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13 वां आम चुनाव: सरकार गिरने की सहानुभूति में भाजपा को मिलीं छह सीटें

देश का 13 वां आम चुनाव एक वोट से अटल बिहारी वाजपेयी की 13 महीने पुरानी सरकार गिरने के बाद हुआ था। इसके पहले 1996 में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी भाजपा 13 दिन ही सत्ता में रह पाई थी। तबसे यह दूसरा मध्यावधि चुनाव था जिसमें तमाम मुद्दों के साथ भाजपा के पक्ष में सरकार गिरने की सहानुभूति भी थी। ऐसे में गोरखपुर-बस्ती मंडल ने नौ में से छह सीटें उसे दीं। 

योगी आदित्यनाथ ने दूसरी बार हासिल की जीत 
इस चुनाव के बाद केंद्र में पहली बार ऐसी गैर कांग्रेसी सरकार बनी जो पांच साल चली 
अटल बिहारी वाजपेयी की 13 महीने की सरकार गिरने पर हुआ था चुनाव 
बांसगांव, देवरिया, पड़रौना, डुमरियागंज और बस्ती की सीट भी भाजपा ने जीती 
सलेमपुर में बसपा के बब्बन, महराजगंज में सपा के अखिलेश और खलीलाबाद में भालचंद ने मारी बाजी

इस चुनाव में योगी आदित्यनाथ ने दूसरी बार जीत हासिल की। सपा के जमुना प्रसाद उनसे दूसरी बार हारे। योगी को 267382 मत मिले तो जमुना को 260043 मत। समाजवादी मोहन सिंह की देवरिया की सीट इस बार वापस भाजपा के कब्जे में आ गई। 1998 के चुनाव में यह सीट गंवाने वाले श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने 1999 में दोबारा हासिल कर ली। सलेमपुर की सीट 1998 में समता पार्टी के हरिकेवल प्रसाद ने जीती थी। 1999 में वह जद यू से मैदान में आए लेकिन तीसरे नंबर पर रहे। बसपा के बब्बन राजभर ने सीट जीत ली। सपा के कुंवर अखिलेश सिंह ने महराजगंज और भालचंद यादव ने खलीलाबाद सीट पर जीत हासिल की। बांसगांव में राजनारायण पासी, डुमरियागंज में रामपाल सिंह ने दूसरी, पड़रौना में रामनगीना मिश्र ने चौथी और बस्ती में श्रीराम चौहान ने तीसरी बार भाजपा का परचम लहराया। 

पहली बार बनी 5 साल चलने वाली गैरकांग्रेसी सरकार 
1999 के चुनाव के बाद केंद्र में पहली बाद पांच साल तक चलने वाली गैरकांग्रेसी सरकार बनी। इसके पहले 1977, 1989 और 1996 में गैर कांग्रेसी सरकारें बनीं थीं लेकिन पांच साल के पहले ही अलग-अलग वजहों से गिर गई थीं। 1999 के चुनाव में भाजपा 20 पार्टियों के एनडीए गठबंधन के साथ उतरी थी। एनडीए को कुल 269 सीटें मिली। इस गठबंधन को 29 सदस्यों वाली तेलगुदेशम ने भी समर्थन दिया। कांग्रेस ने इस चुनाव में 114 सीटें हासिल की थीं। इनमें गोरखपुर-बस्ती मंडल की एक भी सीट नहीं थी। 

1999 के चुनाव परिणाम
गोरखपुर         योगी आदित्यनाथ             भाजपा 
बांसगांव         राजनारायण पासी                भाजपा 
सलेमपुर         बब्बन राजभर                बसपा
देवरिया            श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी            भाजपा 
पड़रौना            रामनगीना मिश्र                भाजपा 
महराजगंज        कुंवर अखिलेश सिंह            सपा 
डुमरियागंज        रामपाल सिंह                भाजपा 
खलीलाबाद        भालचंद यादव                 सपा 
बस्ती            श्रीराम चौहान                भाजपा 
 

यह चुनाव अस्थिरता के एक लम्बे दौर के बाद हुआ था। तीन साल में जनता दो मध्यावधि चुनाव देख चुकी थी। इस बार भी लोकसभा में किसी दल को बहुमत नहीं मिला लेकिन एनडीए गठबंधन पांच साल चलने वाली सरकार बनाने में कामयाब रहा। प्रो.राजवंत राव, पूर्व विभागाध्यक्ष, प्राचीन इतिहास विभाग, गोरखपुर विवि 

1998 के चुनाव के 13 महीने बाद देश की जनता ने एक वोट से सरकार को गिरते देखा। वह भारतीय लोकतंत्र के वैशिष्ट्य का आदर्श प्रतिमान है जिसका उदाहरण आज भी दिया जाता है। बाद के वर्षों में देश ने सरकार बचाने, बनाने और गिराने के लिए कई बार खुल्लमखुल्ला खरीद-फरोख्त देखी। ऐसी स्थितियों ने आम लोगों की आस्था को ठेस पहुंचाई। 
अशोक नारायण धर दुबे, वरिष्ठ अधिवक्ता

देश के सामने सबसे बड़ा सवाल राजनीतिक स्थिरता का था। बार-बार के मध्यावधि चुनाव से अर्थव्यवस्था पर बोझ बढ़ रहा था। 1999 में भी आशंकाएं बरकरार थीं क्योंकि किसी दल को बहुमत नहीं आया था। लेकिन अंतत: ये आशंकाएं निर्मूल साबित हुईं। 
शशिरंजन, शिक्षक  

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  • Web Title:BJP won six seats in 13th General Election from GKP Basti Division