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गोरखपुर में 30 दिवसीय नाट्य कार्यशाला का शुभारम्भ

रंगमंच जैसी विधा कभी भी अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो सकती। यह बेहद अर्थ साध्य और सामूहिक कला है। नाटक और रंगमंच का पूरा इतिहास उठाकर देख लीजिए। यह भारत ही नहीं पश्चिम में भी बिना सरकारी या निजी सहायता के कभी आगे नहीं बढ़ पाया है। नाटक घर में तो बैठकर किया नहीं जा सकता। इसमें ऑडिटोरियम से लेकर कॉस्ट्यूम तक बहुत खर्च होता है। फिर नाटक को एक समय में एक ही जगह दिखाया जा सकता है। इसलिए रंगमंच के सवर्धन के लिये सरकार और निजी संस्थाओ को आगे आना पडे़गा। यह बातें संस्कार भारती एवं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय,नई दिल्ली के संयुक्त तत्वाधान में डीडीयू के दीक्षा भवन में 30 दिवसीय अखिल भारतीय आवासीय नाट्य कार्यशाला के शुभारम्भ अवसर पर मुख्य वक्ता प्रो.देवेन्द्र राज अंकुर ने कहीं। मुख्य अतिथी राज्यसभा सांसद शिवप्रताप शुक्ल ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और एक सभ्य समाज के निर्माण के लिये साहित्य एवं रंगमंच की गतिविधियों का प्रसार आवश्यक है। अध्यक्षता करते हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विजय कुमार सिंह ने राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला को इस क्षेत्र के छात्रों के लिये एक सुनहरा अवसर बताया। प्रस्तावना एवं रूपरेखा संस्कार भारती के प्रांत अध्यक्ष शरद मणि त्रिपाठी ने रखी। संस्कार भारती के राष्ट्रीय नाट्य विधा संयोजक व कार्यशाला संयोजक रविशंकर खरे ने सभी का आभार जताया। इस अवसर पर प्रो. उषा सिह, विश्व मोहन तिवारी, अजीत प्रताप सिह, शैवाल शंकर श्रीवास्तव, राजेश सिंह आदि उपस्थित रहे। अन्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन रीता श्रीवास्तव ने किया।

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  • Web Title:30 Days acting workshop starts in Gorakhpur