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14 अगस्त, 2020|6:52|IST

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‘बॉबी का एक रुपया वाला टिकट तीन रुपये में मिलता था

‘बॉबी का एक रुपया वाला टिकट तीन रुपये में मिलता था

ऋषि कपूर एक कलाकार जो अगर सिर्फ बैठा हो और वह कुछ न करे तो भी लगता था कि ये शख्स मुस्कुरा रहा है। फिल्मी पर्दे पर दस्तक तो ऋषि कपूर ने पचास के मध्य दशक में ही दे दी थी लेकिन पर्दे पर वे जवान 70 के दशक में हुये और 70 के दशक से शुरू हुआ इस चॉकलेटी कलाकार की फिल्मों का सिलसिला 80, 90 और 2000 तक चलता हूं।

गोरखपुर में रहने वाले सत्तर के दशक के बुजुर्गों में सत्तर के दशक के जवान ऋषि कपूर का चेहरा उनके निधन की खबर सुनते ही आंखों के सामने तैरने लगा। ये वे ही लोग हैं जिन्होंने सिंगल स्क्रीन के दौर में कभी स्कूल तो कभी ऑफिस छोड़ कर के ऋषि कपूर की फिल्में देखी हैं। सत्तर से लेकर नब्बे के दशक तक यहां सिंगल स्क्रीन सिनेमा हॉलों कृष्णा टॉकीज, इन्द्रलोक, वीनस, जुबिली, विजय सिनेमा, माया, झंकार में ऋषि कपूर की फिल्मों के पोस्टर चमकते रहते थे और गलियों में एक खास रिक्शा साउण्ड के साथ घूमता था जो बोलता था कि भाइयों और बहनों आपके नजदीकी सिनेमा घर में राजकपूर की शाहकार फिल्म बॉबी रिलीज हो गई है। जिसमें जवां दिलों की धड़कर ऋषि कपूर और डिम्पल कपाड़ियां हैं। आप सभी लोग सपरिवार फिल्म देखने आये।

ब्लैक में बिकता था बॉबी का टिकट

ऋषि कपूर के जाने का गम उनके प्रशंसकों के दिलों में है। फिल्म समीक्षक प्रो. चन्द्रभूषण अंकुर कहते हैं कि अगर कहा जाये कि गोरखपुर में सत्तर से लेकर नब्बे के दशक तक सबसे ज्यादा लोकप्रिय कलाकार ऋषि कपूर थे तो गलत नहीं होगा। अंकुर ने बताया कि साल 1973 में कृष्णा टाकीज में फिल्म बॉबी रिलीज हुई तो फिल्म का युवा नायक राजा (ऋषि कपूर) हर किसी को भा गया। उस वक्त एक रुपये 40 पैसे का टिकट था। फिल्म सिल्वर जुबली हुई और सबसे खास बात ये थी कि कई कई दिन के शो हाऊसफुल रहते थे। अगर एडवांस टिकट नहीं है तो फिल्म देखने को नहीं मिलती थी। अंकुर ने बताया कि ऋषि कपूर की फिल्मों ने न सिर्फ सिनेमा मालिकों बल्कि टिकट ब्लैर्क्स को बहुत धन कमा कर दिया है। उन्होंने बताया कि बॉबी के बाद साल 1980 तक कई फिल्मे आयीं लेकिन 1976 में आयी लैला मजनू और 80 में आयी कर्ज ने ऋषि कपूर को दिलों में बसा दिया। अंकुर ने बताया कि इन फिल्मों का आलम ये था कि 1 रुपये वाला टिकट तीन-तीन रुपये में लोग खुशी खुशी ब्लैक में लेते थे।

प्रेमरोग के टिकट की लाइन नहीं भूलती

गोरखपुर के विजय सिनेमा में साल 1982 में ऋषि कपूर की फिल्म ‘प्रेमरोग रिलीज हुई थी। सिनेमा हॉल के मालिक संदीप टेकड़ीवाल बताते हैं कि उस सिनेमा हॉल में उस वक्त टिकट के लिए जो लाइने लगती थी वह आज भी नहीं भूलती हैं। टिकट द्वार से बाहर सड़क तक ऋषि कपूर के प्रशंसक फिल्म देखने के लिए घण्टों लाइन लगाते थे। तड़के सुबह लाइन लग जाती थी। दो आदमी लाइन को सिर्फ व्यवस्थित करने के लिए होते थे। ऋषि कपूर की फैन फॉलोइंग में लड़कियां ज्यादा थी तो बड़ी संख्या में लड़कियां भी फिल्म देखने आती थी। इसके बाद 1992 में बोल राधा बोल में भी ऐसे ही दृश्य सिनेमा हॉल के बाहर का था।

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  • Web Title: 39 Bobby 39 s one rupee ticket was available for three rupees