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आटोमेटिक सिग्नल सुरक्षा जांच में पास, बीकानेर के पीछे दौड़ी कटिहार

गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता गोरखपुर-लखनऊ रूट पर जगतबेला से मगहर तक आटोमेटिक सिग्नल सुरक्षा...

आटोमेटिक सिग्नल सुरक्षा जांच में पास, बीकानेर के पीछे दौड़ी कटिहार
हिन्दुस्तान टीम,गोरखपुरWed, 17 Apr 2024 09:15 AM
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गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता
गोरखपुर-लखनऊ रूट पर जगतबेला से मगहर तक आटोमेटिक सिग्नल सुरक्षा जांच में पास हो गया। प्रमुख मुख्य सिग्नल एंव दूरसंचार अभियंता के निरीक्षण में झंडी मिलने के बाद मंगलवार को 2.30 बजे से पहले नए सिग्नल सिस्टम पर मालगाड़ी दौड़ाई गई। इसके बाद दरभंगा-बीकानेर स्पेशल, कटिहार अमृतसर आम्रपाली फिर लोहित एक्सप्रेस एक के पीछे एक चलाई गई। तीनों ट्रेनें जगहबेला से मगहर तक एक के पीछे एक सफलता पूर्वक चलती रहीं। इस नए सिग्नल सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए तीन दिनों से ब्लाक लिया गया था। मंगलवार को इंटरलॉकिंग का काम पूरा हो जाने के बाद दोपहर ढाई बजे से रूट ट्रेनों के संचलन के लिए खोल दिया गया।

पहले फेज में बाराबंकी, गोंडा, बस्ती के रास्ते लखनऊ से गोरखपुर के बीच 272 किलोमीटर लंबी रेल लाइन पर ऑटोमेटिक सिस्टम लगाया जा रहा है। दूसरे चरण में गोरखपुर-भटनी-छपरा रूट पर भी आटोमेटिक सिस्टम अपग्रेड किया जाएगा।

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क्या है आटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम :

आटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग में ट्रेनें एक के पीछे एक चलती रहेंगी। बेवजह यार्ड में खड़ी नहीं होंगी। इस सिस्टम से रेल लाइनों पर रफ्तार के साथ ट्रेनों की क्षमता भी बढ़ेगी। खड़ी ट्रेनों को आगे वाली ट्रेन के अगले स्टेशन तक पहुंचने का इंतजार नहीं करना होगा। स्टेशन यार्ड से ट्रेन के आगे बढ़ते ही पीछे वाली ट्रेन को भी ग्रीन सिग्नल मिल जाएगा। यानी, एक ब्लॉक सेक्शन में एक के पीछे दूसरी ट्रेनें चलती रहेंगी।

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बेवजह लेट नहीं होंगी गाड़ियां :

इस सिस्टम के लागू हो जाने से ट्रेनें सिग्नल की वजह से यार्ड या स्टेशन पर खड़ी नहीं होंगी। अनावश्यक लेट नहीं होंगी। अभी तक जो सिस्टम है उसमें एक स्टेशन से ट्रेन छूटने के बाद दूसरे स्टेशन पहुंचने के बाद खड़ी ट्रेन को छोड़ा जाता है। मसलन, गोरखपुर से ट्रेन चलने के बाद अगले स्टेशन डोमिनगढ़ पार कर लेने के बाद ही गोरखपुर से दूसरी ट्रेन चलाई जाती है। नई व्यवस्था के बाद ट्रेन के गोरखनाथ पुल पार कर लेने के बाद ही गोरखपुर जंक्शन से दूसरी ट्रेन रवाना कर दी जाएगी।

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