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5 अप्रैल, 2020|3:50|IST

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सुविधाएं नहीं तो 10 रुपये किस बात के..

सुविधाएं नहीं तो 10 रुपये किस बात के..

गोलघर स्थित इंदिरा बाल विहार पार्क प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार हो गया है। वहां बच्चों के लिए न तो झूले ठीक हैं और न ही पीने का शुद्ध पानी। जिस पार्क का पांच साल पूर्व जीर्णोद्वार हुआ था वह जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुका है। हालत यह है कि लोगों को 10 रुपये का टिकट खरीदना महंगा लगता है।

गोरखपुर के वीआईपी मार्केट गोलघर को शहर की हृदयस्थली कहा जाता है। गोलघर की चकाचौंध के बीच इंदिरा बाल विहार एकमात्र पार्क है। इसकी बदहाली को देखते हुए 2014-15 में जीडीए के तत्कालीन उपाध्यक्ष शिव श्याम मिश्र ने इस पार्क का जीर्णोद्वार कराया था। मेंटिनेंस मद में कुछ पैसे आते रहें इसके लिए प्रवेश शुल्क दो रुपये लगता था। बेहद कम जगह होने के बाद भी शहर के प्रमुख स्थान पर होने के कारण यह पार्क लोगों को आकर्षित करने लगा। अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गर्मियों में ढ़ाई-तीन सौ तक लोग पार्क में घूमने के लिए पहुंचते हैं। जबकि सर्दियों में भी संख्या सौ से ऊपर ही रहती है।

करीब दो वर्ष पूर्व तत्कालीन जीडीए उपाध्यक्ष ओएन सिंह ने पार्क में प्रवेश शुल्क पांच गुना यानी कि 2 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये कर दिया। हालांकि इसके बाद भी लोगों की संख्या में कोई कमी नहीं आई।

मेंटिनेंस में फिसड्डी

जीडीए इसके मेंटिनेंस में फिसड्डी साबित हुआ। मेंटिनेंस के अभाव में वहां पेयजल के लिए लगी टोटियों तक पानी नहीं पहुंचता। वहां के झूले टूटे पड़े हैं। बच्चों के खेलने के लिए बनी फिसल पट्टी घिस चुकी है। उसमें नीचे लगा एंगल बाहर निकल आया है। इसमें फिसलने के दौरान बच्चे घायल हो सकता है। तमाम कलाकृतियां बनी हैं जो टूटकर गिर रही हैं।