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लोकसभा चुनाव 2019: संसद में महिलाएं नहीं बनी कभी बस्ती की आवाज

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प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ ही विभिन्न छोटे-मोटे दर्जनों पार्टियां महिला सशक्तिकरण और महिला आरक्षण की लाख बातें करती हैं। पोस्टर, बैनर और होर्डिंग के जरिए प्रचार-प्रसार करती हैं। 

लेकिन बस्ती की हकीकत तो यह है कि सोलह लोकसभा चुनाव में आज तक एक भी महिला संसद में बस्ती की आवाज नहीं बन सकी। किसी ने दावेदारी नहीं की या फिर यूं कहें कि महिलाओं के लिए लड़ाई लड़ने का दावा करने वाली प्रमुख पार्टियों ने कभी उन्हें टिकट ही नहीं दिया। 

चौथी लोकसभा 1967 तक सामान्य सीट रही तब भी और 1971 से 2004 तक सुरक्षित सीट रहने के बावजूद किसी भी दल ने महिलाओं को अपना प्रत्याशी नहीं बनाया। और 2014 में पुन: सामान्य सीट होने के बावजूद किसी महिला ने दावेदारी नहीं की।अलबत्ता विधानसभा चुनाव में तीन महिलाओं ने बस्ती सदर से विधायक बन शहरवासियों की नुमाइंदगी की। बस्ती सदर से 1969 में राजेंद्र किशोरी, 1974 में श्यामा देवी और 1980 में अलमेलू अम्माल को जनता ने अपना विधायक चुना। तीनों कांग्रेस पार्टी से थीं। लेकिन किसी महिला द्वारा दिल्ली में बस्ती की आवाज बनने का इंतजार है। 

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  • Web Title:Basti never got woman representation in Loksabha