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गोरखपुर

कोरोना व एचआईवी के राज खोलेगा एम्स, होगी जीनोम सीक्वेंसिंग

हिन्दुस्तान टीम,गोरखपुरPublished By: Newswrap
Wed, 04 Aug 2021 04:11 AM
कोरोना व एचआईवी के राज खोलेगा एम्स, होगी जीनोम सीक्वेंसिंग

गोरखपुर। मनीष मिश्र

पूर्वी यूपी, पश्चिमी बिहार में फैली जानलेवा बीमारियों के रहस्य से पर्दा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) उठाएगा। इन बीमारियों के कारणों की पहचान के लिए एम्स जल्द ही जीनोम सीक्वेंसिंग शुरू करेगा। इसका प्रस्ताव एम्स प्रशासन ने भेज दिया है।

मंजूरी मिलने के बाद जीनोम सीक्वेंसिंग की सुविधा वाला यह सूबे का पहला एम्स होगा।

पूर्वी यूपी और पश्चिमी बिहार के करीब पांच करोड़ की आबादी में कई जानलेवा बीमारियों का प्रकोप है। कोरोना वायरस के प्रकोप से यह क्षेत्र जूझ रहा है। इंसेफेलाइटिस का यह सबसे बड़ा केन्द्र हैं। इसके साथ ही कैंसर, हेपेटाइटिस, मलेरिया, एचआईवी, टीबी से भी इस क्षेत्र की बड़ी आबादी जूझ रही है। जन्मजात विकृति और दिव्यांगता के मामले भी पूर्वी यूपी में बहुतायत मिलते हैं। इन सभी बीमारियों एवं उनके कारणों की पहचान के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग अहम है।

इसलिए कारगर है जीनोम सीक्वेंसिंग

जीनोम सीक्वेसिंग वायरस के डीएनए और आरएनए में बदलाव की पहचान हो सकेगी। इसके अलावा माता-पिता से मिलने वाली अनुवांशिक बीमारियां जैसे थैलेसीमिया, हीमोफीलिया की स्क्रीनिंग भी की जाएगी, ताकि यह पता चलेगा कि यदि उनका कोई बच्चा जन्म लेता है तो उसे कोई बीमारी तो नहीं होगी। यह वायरस में म्यूटेशन(बदलाव) की पहचान कर लेगा।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा गया प्रस्ताव

एम्स की निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर ने बताया कि एम्स में माइक्रोबॉयोलॉजी की लैब स्थापित हो चुकी है। शिक्षक तैनात हो गए हैं। माइक्रोबायोलॉजी टीम के पास बीएसएल-टू (बॉयोसेफ्टी लैब) की सुविधा है। इसमें आरएनए स्ट्रैक्टर व बॉयोसेफ्टी कैबिनेट तक की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे में जीनोम सीक्वेसिंग जांच के ल‌िए टीम को कैंपलरी सीक्वेसिंग के साथ कुछ अन्य मशीन की जरूरत है। इसे लेकर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा गया है।

वैरिएंट की पहचान व इलाज में होगा सहायक

निदेशक ने बताया कि कोविड की जांच व इलाज में जीनोम सीक्वेंसिंग की भूमिका अहम है। इससे वायरस के वैरिएंट की पहचान होती है। इससे मरीजों के इलाज में सुविधा रहेगी। एम्स में भी कोविड जांच व इलाज की सुविधा है। यहां 100 बेड व 30 बेड का अलग-अलग वार्ड तैयार हो चुका है। ऑक्सीजन पाइप बिछाने का काम अंतिम चरण में है। यह अगले कुछ दिनों में पूरा हो जाएगा।

बीआरडी को नहीं मिला ग्रीन सिग्नल

जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए प्रयासरत बीआरडी मेडिकल कालेज को अब तक शासन की तरफ से ग्रीन सिग्नल नहीं मिला है। बताया जाता है कि बीआरडी प्रशासन को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए कुछ उपकरणों के साथ ही दक्ष मानव संसाधन की दरकार है। इसकी मांग भी माइक्रोबॉयोलॉजी की टीम ने की है। दोनों पर सहमति नहीं बन सकी है। ऐसे में बीआरडी का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है।

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