शादी वाले घरों से लेकर मजदूरों तक को टेंशन दे रहा रसोई गैस सिलेंडर

Apr 11, 2026 02:51 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गोरखपुर
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Gorakhpur News - -शादी वाले घरों में सिक्योरिटी मनी और कीमत को लेकर दिक्कत -सिक्योरिटी के साथ एक

शादी वाले घरों से लेकर मजदूरों तक को टेंशन दे रहा रसोई गैस सिलेंडर

बमुश्किल पांच दिन बाद से मांगलिक कार्य शुरू हो रहे हैं। ऐसे में 500 से लेकर 1500 मेहमानों के लिए भोजना पकाने के लिए लोग सिलेंडर की उम्मीद में जिला पूर्ति कार्यालय पहुंच रहे हैं। सिलेंडर के लिए सिक्योरिटी मनी और कीमत सुनकर लोगों के होश उड़ जा रहा है। यदि किसी को 5 कामर्शियल सिलेंडर लेना है तो उन्हें करीब 25000 रुपये खर्च करना होगा। इसके साथ ही प्रवासी मजदूरों और छात्रों के लिए छोटू सिलेंडर की उपलब्धता भी हवा में है। कुछ बड़े होटल और रेस्टोरेंट को छोड़ दें तो सिलेंडर को लेकर संकट बरकरार है। आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ ने विभिन्न वर्गों पर सिलेंडर की किल्लत को लेकर पड़ताल की।

