CM Yogi Adityanath Speaks in Punyatithi Seminar in Gorakhnath Temple - लोक मंगल और लोक कल्याण गोरक्षपीठ का वैचारिक अधिष्ठान: योगी DA Image

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लोक मंगल और लोक कल्याण गोरक्षपीठ का वैचारिक अधिष्ठान: योगी

लोक मंगल और लोक कल्याण गोरक्षपीठ का वैचारिक अधिष्ठान: योगी

मुख्यमंत्री गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र लोक - मंगल एंव लोक-कल्याण भगवान शिवावतारी महायोगी गोरक्षनाथ की तपस्थली श्रीगोरक्षपीठ का भी वैचारिक अधिष्ठान है। मुख्यमंत्री रविवार को श्रीगोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 49वीं एवं राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ की चतुर्थ पुण्यतिथि के अवसर प्रारम्भ विविध समसामयिक विषयों पर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

‘लोक-कल्याण भारतीय संस्कृति की विशेषता है विषय योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गोरक्षपीठाधीश्वर महन्त दिग्विजयनाथ एवं महन्त अवेद्यनाथ का पूरा जीवन लोक-कल्याण एवं लोक मंगल को ही समर्पित था। यदि भारतीय संस्कृति का हम निचोड़ देखे तो वह परोपकार है। परोपकार लोक-कल्याण का ही पर्याय है। भारतीय जीवन मूल्य में स्वयं के स्वार्थ को जगह नहीं है, वही जीवन श्रेष्ठ है जो दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित हो। भारतीय संस्कृति की इसी लोक कल्याणकारी भावना से धर्म की वह शास्वत व्यवस्था प्रतिष्ठित हुई जो परोपकार का मार्ग दिखाता है। जो सदाचार की राह का अनुगामी बनाता है। जो कर्तव्यों का भान कराता है और नैतिक मूल्यों के प्रति आग्रही बनाता है। भारत ने इसी धर्म की व्यापक अवधारणा को स्वीकारा है।

संगोष्ठी में रामकोट अयोध्या से आए जगद्गुरू राघवाचार्य ने कहा कि दोनों ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर को वास्तविक श्रद्धांजलि यही है कि जिन जीवन मूल्यों के लिए अपना जीवन समर्पित किया उसे पूरा करने में अपनी सम्पूर्ण क्रियाशक्ति लगा दें। सुग्रीवकिला अयोध्या से आए स्वामी विश्वेश प्रपन्नाचार्य ने कहा कि धर्म, अध्यात्म, देश, समाज और राजनीति के क्षेत्र में इस पीठ के आचार्यों ने सदैव अपनी सक्रिय भूमिका निभायी है। अतिथियों का स्वागत एवं प्रस्ताविकी पूर्व कुलपति प्रो. उदय प्रताप सिंह ने किया। मंच संचालन डॉक्टर श्रीभगवान सिंह ने किया। गोरक्षाष्टक पाठ अवनीश पाण्डेय, प्रियांशु चैबे, दिग्विजयस्रोत पाठ शिवांश मिश्र, महन्त अवेद्यनाथ स्रोत पाठ प्रांगेश मिश्र ने प्रस्तुत किया।

धर्म ने कभी उपासना को बंधन नहीं बनाया

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारे धर्म में कहीं नहीं कहा गया कि हम किसकी पूजा करें, किसकी न करें। यह कभी नहीं कहा गया कि हिन्दू का अर्थ मन्दिर में जाए, टिका लगाए। भारतीय संस्कृति के अन्तर्गत भारतीय धर्म ने कभी उपासना को बंधन नहीं बनाया। इसीलिए हमारी संस्कृति ने उद्घोष किया उदार चरितानाम ‘वसुधैवकुटुम्बकम। इस मंत्र ने भी लोक-कल्याण का वैश्विक मार्ग प्रशस्त किया। भारत के ऋषि परम्परा ने लोक-कल्याण एवं लोक मंगल के लिए ही भारत की ऋषि परम्परा सदैव समर्पित रही। आज भी सरकार से अधिक धर्म स्थानो एवं धर्मार्थ संस्थानों द्वारा सेवा के परकल्प चलाए जा रहें हैं।

अज्ञान, अन्याय और अभाव से पीठ का संघर्ष सम्पूर्ण मानवता का संघर्ष: डा. सत्यपाल सिंह

सम्मेलन के मुख्य वक्ता भारत सरकार के मानव संसाधन के विकास राज्य मंत्री डा. सत्यपाल सिंह ने कहा कि गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वरों ने सदैव लोक-कल्याण और लोक मंगल के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया। गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर महन्त योगी आदित्यनाथ देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की जनता की सुख सुविधाओं के लिए दिन-रात एक कर पीठ के लोक-कल्याण के पथ पर अग्रसर हैं। उन्होंने कहा कि वास्तव में मनुष्य के तीन शत्रु है अज्ञान, अन्याय और अभाव। बिना इनके समाधान के लोक-कल्याण का मार्ग प्रशस्त नहीं हो सकता। वास्तव में लोक-कल्याण का अर्थ इन्हीं तीन मानव शत्रुओं के विरूद्ध संघर्ष है। पीठ के शैक्षणिक संस्थानों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पीठ की लोक-कल्याणकारी अज्ञान से संघर्ष का देश प्रसंशक है। वास्तव में यह युद्ध सम्पूर्ण मानव जाती का युद्ध है। भारत के ऋषि परम्परा सदैव मानव कल्याण हेतु अज्ञान, अन्याय और अभाव के विरूद्ध लड़ती रही है।

भारतीय संस्कृति ऋषियों की तपस्या का प्रतिफल: मुकेश खाण्डेकर

विशिष्ठ अतिथि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत प्रचारक मुकेश खाण्डेकर ने कहा कि भारतीय संस्कृति ऋषियों की तपस्या का प्रतिफल है। भारतीय संस्कृति सर्व समावेशी है, समरसता की प्रतीक है। इस संस्कृति में ही यह घोषित किया की परोपकार ही पुण्य है। दूसरों को पीड़ा देना ही पाप है।

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