गीडा में चार एमएलडी सीईटीपी परियोजना पर होगा मंथन
गोरखपुर के औद्योगिक क्षेत्र गीडा से निकलने वाले अपशिष्ट जल के कारण आमी नदी में प्रदूषण को कम करने हेतु 17 जून को बैठक होगी। जिलाधिकारी दीपक मीणा की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में सीईटीपी के संचालन और औद्योगिक इकाइयों की सहभागिता पर चर्चा होगी। सीईटीपी की स्थापना से प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी।

गोरखपुर। प्रमुख संवाददाता। गोरखपुर के औद्योगिक क्षेत्र गीडा से निकलने वाले अपशिष्ट जल के कारण वर्षों से प्रदूषण की मार झेल रही आमी नदी को राहत दिलाने की दिशा में पहल तेज हो गई है। औद्योगिक विकास प्राधिकरण में प्रस्तावित 4.0 एमएलडी क्षमता के कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के क्रियान्वयन, संचालन और अनुरक्षण को लेकर गठित विशेष समिति (स्पेशल पर्पज व्हीकल) की बैठक 17 जून को चार बजे गीडा सभागार में होगी। इनमें केंद्र व प्रदेश की विभिन्न एजेंसियों के प्रतिनिधि और औद्योगिक इकाइयों के संचालक शामिल होंगे।
बैठक की अध्यक्षता
बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी दीपक मीणा करेंगे। इसमें राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी), राज्य स्वच्छ गंगा मिशन, नगर निगम, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जल निगम, जिला उद्योग केंद्र और गीडा के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। अधिकारियों के अनुसार बैठक में सीईटीपी के संचालन मॉडल, वित्तीय व्यवस्था, उद्योगों की भागीदारी और अपशिष्ट जल शोधन से जुड़े विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा होगी।
55 औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधि शामिल होंगे
अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी गीडा राम प्रकाश के मुताबिक गीडा प्रशासन ने जल प्रदूषण से संबंधित 55 औद्योगिक इकाइयों के निदेशकों और प्रोपराइटरों को व्यक्तिगत रूप से बैठक में उपस्थित रहने के लिए आमंत्रित किया है। साथ ही चैम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज और लघु उद्योग भारती से भी अधिकतम औद्योगिक सहभागिता सुनिश्चित होगी।
इसलिए जरूरी है, सीईटीपी की स्थापना
सीईटीपी की स्थापना के बाद गीडा क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट जल का एकीकृत और वैज्ञानिक उपचार संभव हो सकेगा। इससे बिना उपचारित औद्योगिक अपशिष्ट के जल स्रोतों में जाने पर रोक लगेगी।आमी नदी सहित क्षेत्र की अन्य जलधाराओं में प्रदूषण का स्तर कम करने में मदद मिलेगी।
सेक्टर सात में स्थापित होना है चार एमएलडी क्षमता का सीईटीपी
सीईटीपी परियोजना गीडा के सेक्टर-7 में स्थापित होगा। यह प्रतिदिन चार मिलियन लीटर पानी को उपचारित करेगा। प्लांट में उद्योगों से निकलने वाले रासायनिक तत्वों और अन्य प्रदूषक पदार्थों को वैज्ञानिक तरीके से अलग कर पानी को दोबारा उपयोग योग्य बनाया जाएगा। इससे लंबे समय से उद्योगों के दूषित पानी से भूजल और आसपास के क्षेत्रों पर पड़ रहे असर को रोकने में मदद मिलेगी।
पर्यावरण से जुड़ी संस्थाएं निरंतर जताती रही चिंता
आमी नदी में औद्योगिक और अन्य स्रोतों से होने वाले प्रदूषण को लेकर आमी बचाओं आंदोलन, हेरिटेज फाउंडेशन समेत अन्य संस्थाओं द्वारा चिंता जताई जाती रही है। ऐसे में सीईटीपी परियोजना को नदी संरक्षण और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप औद्योगिक विकास सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासन को उम्मीद है कि परियोजना के धरातल पर आने से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के मुताबिक आमी नदी के पुनर्जीवन अभियान को भी मजबूती मिलेगी।
-आमी संरक्षण
-17 जून को गीडा में 55 प्रदूषणकारी इकाइयों संग होगी बैठक
-जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित एसपीवी निदेशक शामिल होंगे
-आमी नदी को गीडा के उद्योगों के प्रदूषण से बचाने की खुलेगी राह
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