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चुनावी मुद्दा: गली-गली में कूड़ाघर, सांस लेना दूभर

रामगढ़ झील गोरखपुर और बस्ती मंडल में पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित हो रही है। सुबह से लेकर शाम तक लोग झील की खूबसूरती का दीदार करने के लिए यहां जुटते हैं लेकिन झील से चंद मीटर की दूरी पर ही लगा कूड़े का ढेर और उससे उठ रही दुर्गंध सफाई को लेकर जिम्मेदारों की संजीदगी की पोल खोल देता है। यह हाल न तो केवल रामगढ़ झील का है और न ही केवल गोरखपुर शहर का। गोरखपुर-बस्ती मंडल के सात जिलों में रोज करीब 1600 टन कूड़ा निकलता है। रोजाना 4.5 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी जिम्मेदार इस कूड़े का निस्तारण नहीं कर पा रहे। किसी भी जिले में न तो सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का अत्याधुनिक प्लांट है और न ही कूड़ा फेंकने के लिए स्थायी डंपिंग ग्राउंड।

गोरखपुर-बस्ती मंडल के सातों जिलों में कूड़ा निस्तारण का बुरा हाल है। करोड़ों रुपये खर्च और भारी-भरकम सफाई कर्मचारियों की फौज के बावजूद जिधर देखिए उधर कूड़ा ही कूड़ा नजर आता है। पिछले पांच वर्षों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत करोड़ों रुपये के डस्टबिन से लेकर कम्पैक्टर की खरीद हुई लेकिन कूड़ा निस्तारण के लिए न तो सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के प्लांट को लेकर संजीदगी दिखी और न ही कूड़ा गिराने के लिए डंपिग ग्राउंड खोजा गया। विवादों और शिकायतों के बावजूद खाली प्लॉटों को कूड़ेदान बना दिया गया है। 

गोरखपुर नगर निगम सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को हकीकत की धरातल पर लाने की कवायद पिछले 20 वर्षों से कर रहा है। 2009 में हैदराबाद की एपीआर कंपनी को महेसरा में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट लगाने का जिम्मा दिया गया लेकिन घोटाले के आरोपों के बाद कंपनी पर मुकदमा हो गया। शासन ने नये सिरे से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने के लिए टेंडर निकाला है लेकिन अभी तक किसी फर्म ने टेंडर को लेकर रुचि नहीं दिखाई है। अभी यह भी तय नहीं है कि प्लांट महेसरा में ही लगेगा या नई जमीन की जरूरत होगी। जमीन खरीदने से लेकर अब तक इस मद में करीब 19.5 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। 2015 में नगर निगम ने मुस्कान ज्योति संस्था को डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की जिम्मेदारी दी। इसके लिए बाकायदा 15 लाख रुपये भुगतान भी किया। गोलमाल के आरोपों के बीच संस्था भाग गई। 

1600 टन कूड़ा रोज निकलता है गोरखपुर बस्ती मंडल के सातों जिलों में
4 करोड़ 50 लाख रुपये सफाई पर खर्च हो रहे हैं रोजाना इन जिलों में
20 साल से चल रही है गोरखपुर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने की कवायद

डोर-टू-डोर कलेक्शन पर सिर्फ प्रयोग
पिछले तीन वर्षों से केन्द्र सरकार द्वारा कराए जा रहे स्वच्छ सर्वेक्षण में गोरखपुर नगर निगम सिर्फ सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन नहीं होने से फिसड्डी साबित हो रहा है। अफसरों ने पांच सालों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन को लेकर कई प्रयोग किए। पिछले दिनों सफाई और डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए मुंबई और मुरादाबाद की एजेंसियों को जिम्मेदारी दी गई थी। एजेंसियों ने दो लाख की सुरक्षा राशि जमा की थी। निगम ने इन्हें 5 करोड़ से अधिक का भुगतान कर दिया। निगम ने दोनों एजेंसियों को ब्लैक लिस्ट किया तो वह हाईकोर्ट चली गईं। करोड़ों के बंदरबांट के बीच अभी 25 वार्डों में भी कूड़ा कलेक्शन शुरू नहीं हो सका है।

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए दो बार टेंडर निकाला गया लेकिन किसी ने रुचि नहीं ली। प्रयास होगा कि जल्द टेंडर कराकर कूड़े का उचित निस्तारण हो और बिजली का उत्पादन हो सके। शहर के आधे हिस्से में नियमित रूप से डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन कराया जा रहा है। शहर में सूखे और गीले कूड़े के लिए डस्टबिन रखा गया है।  -अंजनी कुमार सिंह, नगर आयुक्त, गोरखपुर

रोज निकलता है कूड़ा
गोरखपुर    600 टन
कुशीनगर    250 टन
महराजगंज    40 टन
सिद्धार्थनगर    50 टन
बस्ती    65 टन
संतकबीरनगर    350 टन
देवरिया    250 टन

