
उधारी मिली नहीं, मुकदमा लड़ने में खर्च कर दिए हजारों
संक्षेप: Gorakhpur News - - कपड़ा कारोबारी चेक बाउंस होने का मुकदमा कर बुरे फंसे - चेक बाउंस का
गोरखपुर, वरिष्ठ संवाददाता गीता प्रेस रोड स्थित दीवान दयाराम बाजार में थोक कपड़ा कारोबारी संजय कुमार ने सिद्धार्थनगर के व्यापारी को क्रेडिट पर कपड़ा दिया। कुछ नकद मिला लेकिन धीरे-धीरे उधारी की रकम 18 लाख रुपये पहुंच गई। लंबी उधारी होने के बाद व्यापारी ने कपड़ा लेना बंद कर दिया। ऊपर से देनदारी को लेकर भी आनाकानी शुरू कर दी। भागदौड़ के बाद भी रकम नहीं मिली तो थोक कारोबारी को 138 एनआईए एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराना पड़ा। दो साल बाद भी उधारी मिली नहीं ऊपर से मुकदमा लड़ने में हजारों रुपये खर्च हो गए। ऐसी उधारी देकर सिर्फ संजय ही नहीं फंसे हैं, उनके जैसे 40 से अधिक मामले सिर्फ कपड़े की थोक मंडी में हैं।

दरअसल, कपड़ा का कारोबार उधारी पर टिका है। आमतौर पर फुटकर कारोबारी कपड़ा बेचकर किस्तों में देनदारी चुकता कर देते हैं। लेकिन हर साल 20 से 25 मामले ऐसे होते हैं, जिनमें पुलिस तक शिकायत पहुंचती है। मामला पुलिस से भी नहीं सुलझता है तो व्यापारी को कोर्ट की शरण लेनी पड़ती है। थोक कारोबारी राजेश नेभानी भी कुशीनगर के एक व्यापारी के खिलाफ मुकदमा लड़ रहे हैं। राजेश बताते हैं कि आम तौर पर फुटकर कारोबारी चेक द्वारा भुगतान करते हैं। कई बार ऐसा होता है कि छह से दस दिन बाद की तिथि का चेक देकर व्यापारी कपड़ा लेकर चला जाता है। इसके बाद चेक बाउंस हो जाता है। उधारी लेने के लिए कोर्ट में चेक बाउंस का मुकदमा दर्ज कराने के सिवा कोई विकल्प नहीं बचता है। 4 करोड़ से अधिक की उधारी उधारी को लेकर थोक कारोबारियों ने सोशल मीडिया पर डिफाल्टर व्यापारियों के खिलाफ मुहिम के साथ ही प्रमुख बाजार में होर्डिंग आदि भी लगाई गई। लेकिन थोक कारोबारियों की माने तो 4 करोड़ से अधिक की धनराशि कस्बाई व्यापारियों के पास फंसे हुए हैं। व्यापारी अनूप कुमार का कहना है कि तीन लाख की उधारी को लेकर कोर्ट फीस और अधिवक्ता पर पिछले तीन साल में 25 हजार से अधिक खर्च हो चुके हैं। थोक कारोबारी राजेश नेभानी का कहना है कि थोक व्यापारी 5 फीसदी जीएसटी अदा कर कपड़ा लाता है। कपड़े के धंधे में उधारी पर ही काम होता रहा है। फिलहाल 40 से अधिक मुकदमे चेक बाउंस के चल रहे हैं। सरकार को ऐसे मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई का प्रावधान करना चाहिए।

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