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गोरखपुर, निज संवाददाता।
बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता और रंगकर्मी पीयूष मिश्रा ने कहा कि उनकी जिंदगी में रंगमंच और फिल्म दोनों का महत्वपूर्ण स्थान है। फिल्म में काम करने के साथ आसानी से रंगमंच के लिए भी समय निकाल लेते हैं। प्रतिदिन तीन घंटे ध्यान करते हैं।
अभियान थिएटर द्वारा आयोजित किए गए पांच दिवसीय रंग महोत्सव में शामिल होने गोरखपुर आए पीयूष मिश्रा शुक्रवार को पत्रकारों से मुखातिब थे। उन्होंने कहा कि रंगमंच में आने से पहले लोगों को परिवार में ही संघर्ष करना पड़ता है। उनको भी परिवार में विरोध झेलना पड़ा। माता-पिता से खूब डांट पड़ी लेकिन रंगमंच से लगाव नहीं छूटा। बचपन से ही कविता लिखने लगे थे। पहली कविता उन्होंने कक्षा 8 में पढ़ाई के दौरान लिखी थी।
कार्ल मार्क्स व लेनिन से थे प्रभावित
पीयूष ने कहा कि, जिंदगी के सबसे महत्वपूर्ण करीब 20 वर्षों तक कार्ल मार्क्स और लेनन के विचारों से प्रभावित रहा। कम्युनिस्ट बनकर इंकलाब करता रहा। इससे दुनिया तो नहीं बदली पर परिवार बर्बादी के कगार पर जरूर पहुंच गया। जो भी कमाता दिल्ली में इंकलाब में खर्च कर देता। लंबे समय बाद मालूम चला कि हमारे कहने से कुछ बदलने वाला नहीं है। समाज में परिवर्तन अपने आप आता है। कंप्यूटर और इंटरनेट ने समाज में बदलाव ला दिया।
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