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12 जुलाई, 2020|11:07|IST

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ओवरलोडिंग केस: एसआईटी की गिरफ्त में आए अफसरों ने पहले अकड़ दिखाई, फिर सवालों से टूटे 

बस्ती और संतकबीरनगर जिलों के एआरटीओ प्रवर्तन जब एसआईटी की गिरफ्त में आए तो अकड़ दिखाने लगे। पुलिस वालों पर रौब दिखाने की कोशिश की और अपने अफसरों से बात करने को कहा। एसआईटी ने उन्हें दबोचा और गाड़ी में लादकर थाने लाई। वहां भी वे रौब गालिब करने लगे। आरटीओ सिपाही ने वर्दी का हवाला देते हुए भाई-भाई का जुमला फेंका पर किसी की दाल नहीं गली और कई सवालों के बाद सबने अपनी अकड़ ढ़ीली कर दी। आइए बताते हैं किस तरह एसआईटी ने गिरफ्तार एआरटीओ का कसबल ढीला किया। पेश है एसआईटी-एआरटीओ के रूबरू होने के कुछ अंश...

एसआईटी - ओवरलोडिंग के धंधे में कबसे गिरोह की मदद कर रहे हैं?
एआरटीओ संदीप - आप लोगों के पास गलत सूचना है। मैं यह सब नहीं करता। ईमानदारी से काम करता हूं।

एसआईटी-देखिए हमने आपको पकड़ा है तो कोई आधार तो होगा ही?
एआरटीओ संदीप - आप लोग अपना टाइम खराब कर रहे हैं। एआरटीओ हूं, सोच लीजिए, आप लोग गलत कर रहे हैं। अभी भी वक्त है जाने दीजिए। शासन भी नाराज होगा। 

एसआईटी-शासन की नाराजगी छोड़िए, अगर हमने आपको पकड़ा है तो जवाब भी दे लेंगे, आप सचाई उगलिए। हम लोग सख्ती नहीं करना चाहते है। 
एआरटीओ संदीप- आप लोग बार-बार गलत इल्जाम लगा रहे हैं। किसी को भी परेशान करना आप लोगों की आदत बन चुकी है? यह हरकत ठीक नहीं है। सरकारी अफसर पर इस तरह के बेजा इल्जाम न लगाइए। 

एसआईटी-आप नहीं मानेंगे? चलिए यह कॉल डिटेल देखिए, गिरोह के सरगना धर्मपाल से इतनी बातें क्यों करते थे?
एआरटीओ संदीप- किसी से बात करना जुर्म है क्या? अफसर हूं तो किसी से भी बात कर सकता हूं। कोई फोन करेगा तो बात नहीं करूंगा क्या? इसमें गलत क्या है। 

एसआईटी- किसी से यूं ही तो लम्बी बात नहीं की जा सकती। कैसे जानते हैं धर्मपाल को? वह कैसे जुड़ा आपसे?  रिश्तेदारी तो हो नहीं सकती क्योंकि वह सजातीय भी नहीं? 
एआरटीओ संदीप -वैसे ही, अफसर हूं, बहुत से लोग मिलते हैं, सम्बंध बन जाता है। इसमें कोई गलत बात नहीं लगती। 

एसआईटी- आप नहीं मानेंगे? चलिए अब आपको पुलिस का वह 
आइना दिखाते हैं जिसमें आपको अपनी तस्वीर दिख जाएगी? दारोगा जी निकालिए वह आइना। 
(इसके बाद दारोगा एक टेप रिकार्डर आन कर देता है जिसमें धर्मपाल व एआरटीओ संदीप की बातचीत रिकार्ड होती है)

धर्मपाल- सर नोट करिए...फलां नम्बर की गाड़ी जा रही है। फीस मिल
चुकी है। 
एआरटीओ संदीप- कितनी, मुझ तक कौन ला रहा है।
धर्मपाल- क्या सर,कभी धोखा दिया है आपको। फलाने के हाथ भेज दिया है।
एआरटीओ संदीप- कितना? 
धर्मपाल-साहब जितना गाड़ी के हिसाब से तय है।
एआरटीओ संदीप- देखो पिछली बार कम मिला था। गाड़ी ज्यादा लोडेड थी। वह तो तुम्हारे नाम पर जाने दिया था।
धर्मपाल-(दूसरी काल) सर जी, फलानी गाड़ी जा रही है। देख लीजिएगा, रोकिएगा नहीं। हिसाब हो गया है। 
एआरटीओ संदीप-ओके
धर्मपाल-(तीसरी काल)साहब आपने फलाने नम्बर की गाड़ी पकड़ ली है जबकि उसकी फीस अदा हो चुकी है।
एआरटीओ संदीप-अरे यार, तुम कहते कुछ हो करते कुछ और। यह गाड़ी इतनी ओवर लोड है और फीस इतनी कम। 
धर्मपाल-क्या साहब थोड़ा एडजस्ट किया की जिए 
एआरटीओ संदीप-ओके, अगली बार ब्रीच न करना। 
(और इसके बाद एआरटीओ सं दीप टूट गए और अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। उन्होंने माना कि वह इस गिरोह की मदद किया करते थे।)

