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वोटकटवा ही बनकर रह गई कांग्रेस


वोटकटवा ही बनकर रह गई कांग्रेस

चुनाव के बीच प्रियंका गांधी ने यहां तक कहा था कि उनके उम्मीदवार या तो जीतने की स्थिति में है या फिर इतने वोट जरूर पाएंगे कि भाजपा को हरा देंगे। भाजपा कहीं नहीं हारी मगर कांग्रेस के उम्मीदवार वोटकटवा ही बनकर रह गए। गोरखपुर बस्ती मंडल की आठ सीटों पर कांग्रेस इस बार कुल करीब 5 फीसदी वोट मिले हैं। इनमें भी केवल कुशीनगर व संत कबीरनगर में कांग्रेस का वोट शेयर दस फीसदी से अधिक है। 2014 में यहां के सभी जिलों में कांग्रेस का वोट शेयर आठ फीसदी के आसपास था।

कांग्रेस की पूर्वांचल प्रभारी प्रियंका गांधी ने गोरखपुर और बांसगांव लोकसभा सीट को छोड़कर अन्य लोकसभा सीटों संतकबीर नगर, बस्ती, डुमरियागंज, देवरिया, सलेमपुर और महराजगंज में जनसभा की। कुशीनगर में यूपीए सरकार में मंत्री रहे कुंवर आरपीएन सिंह के पक्ष में जनसभा के साथ विशाल रोड शो भी किया था। उनकी सभाओं में भीड़ तो उमड़ी लेकिन वह इसे वोट में तब्दील नहीं हो सकीं। बांसगांव से कांग्रेस प्रत्याशी पर्चा खारिज होने के चलते पहले ही मैदान से बाहर हो गए थे। कुछ सीटों पर वोट प्रतिशत तो बढ़ा लेकिन उनका ऐसा कोई जादू नहीं दिखा जिससे 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस को लेकर किसी प्रकार की उम्मीद की जा सके। कुशीनगर व संत कबीरनगर सीट को छोड़कर शेष सीटों पर कांग्रेस सिर्फ वोटकटवा की ही भूमिका में रही।

कांग्रेस के टिकट पर भाग्य आजमा रहे बस्ती में पूर्व सांसद राजकिशोर सिंह और संतकबीर नगर में दो बार के सांसद भालचंद यादव अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप वोट हासिल करने में कामयाब नहीं हो सके। वहीं डुमरियागंज में डॉ. चन्द्रेश उपाध्याय, सलेमपुर में डॉ. राजेश मिश्रा व गोरखपुर में मधुसूदन त्रिपाठी वोटकटवा की भूमिका से बाहर नहीं निकल सके। श्ह तीनों 2014 में मिले वोट को भी पार करने में कामयाब नहीं हो सके। देवरिया में दलबदल कर कांग्रेस का टिकट हासिल करने वाले नियाज अहमद को भी कांग्रेस हाथ का कोई लाभ नहीं मिला। वाराणसी से पूर्व सांसद राजेश मिश्रा भी सलेमपुर में कोई करिश्मा करने में कामयाब नहीं हो सके। महराजगंज में सुप्रिया श्रीनेत को 2014 के मुकाबले कुछ अधिक वोट जरूर मिले वह गिनती भर को हैं।

आरपीएन के आधे वोट भी दूसरों के खाते में चले गए

गोरखपुर-बस्ती मंडल में कुशीनगर की सीट कांग्रेस के लिहाज से अहम मानी जा रही थी। यहां से पूर्व केन्द्रीय मंत्री कुंवर आपीएन सिंह चुनाव मैदान में थे, जिनकी वर्ष-2014 की हार को मोदी लहर से जोड़ा जा रहा था। 2014 में आरपीएन को 29.92 फीसदी वोट मिले थे। वह दूसरे स्थान पर थे। 2009 में वह यहां से करीब 31 फीसदी वोट पाकर चुनाव जीते थे। इस बार कांग्रेस को इस सीट को लेकर बड़ी उम्मीदें थीं। प्रियंका गांधी ने यहां उनके पक्ष में रोड शो व जनसभा की थी। उमड़ी भीड़ ने हौसला जरूर बढ़ाया मगर वह वोट में तब्दील नहीं हो सकी। यहां 2014 के मुकाबले आरपीएन को आधे ही वोट मिले हैं। इस बार उन्हें केवल 14 फीसदी ही वोट मिले हैं। वह तीसरे नंबर पर रहे।

महज दो ही ने किया एक लाख का आंकड़ा पार

गोरखपुर-बस्ती मंडल की नौ में से आठ सीटों पर दिग्गज नेताओं को लड़ाने वाली कांग्रेस को एक लाख वोट के भी लाले पड़ गए। महज दो ही प्रत्याशी एक लाख का आंकड़ा छू सके। कुशीनगर से आरपीएन सिंह को करीब 1.45 लाख व संत कबीरनगर से भालचंद्र यादव को 1.27 लाख वोट मिले हैं। शेष सभी उम्मीदवार हजार में ही वोट हासिल कर पाए हैं।

चुनाव में कांग्रेस को मिले वोट

संत कबीरनगर भालचंद्र यादव 127891

कुशीनगर आरपीएन सिंह- 145122

देवरिया नियाज अहमद खां 50348

महराजगंज सुप्रिय श्रीनेत 68953

डुमरियागंज डॉ. चंद्रेश उपाध्याय 69538

सलेमपुर डॉ. राजेश मिश्र 26970

बस्ती राजकिशोर सिंह 85009

गोरखपुर मधुसूदन त्रिपाठी 22972

खिसक रहा कांग्रेस का जानाधार

लोकसभा 2014 2019

कुशीनगर 29.9 फीसदी 14 फीसदी

गोरखपुर 4.3 1.9

सलेमपुर 2.6 4.8

देवरिया 4.6 3.88

महराजगंज 5.3 5.5

डुमरियागंज 9.4 5.4

संत कबीरनगर 2.1 11

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  • Web Title:Congress played only Votekatwa Role in this Election in Gorakhpur area