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गोरखपुरबैंकों के कर्जदार बन गए, पूरा नहीं हुआ आशियाने का सपना

हिन्दुस्तान टीम,गोरखपुरPublished By: Newswrap
Tue, 01 Jun 2021 04:50 AM
बैंकों के कर्जदार बन गए, पूरा नहीं हुआ आशियाने का सपना

गोरखपुर। अजय श्रीवास्तव

गोरखपुर विकास प्राधिकरण की आवासीय योजनाओं में ग्रहण लगा हुआ है। प्राधिकरण के विभिन्न योजनाओं में 200 करोड़ से अधिक की पूंजी जमाकर 3000 से अधिक लोगों को आशियाने का इंतजार है।

सूरजकुंड निवासी जया प्रियदर्शी ने गोरखपुर विकास प्राधिकरण के लेक व्यू आवासीय योजना में बैंक से कर्ज लेकर 60 लाख इस उम्मीद में जमा किया था कि उन्हें आशियाना मिल जाएगा। प्राधिकरण के अधिकारियों द्वारा कहा गया कि नवम्बर 2020 तक हर हाल में कब्जा मिल जाएगा। लेकिन जया जैसे करीब 200 लोगों का आशियाने का सपना पूरा नहीं हो रहा है। एनजीटी के पेच के बाद लोहिया एन्क्लेव में करीब 202 रजिस्ट्री तो हुई लेकिन बमुश्किल 20 लोग ही वहां रह रहे हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में काम करने वाले बृजेश द्विवेदी बतात हैं कि ‘40 लाख देकर रजिस्ट्री हुई। जिंदगी भर की पूंजी लग गई। आवास में प्रवेश के लिए कम से कम पांच लाख की दरकार है।

इसी तरह पत्रकारपुरम में भी तमाम लोग आशियाने की उम्मीद में हैं। शिक्षिका विभा द्विवेदी ने पत्रकारपुरम में फ्लैट का आवंटन कराया है। वह बताती हैं कि ‘बैंक से कर्ज लेकर किस्त जमा कर रहे हैं, प्राधिकरण बताने को तैयार नहीं है कि कब फ्लैट में कब्जा मिलेगा। जबकि पत्रकारपुरम फेज वन का निर्माण 70 फीसदी भी नहीं हुआ है।

पीएम आवास के आवंटी भी बुरे फंसे : राप्तीनगर विस्तार आवासीय योजना के तहत मानबेला में निर्मित आवासों में 1242 को आवंटन हो गया है। लेकिन अभी तक किसी को कब्जा नहीं मिल सका है। फ्लैट की कीमत 4.50 लाख रुपये है। इसमें 2.50 लाख रुपये सरकार की ओर से वहन किया जा रहा है, शेष दो लाख रुपये आवंटी दे रहे हैं। कुछ आवंटियों ने जीडीए में बैंक से लोन लेकर रकम जमा कर दी है, लेकिन उन्हें यह पता नहीं है कि कब आवास पर कब्जा मिलेगा।

राप्तीनगर विस्तार योजना में नहीं हुआ विकास कार्य

प्राधिकरण ने राप्तीनगर विस्तार योजना 12 साल पहले लांच किया था। कोर्ट में लंबी सुनवाई के बाद आवंटियों को जमीन पर कब्जा तो मिला लेकिन प्राधिकरण अभी तक सड़क, बिजली, नाली की व्यवस्था नहीं कर सका है। योजना में प्राधिकरण ने 878 आवंटियों को प्लांट का आवंटन किया था। 12 साल के लंबे इंतजार के बाद भी बमुश्किल 20 लोगों ने आवास बनवाया है। 10 साल पहले 22 लाख रुपये बैंक से कर्ज लेकर जीडीए में जमा करने वाले अशोक अस्थाना कहते हैं कि ‘जिन्होंने मकान बनवाया है, वे जेनरेटर के सहारे घर रोशन कर रहे हैं।

मकान होता तो आइसोलेशन की दिक्कत नहीं होती

राप्तीनगर विस्तार योजना में राप्ती कॉम्प्लेक्स में रेडीमेड कारोबारी सुनील गुप्ता ने भी प्लाट लिया था। पिछले महीने परिवार के 7 सदस्य कोरोना पॉजिटिव हो गए। सुनील बताते हैं कि ‘यदि राप्ती नगर विस्तार में सुविधाएं होती तो मकान बन चुका होता। परिवार के सदस्य आइसोलेशन में रह लेते। इसी दिक्कत में माता का निधन हो गया। आने वाले दिन को लेकर खबरें अच्छी नहीं हैं। जीडीए को चाहिए कि जल्द बिजली, पानी और सड़क की सुविधाएं दें।

बोले जीडीए सचिव

लोहिया फेज वन में 201 और दो में एक आवंटी की रजिस्ट्री हो चुकी है। लेक व्यू में जून से कब्जा देने की तैयारी है। पत्रकारपुरम और पीएम आवास में कोरोना के चलते थोड़ा विलम्ब है। स्थितियां ठीक होते ही काम में तेजी लाकर आवंटन की प्रक्रिया पूरी करेंगे। राप्तीनगर विस्तार में टेंडर के बाद काम हो रहा है।

- राम सिंह गौतम, सचिव, जीडीए

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