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गोरखपुर

बीआरडी का पीकू मॉडल पूरे प्रदेश में होगा लागू

हिन्दुस्तान टीम,गोरखपुरPublished By: Newswrap
Tue, 25 May 2021 04:11 AM
बीआरडी का पीकू मॉडल पूरे प्रदेश में होगा लागू

गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता

कोरोना की तीसरी लहर बच्चों को प्रभावित कर सकती है। इस आशंका को देखते हुए सूबे के सभी मेडिकल कालेजों में पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीकू) यानी पीआईसीयू तैयार किए जा रहे हैं। सूबे के चिकित्सा संस्थानों में पीआईसीयू बीआरडी मेडिकल कालेज के तर्ज पर तैयार किए जाएंगे। शासन ने बीआरडी के पीआईसीयू मॉडल करार दिया है।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज का पीआईसीयू (पीडियाट्रिक आईसीयू) और एनआईसीयू (नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट) वार्ड का मॉडल पूरे प्रदेश के सभी मे‌डिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में लागू होगा। कोरोना की तीसरी लहर से पहले राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की टीम ने कॉलेज के पीआईसीयू और एनआईसीयू वार्ड का अध्ययन करते हुए इसे प्रदेश का सबसे उत्तम और आधुनिक बताया है। शासन की पहल पर राम मनोहर लोहिया से पांच सदस्यीय टीम वार्ड का ‌अध्ययन करने सोमवार को बीआरडी पहुंची ‌थीं।

टीम में लो‌हिया संस्थान की निदेशक डॉ सोनिया नित्यानंद, एनेस्थीसिया के विभागाध्यक्ष डॉ दीपक मालविया, बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ दीप्ती अग्रवाल, बाल रोग के सह आचार्य डॉ केके यादव, बाल रोग सर्जन व कोविड अस्पताल के अधीक्षक डॉ श्रीकेष सिंह शामिल थे। टीम ने पीआईसीयू और एनआईसीयू वार्ड की पूरी व्यवस्था देखते हुए डॉक्टरों की जानकारी ली। टीम ने वार्डों को देखकर संतुष्टि जताते हुए इसे प्रदेश का सबसे शानदार वार्ड भी बताया। इस पर बीआरडी मे‌डिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ गणेश कुमार ने बताया कि शासन स्तर से राम मनोहर लोहिया की टीम कॉलेज के पीआईसीयू और एनआईसीयू वार्ड देखने आई थी। पूरे प्रदेश में सबसे शानदार एनआईसीयू और पीआईसीयू बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हैं। टीम ने सभी वार्डों को देखकर उसका अध्ययन किया है।

इसी तरह के पीआईसीयू और एनआईसीयू वार्ड कोरोना के तीसरी लहर से पहले प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में बनाई जाएगी। साथ ही प्रदेश के सभी जिलों में भी यही व्यवस्था लागू होगी। बताया कि मेडिकल कॉलेज में बाल रोग विशेषज्ञों की कोई कमी नहीं है। समृद्ध बाल रोग विशेषज्ञ कॉलेज में हैं। इस दौरान डॉ महिम मित्तल, डॉ पवन प्रधान, बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अनीता मेहता आदि मौजूद रहे।

बीआरडी में 450 बेड का बाल रोग विभाग

डॉ गणेश कुमार ने बताया कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 450 बेड का बाल रोग संस्थान है। इसमें 110 बेड वेंटिलेटर के पीडियाट्रिक आईसीयू में है। 120 बेड का एनआईसीयू है। इसके अलावा 44 बेड एचडीयू (हाई डिपेंडिसी यूनिट) के हैं। अन्य सामान्य बेड हैं। जबकि एनआईसीयू और पीआईसीयू के लिए डॉक्टरों की अलग-अलग टीम है। इन वार्डों में विशेषज्ञ डॉक्टर बच्चों का इलाज करते हैं। कॉलेज में 30 बाल रोग विशेषज्ञों की तैनाती है। इनमें डॉक्टरों की अलग-अलग विशेषज्ञों की टीम है। पीडियाट्रिक के सर्जन भी बीआरडी में मौजूद है। ऐसे में तीसरी लहर में बच्चों को कोई भी परेशानी नहीं होने नहीं पाएगी।

योगी के सीएम बनने के बाद बदली सूरत

सूबे की कमान संभालने के बाद योगी आदित्यनाथ ने इंसेफेलाइटिस से जूझ रहे बीआरडी मेडिकल कालेज पर नजरें इनायत की। वर्ष 1972 में कालेज की स्थापना के बाद पहली बार शासन कालेज के संसाधनों को बढ़ाने को लेकर खासा संजीदा दिखा। बीते तीन सालों में बीआरडी के पीआईसीयू और एनआईसीयू को देश के आधुनिक वार्ड में तब्दील किया जा चुका है। इलाज के संसाधन बढ़ाए गए। संक्रमण को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए गए। जिसके कारण बालरोग विभाग में मृत्युदर बेहद कम हो गई। पूर्वांचल में हर साल इंसेफेलाइटिस से मासूम बच्चों की जान जाती थी। लेकिन योगी सरकार बनने के बाद बीआरडी में इंसेफेलाइटिस को देखते हुए बाल रोग विभाग को बेहद समृद्ध कर दिया गया। इसके बाद पर मौतों पर काबू पाया गया। अब यही इंसेफेलाइटिस वार्ड पूरे प्रदेश के ल‌िए नजीर बन गया है।

बोले बीआरडी प्राचार्य

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पीआईसीयू और एनआईसीयू वार्ड को देखने राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की टीम आई थी। कॉलेज का पीआईसीयू और एनआईसीयू वार्ड पूरे प्रदेश में सबसे बेहतरीन है। तीसरी लहर को देखते हुए इसी तर्ज पर प्रदेश के अन्य मे‌डिकल कॉलेज और जिला अस्पतालों में वार्ड बनाए जाएंगे। यह वार्ड प्रदेश के लिए नजीर बना है।

- डॉ गणेश कुमार, प्राचार्य, बीआरडी मेडिकल कॉलेज

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