एआरटीओ शैलेंद्र तिवारी-एसआईटी

एसआईटी- कहिए तिवारी जी, गिरोह की मदद कर सरकार को खूब चपत लगाई?
एआरटीओ शैलेंद्र तिवारी-गलत कह रहे हैं आप। मैंने हमेशा सरकार को राजस्व वसूलकर दिया। लक्ष्य भी हमेशा पूरा होता रहा। 
एसआईटी- संदीप जी ने सच उगल दिया है। अब आप भी बता दीजिए सचाई?
एआरटीओ शैलेंद्र तिवारी- संदीप जी ने क्या कहा, वह मैं नहीं जानता। मेरा इस गिरोह से कोई लेनादेना नहीं।
एसआईटी-बता दीजिए, हम लोगों ने यूं ही आपको तो पकड़ा नहीं होगा?
एआरटीओ शैलेंद्र तिवारी-आप लोग तो किसी को भी पकड़ लेते हैं। मेरे बारे में भी आपको कोई चूक हो गई लगती है।
एसआईटी-चूक नहीं, प्रमाण है।
एआरटीओ शैलेंद्र तिवारी-तो दिखाइए।
एसआईटी-आप नहीं मानेंगे?
एआरटीओ शैलेंद्र तिवारी-कैसे मान लूं जब मामला ही फर्जी है। आरोप निराधार हैं।
एसआईटी-तो यह काल डिटेल के बारे में क्या कहेंगे?
एआरटीओ शैलेंद्र तिवारी-इसमें कोई दम नहीं है। बात करने से मुजरिम नहीं हो जाता हूं। पब्लिक काल करती है तो बात होती है। यह कौन है मैं नहीं जानता।
एसआईटी-जिसे जानते नहीं, उससे रोज कई-कई बार और महीनों, सालों तक बातचीत?
एआरटीओ शैलेंद्र तिवारी-बहुत से लोग हैं जोकि बेवजह रोज काल करते हैं। कभी सिफारिश करते हैं, कभी किसी काम के लिए दबाव बनाते हैं। यह रूटीन की आदत है हम लोगों की।
एसआईटी-तो आप धर्मपाल को नहीं जानते?
एआरटीओ शैलेंद्र तिवारी-बिल्कुल नहीं?
एसआईटी-ठीक है, अब आप यह सुन लीजिए(टेप रिकार्डर आन हो जाता है।)
धर्मपाल-सर, नमस्ते। 
एआरटीओ शैलेंद्र तिवारी-क्या हाल है धर्मपाल।
धर्मपाल-जब तक आप हैं, हाल बुरा कैसे हो सकता है साहब।
एआरटीओ शैलेंद्र तिवारी-अच्छा बताओ, कुछ काम कर रहा हूं, कोई काम?
धर्मपाल-जी सर, एक गाड़ी है नम्बर...। पकड़िएगा नहीं। काम हो गया है।
एआरटीओ शैलेंद्र तिवारी-ओके, कितना मिला?
धर्मपाल-पूरा
एआरटीओ शैलेंद्र तिवारी-ओके
धर्मपाल-(दूसरी काल) सर, एक गाड़ी है, बस्ती से गुजरेगी, रात 9 बजे के करीब। जाने दीजिएगा। 
एआरटीओ शैलेंद्र तिवारी-ओके। थोड़ा फीस बढ़ाओ। बांटना भी पड़ता है।
धर्मपाल-क्या सर, पहले से जो तय है, वही तो हो रहा है। उसमें कोई कमी हुई कभी।
एआरटीओ शैलेंद्र तिवारी-बात सही है यार पर अब महंगाई बढ़ रही है और हिस्सेदार भी तो बहुत हैं। चलो, फिर बात करेंगे।
(इसके बाद एसआईटी के सामने एआरटीओ शैलेंद्र तिवारी गिड़गिड़ाने लगते हैं। गलती हो गई, इस बार माफ कर दीजिए। अब ऐसा नहीं करूंगा।)

यहां आपको बता दें कि यह फोन टेपिंग गैर कानूनी तरीके से नहीं बल्कि शासन से अनुमति मिलने के बाद एसटीएफ ने की थी। वह भी कई महीनों तक लगातार। सबूत पुख्ता हो जाने के बाद ही एसटीएफ एक्शन में आई। 

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  • Web Title:ARTO were unable to face questions of SIT in custody in gorakhpur