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इंसेफेलाइटिस के शिकार बच्चों संग लापरवाही की इंतहा

पूर्वांचल में हर वर्ष इंसेफेलाइटिस के कारण हजारों मासूम दिव्यांग हो रहे हैं। दिव्यांगता से पीड़ित मासूम का दर्द अधिकारियों की लापरवाही से और बढ़ गया है। चार साल पहले दिव्यांगों के इलाज व पुनर्वास के लिए शासन ने बीआरडी में फिजिकल मेडिकल रिहैबिलिटेशन (पीएमआर) सेंटर बनाने का फैसला लिया । इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन(एनएचएम) के जरिए तीन साल पहले पांच करोड़ रुपए भी दे दिए गए। आज तक इस रकम में से एक पाई खर्च नहीं हो सकी है। 

पूर्वांचल के 28 जिलों के अलावा पड़ोसी देश नेपाल और बिहार के सीमावर्ती जिलों में इंसेफेलाइटिस का प्रकोप है। 1974 से यह बीमारी मासूमों को अपना शिकार बना रही है। इस बीमारी के इलाज का सबसे बड़ा केन्द्र है बीआरडी मेडिकल कालेज। हर वर्ष औसतन दो हजार मासूम इस बीमारी के कारण भर्ती होते हैं। बीआरडी के आंकड़ों के मुताबिक इस बीमारी के शिकार 20 फीसदी मासूमों की मौत हो जाती है। जो बच जाते हैं उनमें से आधे दिव्यांग हो जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक अब तक इंसेफेलाइटिस से 35 हजार मासूम दिव्यांग हो चुके हैं। 

दिव्यांगों के इलाज के लिए संचलित होना है पीएमआर
इंसेफेलाइटिस के कारण हो रहे दिव्यांगों के पुर्नवास में सबसे बड़ी अड़चन उनके शारीरिक रूप से असक्षम होने से आ रही थी। ऐसे में केन्द्र सरकार ने वर्ष 2014 में मेडिकल कालेज में शारीरिक चिकित्सा एवं पुनर्वास (पीएमआर) सेंटर खोलने को मंजूरी दी। जनवरी 2015 में शासन ने पांच करोड़ रुपए एक मुश्त बीआरडी के खाते में जमा कर दिए। पीएमआर हड्डी रोग विभाग से संबद्ध होगा। इसके प्रस्ताव में दिव्यांगों के लिए अलग ओपीडी का संचालन होना है। इसके साथ ही फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी, आकुपेशनल थेरेपी व सर्जरी के जरिए इलाज किया जाना है।  

प्रस्ताव के खेल में गुजार दिए तीन साल
इस रकम से सेंटर शुरू करने के बजाए कालेज के आला हुक्मरान केन्द्र सरकार को अनाप-शनाप प्रस्ताव भेजने लगे। इस खेल में ही अधिकारियों ने तीन साल का समय गुजार दिया। आलम यह रहा कि इस फंड से अब तक एक पाई नहीं खर्च हो सकी है। 

एनएचएम के अधिकारियों ने जताई आपत्ति
एनएचएम के डीपीएम पंकज आनंद ने बताया कि यह रकम आज भी बीआरडी के खाते में पड़ी है। हर साल कालेज के अधिकारी उपयोग का आश्वासन देकर रकम को रोक लेते हैं। एक हफ्ते पहले भी इस मसले को लेकर बीआरडी में बैठक हुई। बैठक में रकम खर्च न कर पाने पर आपत्ति जताई गई। एक बार उन्होंने आश्वासन दिया है।

बीआरडी में पीएमआर सेंटर शुरू करने के लिए कई चक्र में वार्ता हुई। आगामी दो फरवरी को प्रमुख सचिव की मीटिंग में भी इस पर चर्चा होगी। उम्मीद है कि इस साल कुछ सार्थक पहल होगी।
डॉ. रवीन्द्र कुमार, सीएमओ

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  • Web Title:Carelessness in Encephalitis in Gorakhpur