शादी वाले घरों से लेकर मजदूरों तक को रसोई गैस सिलेंडर टेंशन दे रहा है।होटल-रेस्टोरेंट इंडस्ट्रीबड़े रेस्टोरेंट-होटलों तक ही पहुंच रहा कामर्शियल सिलेंडरहकीकत यह है कि छोटे दुकानदारों को सिलेंडर की उपलब्धता नहीं हो पा रही है। जिला पूर्ति कार्यालय में आवेदन के बाद रेस्टोरेंट और होटल मालिकों के आवेदन पर 70 फीसदी तक सिलेंडर की उपलब्धता का दावा किया जा रहा है। चटोरी गली में दुकानदार नवीन सिंह विशेन कहते है कि सामान्य दिनों में महीने में 90 सिलेंडर का खपत होता था। वर्तमान में सिर्फ 10 से 15 सिलेंडर ही मिल रहा है। तारामंडल क्षेत्र के होटल कारोबारी राहुल सिंह ने कहा, कनेक्शन नहीं मिलने से सिलेंडर नहीं मिल रहा है। पीएनजी कनेक्शन लेने का प्रयास किया जा रहा है।कोट-कामर्शियल सिलेंडर नहीं मिलने से काफी दिक्कत हो रही है। गोदाम में कोयला और लकड़ी के चूल्हे पर मटर और आलू आदि उबाला जा रहा है। 80 फीसदी आइटम कोयला और लकड़ी पक रहा है। रविंद्र निषाद, बिछियामजदूरों का संकट: आधार कार्ड दिखाया, नहीं मिला छोटू सिलेंडरप्रशासन के दावे के अनुसार लोगों को कामर्शियल या छोटू सिलेंडर नहीं मिल रहा है। आधार दिखाने पर गैस एजेंसियों से छोटू सिलेंडर नहीं मिल रहा है। वेग 150 से 200 रुपये किलो गैस खरीद रहे हैं। पैडलेगंज में सिक्सलेन फ्लाईओवर के पास काम कर रहे श्रमिकों ने बताया कि छोटू सिलेंडर नहीं मिल रहा है। वे बिहार के बेतिया से आए हैं। उन्हें महंगे दाम पर गैस खरीदना पड़ रहा है।शहर की गैस एजेंसियों पर छोटू सिलेंडर नहीं मिल रहा है। हम आठ लोग एक साथ काम कर रहे हैं। हम लोग आधार कार्ड लेकर गए थे, लेकिन मायूस होकर लौट आना पड़ा। यह संकट दूर होना चाहिए।मुक्ति महतो, बेतिया, बिहारशादी-विवाह वाले परिवार: 10 सिलेंडर नहीं मिले तो बारातियों का खाना नहीं बनेगाशादी के सीजन की शुरुआत होते ही घरेलू गैस सिलेंडर की मांग तेजी से बढ़ गई है। जिला पूर्ति कार्यालय में दो दिनों में कुल 125 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें आवेदकों ने 10 से लेकर 20 सिलेंडर तक की मांग की है। हालांकि प्रशासन द्वारा सीमित संसाधनों को देखते हुए प्रति आवेदन 5 से 6 सिलेंडर ही उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है। शुक्रवार को बुलंदपुर से एक दंपति, बेलास पासवान अपनी दिव्यांग पत्नी के साथ जिला पूर्ति कार्यालय पहुंचे। उन्होंने अपनी पुत्री के 20 अप्रैल को होने वाले विवाह के लिए सिलेंडर की मांग करते हुए आवेदन और निमंत्रण पत्र जमा किया। कर्मचारियों का कहना है कि शादी समारोह के लिए सिलेंडर देने के बदले में सिक्योरिटी भी जमा कराई जा रही है। अधिकतम पांच सिलेंडर तक आवंटित किए जा रहे हैं। एक सिलेंडर लेने के लिए 2400 सिक्योरिटी और 2200 रुपये कीमत देनी होगी। समारोह होने के बाद सिलेंडर वापस करने पर 2400 रुपये की सिक्योरिटी वापस हो जाएगी। कोट:20 अप्रैल को बेटी की शादी है। गैस सिलेंडर की जरूरत है। एजेंसी से मिलना मुश्किल हो रहा है, इसलिए यहां आवेदन देने आए हैं ताकि समय पर व्यवस्था हो सके।राम गोविन्द गौड़, मीरपुरउद्योग: प्लास्टिक-एल्युमिनियम बर्तन की यूनिटें मुश्किल मेंसीज फायर के बाद क्रूड आयल की कीमतों में भले ही कुछ कमी आई हो लेकिन प्लास्टिक दाने की कीमतों में राहत नहीं मिल रही है। गीडा में प्लास्टिक की यूनिटों के साथ ही पैकेजिंग उत्पाद बनाने वाली यूनिटें प्रभावित हैं। गीडा से लेकर इंडस्ट्रियल एरिया में प्लास्टिक का बोरा बनाने वाली यूनिटें बंदी के कगार पर पहुंच गई हैं। 80 से 90 रुपये प्रति किलो मिलने वाला प्लास्टिक दाना 160 से 170 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। एसडी इंटरनेशनल के एमडी विनय अग्रवाल का कहना है कि प्लास्टिक दाने की कीमत बढ़ने से प्रोडक्शन कास्ट बढ़ गया है। उद्यमी वीरसेन सिंह का कहना है कि कच्चा माल 30 फीसदी तक महंगा हो गया है। पुराने रेट पर ऑर्डर पूरा करना संभव नहीं है। बर्तन यूनिट से जुड़े उद्यमियों का दर्द है कि एल्युमिनियम को पिघलाने के लिए एक साथ दस कामर्शियल सिलेंडर की जरूरत है। पहले से मौजूद कच्चे माल को प्रोसेस करने का काम चल रहा है। सीज फायर के बाद कामर्शियल सिलेंडर की उपलब्धता उद्योगों के लिए होनी चाहिए। एल्युमिनियम बर्तन के साथ नमकीन बनाने वाली यूनिटों के लिए कामर्शियल सिलेंडर की किल्लत है। सिलेंडर की उपलब्धता अब सुनिश्चित होनी चाहिए। दीपक कारीवाल, प्रांतीय अध्यक्ष, लघु उद्योग भारती

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