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गोरखपुरकोरोना ने जिंदगी भी छीन ली और 3.50 लाख का कर्जदार भी बना दिया

हिन्दुस्तान टीम,गोरखपुरPublished By: Newswrap
Tue, 01 Jun 2021 04:50 AM
कोरोना ने जिंदगी भी छीन ली और 3.50 लाख का कर्जदार भी बना दिया

गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता

कोरोना की दूसरी लहर ने न सिर्फ एक व्यक्ति की जिन्दगी निगल ली, बल्कि परिवार को उम्रभर का दर्द भी दे दिया है। पत्नी जी भर रो लेने का मौका तक नहीं पा सकी है। अस्पताल की भागदौड़ खत्म हुई तो अब पांच बच्चों की परवरिश के साथ साढ़े तीन लाख का कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी व चिंता ने घेर लिया है। अब उसे एक तरफ पति के जाने का गम है तो दूसरी तरफ बच्चों की जिन्दगी को पटरी पर लाने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा है।

चौरीचौरा क्षेत्र के बघाड़ गांव का 45 वर्षीय विनोद 5 मई को तेज बुखार की जद में आया। उसने चौराहे के मेडिकल स्टोर से दवा लेकर इलाज किया लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। दिक्कत बढ़ने पर परिजनों ने कस्बे के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। सांस लेने में दिक्कत बढ़ने पर स्वजनों ने 7 मई को उन्हें शहर के एक निजी हास्पिटल में भर्ती कराया। इस दौरान उसकी पत्नी ने साहूकार से 3.50 लाख कर्ज लेकर इलाज कराया। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी उसकी जान नहीं बच सकी। आखिरकार 15 मई को उसकी मौत हो गई। उसकी मौत ने परिवार के साथ ही गांव के लाग भी शोक में डूब गए। विनोद के जाने के बाद उसकी पत्नी किसमती देवी पर पांच बच्चों की परवरिश के साथ-साथ साहूकार का कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी भी आ गई है। अब चार कठ्ठा जमीन और एक भैंस के सहारे बच्चों की फीस व दो वक्त की रोटी का इंतजाम करें या फिर लाखो का कर्ज चुकाए? इस सवाल का किसमती देवी को कोई जवाब नहीं सूझ रहा है।

पति की मौत से दर्द से कराह रही किसमती

पति विनोद की कोरोना से मौत के बाद किसमती देवी की आंखों से आंसू नही रुक रहा है। किसमती की तीन पुत्री और दो पुत्र हैं। बीए में पढ़ने वाली सिर्फ बड़ी बेटी पूजा यादव बालिग है। रागिनी (15) नौंवी की छात्रा है। निकिता (14) आठवी की छात्रा, पुत्र अमन यादव (17) बीए का छात्र है। सबसे छोटा पुत्र अंकित यादव (12) भी पांचवीं का छात्र है। बच्चों की शिक्षा पूरी कराने की बड़ी चुनौती है।

विनोद की मौत पर कराह उठा गांव

बघाड़ गांव के विनोद की मौत ने गांव के सभी लोगों को झकझोर दिया। गांव के चेतई प्रसाद पटवा, अमरनाथ यादव, अमरनाथ चौरसिया, रमेश पासवान, ईश्वरचंद, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अजीत कुमार समेत तमाम लोगों का कहना है कि विनोद की मौत लोगों को हिला कर रख दिया। क्योंकि उनके परिवार की आर्थिक तंगी के बीच बच्चों की पढ़ाई व परिवार के सामने दो जून की रोटी का संकट आ गया है। लोगों का कहना है कि इस गरीब परिवार को सरकारी मदद, बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था जरूरी है। मदद नहीं मिली तो परिवार बिखर जाएगा।

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