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गोरखपुर

कोरोना ने किया अनाथ, दोनों मासूम देखते हैं माता-पिता की राह

हिन्दुस्तान टीम,गोरखपुरPublished By: Newswrap
Mon, 31 May 2021 08:30 PM
कोरोना ने किया अनाथ, दोनों मासूम देखते हैं माता-पिता की राह

गुलरिहा के रहने वाले हैं दोनों मासूम, पड़ोसी कर रहे देखभाल

बड़े की उम्र है आठ साल, छोटा चार साल का, दादी भी नहीं रहीं

गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता

कोरोना ने सराय गुलरिहा में रहने वाले दो मासूमों को अनाथ कर दिया। मासूम के माता-पिता को तो निगला ही, एकमात्र सहारा बचीं दादी भी चल बसीं। अब दोनों मासूमों का ख्याल पड़ोसी कर रहे हैं।

गांव के प्रधान बताते हैं कि दोनों मासूमों ने अभी ठीक से लोगों जाना भी नहीं कि कोरोना ने उनसे सबकुछ छीन लिया। एक बेटा आठ साल का है तो एक चार साल का। आठ साल के बेटे को यह समझ है कि उसके माता-पिता और दादी अब लौटकर नहीं आएंगे। जबकि चार साल का मासूम रोज अपने माता-पिता के आने की राह देखता है। उसकी बातें सुन पड़ोसियों की आंखों में आंसू आ जाते हैं। प्रधान ने बताया कि छोटा बेटा रोज अपनी मां की राह देखता है। वह पड़ोसियों से पूछता है कि उसकी मां कहां चली गई और कब आएगी?

प्रधान के अनुसार दो महीने पहले पिता को कोरोना का संक्रमण हुआ था। इलाज के दौरान ही पिता की मौत हो गई। सबकुछ सामान्य होता कि तभी मासूम की मां भी कोरोना की चपेट में आ गई। काफी इलाज कराने के बाद भी मां नहीं बच सकी। बड़ा बेटा दोनों के जाने से अवसाद में चला गया। वह कुछ दिन किसी से बात ही नहीं करता था। दो दिन तक खाना भी नहीं खाया। जैसे-तैसे पड़ोसियों ने दुलार कर उसे खाना खिलाया। पड़ोसी ने बताया कि दोनों मासूमों को वह बेटे की तरह पालेंगे, कोई कसर नहीं छोड़ेंगे लेकिन सचाई यह है कि मां-पिता के जाने से उसे जो जख्म मिला है उसे हम ही नहीं कोई भी कुछ भी देकर भर नहीं सकता।

सरकार ऐसे बच्चों की जिम्मेदारी उठा रही है

केंद्र और प्रदेश सरकार ने कोरोना से अनाथ हुए बच्चों की परवरिश से लेकर पढ़ाई तक की योजना लागू की है। ऐसे बच्चों को सैनिक या नवोदय यानी आवासीय विद्यालय में पढ़ाने की योजना है। जिला प्रशासन को ऐसे बच्चों को ढूंढकर उनके परवरिश का इंतजाम करना है।

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