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20 अक्तूबर, 2020|2:40|IST

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गोरखपुर में स्टे में फंसे हैं 500 से ज्यादा मुकदमे, अब तेज होगी सुनवाई

गोरखपुर में करीब 500 से ज्यादा मुकदमे हाईकोर्ट या फिर सुप्रीम कोर्ट के स्टे में फंसे हैं। इनमें 100 से ज्यादा आपराधिक मुकदमों में आरोपितों ने कोर्ट से स्टे ले रखा है। जबकि दीवानी से जुड़े मामलों की संख्या भी 400 से कम नहीं है। आपराधिक मामलों में कुछ स्टे पांच साल या उससे अधिक समय से स्टैंड कर रहे हैं जबकि दीवानी से जुड़े 10 साल से पुराने मुकदमे पर भी स्टे है। गिरफ्तारी से रोक को लेकर भी 100 के करीब मामलों में आरोपितों ने स्टे ले रखा है। इनमें पूर्व मंत्री रामभुआल निषाद का स्टे भी शामिल था। स्टे समाप्त होने के बाद अब इन मामलों की कार्रवाई में तेजी आने की उम्मीद है।

आपराधिक-दीवानी केसों में कोर्ट से स्टे लेने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने समय सीमा निर्धारित कर दी है। छह महीने से अधिक समय से जिनका भी स्टे है, उन्हें तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। इस दायरे में गोरखपुर में 500 से ज्यादा मुकदमे शामिल हैं जिसमें सुनवाई पर आरोपितों ने स्टे ले रखा है। वे सभी मामले अब स्वत: ही निरस्त हो जाएंगे। ऐसा होने से उन मुकदमों की सुनवाई में तेजी आ जाएगी। उदाहरण के तौर पर हत्या के प्रयास के केस में शाहपुर थाने में दर्ज मामले में गुलाब शंकर नाम के एक आरोपित ने पिछले चार साल से स्टे ले रखा है। कैम्पियरगंज से दर्ज एक मामले में भी इसी आरोपित ने पिछले तीन साल से स्टे ले रखा है। मुकदमे की सुनवाई ठप है। 

वहीं दीवानी से जुड़े जद्दू बनाम राम नरेश के मामले में करीब 10 साल से स्टे है। वहीं गिरफ्तारी से रोक को लेकर स्टे की संख्या भी 100 के करीब है। जालसाजी सहित अन्य मामले में आरोपितों ने गिरफ्तारी से बचने को कोर्ट से स्टे लिया है लेकिन इनमें कम ही ऐसे मामले हैं जिसकी अवधि छह महीने पूरी हो गई है। जिनकी पूरी हुई है उनमें ज्यादातर केस में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। इसमें पूर्व मंत्री रामभुआल निषाद का केस प्रमुख रूप से शामिल है।

शस्त्र लाइसेंस फर्जीवाड़े में रामभुआल ने लिया था स्टे
शस्त्र लाइसेंस के फर्जीवाड़े में पूर्व मंत्री रामभुआल निषाद के खिलाफ फरवरी 2020 में बड़हलगंज थाने में जालसाजी सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। गिरफ्तारी से बचने के लिए पूर्व मंत्री ने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया था। अब उस मामले में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। लिहाजा वह स्टे स्वत: तो खत्म हो गया। अब पूर्व मंत्री को कोर्ट में पेश होकर जमानत करानी होगी। ऐसा न करने पर वारंट भी जारी हो सकता है। पूर्व मंत्री पर आरोप था कि बेचू यादव नामक व्यक्ति के नाम से स्वीकृत लाइसेंस को फर्जी तरीके से पूर्व मंत्री रामभुआल निषाद ने अपने नाम से करा लिया है। दारा निषाद नामक व्यक्ति ने इसकी शिकायत की थी। डीएम ने जांच कराई तो पता चला कि लाइसेंस नम्बर पर 3912 पर यह फर्जी लाइसेंस बना था। 

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  • Web Title:500 cases are pending in gorakhpur due to stay