प्रति माह सफाई पर खर्च 
गोरखपुर    40 करोड़
कुशीनगर    20 करोड़
महराजगंज    14 करोड़
सिद्धार्थनगर    18 करोड़
बस्ती    12 करोड़
संतकबीरनगर    12 करोड़
देवरिया    20 करोड़

बस्ती : नगर पंचायतों के पास नहीं डंपिंग ग्राउंड
बस्ती जिले में एक नगर पालिका और चार नगर पंचायतें हैं। नगर पालिका बस्ती में 14 अप्रैल से गोटवा बाजार के पास कोइलपुरा में कूड़ा डंपिंग ग्राउंड के लिए लगभग तीन हेक्टेयर भूमि का चिह्नांकन कर कूड़ा डंप किया जा रहा है। अन्य नगर पंचायतों में कूड़ा डंप करने के लिए कोई जगह निर्धारित नहीं है। बस्ती नगर पालिका के सफाई निरीक्ष सोम कुमार ने बताया कि कूड़ा प्रबंधन दुरुस्त हो गया है। पहले उधार की जमीन पर डंप करना पड़ता था।

देवरिया : कान्हा हाउस के पास बना दिया डंपिंग ग्राउंड
देवरिया जिले में दो नगरपालिकाएं और नौ नगर पंचायतें हैं। कहीं डंपिंग ग्राउंड नहीं है। बरहज में रोज 9 टन कूड़ा निकलता है। इसके निस्तारण की कोई  व्यवस्था नहीं है। रामजानकी मार्ग स्थित रगरगंज बाईपास के समीप कान्हा हाउस के पास कूड़ा डंप किया जा रहा है। लार में भी कूड़ा निस्तारण का इंतजाम नहीं है। देवरिया नगर पालिका के अध्यक्ष अलका सिंह ने बताया कि कूड़े के निस्तारण के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। 

सिद्धार्थनगर : महीनों से तलाश रहे जमीन
सिद्धार्थनगर जिले में दो नगर पालिका और चार नगर पंचायतें हैं। एक भी जगह डंपिंग ग्राउंड नहीं है। नगर पालिका में 22 टन कूड़ा प्रतिदिन निकलता है। उसे जमुआर नदी के किनारे सड़क के बगल में फेंका जाता है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी शैलेंद्र कुमार गुप्त ने बताया कि कूड़ा निस्तारण के लिए डंपिंग ग्राउंड की बात प्रशासन स्तर पर चल रही है। एक-दो स्थानों पर जमीन देखी गई है। चुनाव के बाद निर्णय हो जाएगा। 

कुशीनगर : खाली जमीन में गिरा रहे हैं कूड़ा
कुशीनगर की तीन नगरपालिका और पांच नगर पंचायतों में से एक में भी डंपिंग ग्राउंड नहीं है। जैसे-तैसे कूड़े का निस्तारण किया जा रहा है। पडरौना नगर पालिका के ईओ एएन सिंह ने बताया कि जमीन न मिलने के कारण खाली जमीन पर ही कूड़ा गिराया जाता है। पडरौना के 25 वार्डों में डस्टबिन की व्यवस्था कराई जा रही है। गीला व सूखा डस्टबिन प्रत्येक मोहल्ले में लगाकर लोगों को कूड़ापात्र में ही कूड़ा कचरा फेंकने की अपील की जाएगी। 

महराजगंज : जमीन चिह्नित करने का दावा
महराजगंज में दो नगर पालिका और पांच नगर पंचायतें हैं। किसी भी नगर पालिका और नगर पंचायत में कूड़ा निस्तारण के लिए कोई ग्राउंड नहीं है। अधिकारी जहां खाली प्लॉट देखते हैं वहीं कूड़े का निस्तारण कर देते हैं। नगर पालिका के अध्यक्ष कृष्ण गोपाल जायसवाल का कहना है कि डंपिंग ग्राउंड के लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है। जल्द ही चिह्नित जमीन पर कूड़ा निस्तारित किया जाएगा।

संतकबीरनगर : डंपिंग ग्राउंड को तलाशेंगे जमीन
संतकबीरनगर जिले में एक नगर पालिका और तीन नगर पंचायतें हैं। नगर पालिका की ईओ वीना सिंह ने बताया कि कूड़ा निस्तारण अभी मैनुअल हो रहा है। प्लास्टिक व अन्य रिसाइकिलिंग वाले तत्वों को अलग किया जा रहा है और गीले कूड़े से वर्मी कंपोस्ट की खाद तैयार की जा रही है। शहरी इलाकों में कूड़ेदान रखे गए हैं। स्थाई डम्पिंग ग्राउंड के लिए जमीन देखकर व्यवस्था की जाएगी।  

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  • Web Title:Breathing problem in Gorakhpur due to poor waste management