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जेल में टू जी का जैमर, थ्री जी और फोर जी से हो रही है बात

थ्री जी और फोर जी के जमाने में टू जी नेटवर्क को अपराधियों ने भी आउट डेटेड कर दिया है। जबकि जेल प्रशासन अभी भी टू जी नेटवर्क को ही जाम करने में जुटा है। हाल यह है कि अपराधी जेल से बात न कर सकें इसके लिए गोरखपुर मण्डलीय कारागार में टू जी नेटवर्क को जाम करने वाले जैमर लगाए गए हैं पर वह अब हाथी के दांत की तरह सिर्फ दिखावे के ही रह गए हैं। अत्याधुनिक जमाने में अपराधी अब थ्री जी और फोर जी मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं। वर्ष 2016 में जेलर डॉ. राजेश सिंह ने गोरखपुर जेल बंदियों के पास से 100 से ज्यादा मोबाइल और सिमकार्ड बरामद किया था। इस बरामदगी से शासनस्तर पर हड़कम्प मच गया था। बरामदगी से बौखलाए बंदियों ने एक बंदी की मौत के बहाने जेल में जमकर हंगामा किया। 12 घण्टे से ज्यादा वक्त तक जेल को अपने कब्जे में रखे। जेल के सिपाहियों को भी बंधक बनाए रखे। मामला शांत होने के बाद शासन ने जेल के अंदर से मोबाइल फोन से होने वाली बात को रोकने के लिए जैमर की व्यवस्था कराई। जनवरी महीने में गोरखपुर जेल में दो जैमर लगाए गए। जैमर लगने के बाद भी जेल से फोन पर धमकी की कुछ घटनाएं सामने आई। जिसके बाद पता चला कि यह जैमर आधुनिक नेटवर्क को जाम करने में सक्षम नहीं है। जेल में छापे के साथ ही जेल प्रशासन द्वारा चेकिंग में कई बार अत्याधुनिक मोबाइल पकड़े जा चुके हैं। सभी मोबाइल थ्री जी और फोर जी नेटवर्क के हैं। जेलर डॉ. राजेश सिंह ने भी 100 से ज्यादा मोबाइल बरामद किया था उसमें भी ज्यादातर मोबाइल थ्री जी और फोर जी के ही पकड़े गए थे। बंदी और कैदी जेल से फोन पर बात न कर पाएं इसके लिए जनवरी महीने में गोरखपुर मण्डलीय कारागार में दो जैमर लगाए गए हैं। बैरक नम्बर 14 में जहां एक जैमरा लगा है वहीं बैरक नम्बर नौ और दस के बीच एक जैमर लगाया गया है। यह दोनों जैमर की क्षमता जेल के बैरक तक की है।

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  • Web Title:2G jammer is worthless in Jail