Bid drivers wives in dialogue not even tine for children - संवाद में बोलींं ट्रेन ड्राइवरों की पत्नियां, इनके पास तो बच्चों के लिए टाइम ही नहीं DA Image
15 दिसंबर, 2019|2:54|IST

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संवाद में बोलींं ट्रेन ड्राइवरों की पत्नियां, इनके पास तो बच्चों के लिए टाइम ही नहीं

संवाद में बोली चालकों की बीवियां, बच्चों के लिए भी टाइन नहीं

अगर पति को आराम और छुट्टी नहीं मिल रही है तो इतने परिश्रम का क्या फायदा। 30-30 घंटे की ड्यूटी कर के आते हैं लेकिन घर के लिए कुछ नहीं कर पाते। कुछ घंटे आराम के बाद फिर ड्यूटी। बच्चों के लिए भी टाइम नहीं है। इस तरह की तीखी टिप्पणी सहायक और लोको पायलट की बीवियों ने बुधवार को जंक्शन के डीजल लॉबी पर आयोजित संरक्षा संवाद के अवसर कीं।

संरक्षा संवाद में 50 से अधिक लोको पायलट और उनकी बीवियां उपस्थित थीं। उनकी समस्याओं को सुनने के लिए लखनऊ मण्डल के एडीआरएम प्रवीण पाण्डेय मौजूद थे। संवाद में एक तरफ जहां चालकों की बीवियों के सवालों की बौछार थी तो दूसरी ओर एडीआरएम के संयमित जवाब।

एडीआरएम प्रवीण पांडेय ने कहा कि निर्बाध ट्रेन संचलन में लोको पायलटों की भूमिका अहम होती है। उन्हें पूरा रेस्ट दें। समय-समय पर कार्यशाला का आयोजन कर उन्हें अपडेट करते रहें। परिजन घर से निकलते समय लोको पायलटों को अतिरिक्त तनाव न दें। लोको पायलटों की समस्याओं को सुनने के बाद उन्होंने समाधान का आश्वासन दिया। क्रू कंट्रोलर इंद्रेश कुमार ने सेमिनार का संचालन किया। इस मौके पर सीनियर डीएसओ अनिल कुमार, सीनियर डीएमई सुधीर कुमार, स्टेशन डायरेक्टर राजन कुमार, एडीएमई पॉवर एसपी सिंह, लोको पायलट प्रशांत मिश्र, अंजनी कुमार और पीके शर्मा आदि और उनके परिजन सहित बड़ी संख्या में रनिंग स्टाफ मौजूद थे।

महिला लोको पायलटों ने की अलग प्रसाधन केंद्रों की मांग

सेमिनार में मौजूद रुबी कुमारी, श्रीनी श्रीवास्तव और रिजवाना आदि सहायक लोको पायलटों ने स्टेशनों पर आने वाली समस्याओं को उठाया। उन्होंने बताया कि स्टेशनों पर स्थित रनिंग रूम में महिलाओं के लिए अलग से प्रसाधन केंद्र नहीं है।

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