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3 अगस्त, 2020|10:45|IST

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जंगली जानवरों के मृत शरीर की तस्‍करी रोकने को चिडि़याघर नेे किया ये इंतजाम

निर्माणाधीन चिड़ियाघर में वन्य-जीवों की मौत पर उनका सुरक्षित अंतिम संस्कार किया जा सकेगा। इंसीनरेटर कक्ष का निर्माण कर मशीनें भी इंस्टॉल कर दी गई हैं। इसके अलावा प्राणि उद्यान में बनाए जा रहे पशु अस्पताल में अलग से एक छोटा इंसीनरेटर मेडिकल वेस्ट निस्तारण के लिए लगाया जाएगा। ताकि कोई संक्रमण न फैले।

असल में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के शेड्यूल 1 के अंतर्गत आने वाली प्रजातियों का अवैध शिकार मुख्य तौर पर व्यापार के लिए किया जाता है। एशिया समेत दुनिया के दूसरे महाद्वीपों में जानवर और उनके शरीर के अलग-अलग हिस्से ब्लैक मार्केट में बिकते हैं। महंगे दामों पर खरीद कर इनका इस्तेमाल गहने, औजार, दवा, जैकेट आदि बनाने के लिए किया जाता है। शेड्यूल 1 के अंतर्गत संरक्षित वन्य-जीव की प्रजातियों के खिलाफ किसी भी अपराध के लिए अधिकतम सात साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। 

प्राणि उद्यान में नियुक्त पशु चिकित्सक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि खुले में लकड़ियों की मदद से जानवर को जलाने पर उसके दांत, नाखून समेत अन्य हिस्से बच जाने की आशंका रहती है। इनकी तस्करी भी की जाती है। प्राणि उद्यान में संरक्षित प्रजातियों के वन्य-जीव की किन्ही वजहों से मौत हो जाए तो उनके अंतिम संस्कार के लिए इंसीनरेटर लगाया गया है। केंद्रीय उद्यान प्राधिकरण भी इंसीनरेटर पर खासा जोर रहता है। 

1.50 करोड़ से अधिक खर्च
अत्याधुनिक इंसीनरेटर कक्ष और मशीनों पर तकरीबन 1.50 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की गई है। राजकीय निर्माण निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर डीबी सिंह ने बताया कि इस प्रोजेक्ट पर तकरीबन 1.50 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। 100 किलोग्राम क्षमता का इलेक्ट्रिक और 50 किलोग्राम क्षमता का डीजल जेनरेटर संचालित इंसीनरेटर लगाया गया है। इसकी चिमनी की ऊंचाई भी काफी ज्यादा रखी गई है। इससे जानवर के जलने से न दुर्गन्ध होगी न ही ज्यादा धुंआ निकलेगा। थोड़ी राख निकलेगी जिसका इस्तेमाल प्राणि उद्यान के पेड़ पौधों में कर लिया जाएगा।

 

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  • Web Title:animals will be disposed in gorakhpur zoo only after death to stop smuggling