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच में सामने आया है कि बीते छह माह में बैंक मैनेजर और मुख्य आरोपी के बीच करीब 750 बार मोबाइल पर बातचीत हुई। दोनों के बीच व्हाट्सएप चैट के भी प्रमाण मिले हैं। इन साक्ष्यों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है। बैंक प्रबंधन से मांगी गई जानकारी गुलरिहा पुलिस ने बैंक प्रबंधन से पत्राचार कर मैनेजर सुजीत दुबे का मूल और वर्तमान पता मांगा है। साथ ही बीते एक वर्ष में शाखा में खुले करीब तीन हजार खातों का विवरण भी जुटाया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने खाते म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल हुए। कर्मचारी और मैनेजर दोनों गायब मामले के खुलासे के बाद बैंक कर्मचारी कमलेश पिछले तीन महीनों से बैंक नहीं आ रहा है और फरार बताया जा रहा है। वहीं विवेचना में नाम जुड़ने के बाद बैंक मैनेजर भी अंडरग्राउंड हो गया है। पुलिस उनकी तलाश में दबिश दे रही है, लेकिन दोनों के मोबाइल बंद होने के कारण लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही है। हाईकोर्ट पहुंचा आरोपी का साथी उधर, इस मामले में जेल में बंद मुख्य आरोपी राकेश प्रजापति के सहयोगी जान आलम की ओर से हाईकोर्ट में जमानत के लिए नोटिस दाखिल किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।