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27 नवंबर, 2020|8:33|IST

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गोरखपुर: छह महीने में 200 गुनी हुई कोरोना जांच की क्षमता, दूसरी बीमारियों की जांच में बेहद कमी 

lab technician family now attacked with corona infection after superintendent in pilibhit

कोरोना वायरस ने पैथोलॉजी सेक्टर को जोर का झटका दिया है। इस संक्रमण काल में कोरोना वायरस की जांच बढ़ी हैं। लेकिन दूसरी अन्य सभी बीमारियों की जांचों का ग्राफ नीचे लुढ़क गया है। इसके कारण पैथोलॉजी सेक्टर में डॉक्टर व तकनीशियन हलकान है।

पूर्वी यूपी में इलाज का सबसे बड़ा केन्द्र महानगर है। यहां गोरखपुर व बस्ती मंडल के अलावा बिहार व नेपाल से मरीज यहां इलाज कराने आते हैं। जिले में एम्स, बीआरडी मेडिकल कालेज, जिला व महिला अस्पताल, 100 बेड टीबी अस्पताल, 24 सीएचसी, 18 पीएचसी के साथ ही 550 निजी अस्पताल व क्लीनिक पंजीकृत हैं। यहां ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को पैथोलॉजी जांच के लिए 235 सेंटर भी सीएमओ कार्यालय में पंजीकृत हैं। 

50 फीसदी गिर गई है जांचें
कोरोना ने पैथोलॉजी जांच को जोर का झटका दिया है। सामान्य दिनों में महानगर में 22 हजार मरीजों की पैथोलॉजी जांच होती थी। इनमें करीब पांच हजार मरीज दूसरे जिलों से इलाज कराने आते थे। करीब चार हजार मरीज ऐसे भी थे जो कि स्वयं खून व पेशाब की जांच कराने पैथोलॉजी पहुंचते थे। हर मरीज की कम से कम चार से पांच जांचें होती थी। कोरोना ने इस तस्वीर को बदल दिया। स्वयं जांच कराने वाले मरीज नहीं आ रहे हैं। दूसरे जिले से मरीजों के आने की संख्या भी बेहद सीमित हो गई है। ओपीडी में मरीजों का ग्राफ गिरा है। बीआरडी में आज भी ओपीडी नहीं चल रही है। ऐसे में पैथोलॉजी जांचों का ग्राफ 50 फीसदी तक गिरा है।

सीजन में मंदा है पैथोलॉजी कारोबार
पैथोलॉजिस्ट डॉ. अमित गोयल ने बताया कि मानसून के साथ ही वेक्टर बार्न डिजीज का सीजन शुरू हो जाता है। इसमें मच्छर जनित बीमारियां होती है। इसी में डेंगू, चिकनगुनिया, स्वाइन फ्लू के मरीज मिलते हैं। इस बार मानसून में तो एक भी जांच इन बीमारियों की नहीं आई। इसके साथ ही 20 फीसदी मरीज खुद से जांच कराने आते थे वह बंद हो गया है।

200 गुना बढ़ी कोरोना जांच की क्षमता 
पूर्वी यूपी में इलाज का सबसे बड़ा केन्द्र बीआरडी मेडिकल कॉलेज है। इसी केन्द्र में 29 मार्च को बस्ती निवासी हसनैन अली को गंभीर हालत में लाया गया। अगले दिन सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। युवक की मौत के बाद उसका सैम्पल जांच के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज में स्थित रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी) को भेजा जाता है। आरएमआरसी में उस समय 20 सैंपल जांचने की क्षमता थी। 31 मार्च को आरएमआरसी ने पॉजिटिव रिपोर्ट जारी की। अगले दिन उसका सैम्पल कन्फर्मेशन टेस्ट के लिए लखनऊ के केजीएमयू भेजा गया। जहां जांच में हसनैन अली के सैंपल में कोरोना वायरस संक्रमण की तस्दीक हुई। इसके बाद हड़कंप मच गया। पूर्वी यूपी के गोरखपुर व बस्ती मंडल के सात जिलों में संक्रमण का यह पहला मामला था। इस मामले के सामने आने के बाद ही अधिकारियों के कान खड़े हो गए। अधिकारियों ने बस्ती में संक्रमण को रोकने में ताकत झोंक दी। अधिकारियों ने माना कि संक्रमितों की पहचान के बाद नियंत्रण करने में आसानी रहेगी। इसको देखते हुए बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कोरोना जांच की क्षमता बढ़ाने की कवायद शुरू हुई।

माइक्रोबायोलॉजी में बनी दूसरी लैब
आरएमआरसी की क्षमता को बढ़ाने की कवायद में एक पखवारे में सफलता मिली। आरएमआरसी ने अप्रैल के अंतिम हफ्ते तक 100 सैम्पल रोजाना जांचने की क्षमता विकसित की। बस्ती में कोरोना संक्रमित मिलने के करीब दो महीने बाद गोरखपुर में कोरोना संक्रमण पहला मामला सामने आया। दिल्ली से लौटे मरीज में 26 अप्रैल को कोरोना वायरस की पुष्टि हुई। उसकी जांच आरएमआरसी में हुई। इसके बाद बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एक और जांच लैब विकसित करने का फैसला किया। बीआरडी के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में कोरोना संक्रमण की जांच के लिए लैब स्थापित किया गया। सात मई से इस लैब में जांच शुरू हुई। शुरू में इसकी क्षमता 34 सैम्पल जांचने की थी। आज इस लैब में करीब 1400 से अधिक सैम्पल की रोजाना जांच हो रही हैं।

बीआरडी में तैयार हुआ बीएसएल थ्री लैब
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में शासन ने कोरोना जांच के लिए संसाधन बढ़ाएं हैं। इसी के तहत मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग को इस साल बीएसएल-थ्री लैब की सौगात मिली। बायो सेफ्टी लैब लेवल-3(बीएसएल-थ्री) को सबसे आधुनिक लैब का दर्जा प्राप्त है। इसके निर्माण की लागत ढाई करोड़ रुपए है। कार्यदायी संस्था ने इसे तय समय में पूरा कर दिया। इस लैब में जांच के दौरान संक्रमण फैलने का खतरा बेहद कम रहता है। अब बीआरडी में इसी लैब में कोरोना की जांच की जाती है।

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  • Web Title:corona test capacity increased by 200 times in last six months