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नेशनल पीजी कॉलेज बड़हलगंज के शिक्षक पहली बार कराएंगे रिसर्च

नेशनल पीजी कॉलेज बड़हलगंज के शिक्षक पहली बार कराएंगे रिसर्च

नेशनल पीजी कॉलेज बड़हलगंज के शिक्षक पहली बार कृषि में रिसर्च कराएंगे। डीडीयू प्रशासन ने इस कॉलेज के दो विभाग के शिक्षकों को आठ शोधार्थी एलॉट किए हैं। इससे पहले डीडीयू का केवल बीआरडी पीजी कॉलेज देवरिया के शिक्षक ही रिसर्च कराते थे। इस साल पहली बार डीडीयू प्रशासन ने सभी विषयों में रिसर्च के लिए शोध पात्रता परीक्षा (रेट) का आयोजन किया था।

डीडीयू के कृषि संकाय में यहां से संबद्ध दो कॉलेजों में कृषि की पढ़ाई होती है। बीआरडी पीजी कॉलेज देवरिया में पहले शिक्षक रिसर्च कराते थे मगर इस बार डीडीयू ने नेशनल पीजी कॉलेजों के शिक्षकों से भी रिसर्च कराने का निर्णय लिया है। कुल आठ शोधार्थी इस कॉलेज को आवंटित किए गए हैं। एग्रोनॉमी में चार व हार्टिकल्चर में चार शोधार्थियों को रिसर्च के लिए नेशनल पीजी कॉलेज बड़हलगंज भेजा गया है। एग्रोनॉजी में डॉ. सीके चतुर्वेदी इनके गाइड होंगे जबकि डॉ. एसआर वर्मा हार्टिकल्चर के शोधार्थियों के गाइड होंगे।

पहली बार कई कॉलेजों के शिक्षक बने शोधार्थियों के गाइडनेशनल पीजी कॉलेज बड़हलगंज के साथ कई कॉलेजों के शिक्षक पहली बार स्वतंत्र रूप से शोधार्थियों के गाइड बने हैं। यूजीसी ने विवि के साथ पीजी कॉलेजों में पीजी में पढ़ाने वाले पीएचडी उपाधि प्राप्त शिक्षकों को भी एक साल के भीतर ही शोधार्थियों का गाइड बनाने की छूट दे दी है।

पहले यह नियम था कि विवि या कॉलेजों में पीजी के पीएचडी उपाधि धारक शिक्षकों को कम से कम तीन साल का शिक्षण अनुभव मिलने के बाद गाइड बनाया जाता था। इस आधार पर केवल बुद्ध पीजी कॉलेज व बीआरडी देवरिया में ही शिक्षकों को गाइड बनाया जाता था। अब पहली बार विवि व कॉलेजों में पीजी में पढ़ा रहे पीएचडी उपाधिधारक शिक्षकों को पहले ही साल से गाइड बनाया जा रहा है।

बोले डीन

नेशनल पीजी कॉलेज को भी आठ शोधार्थी मिले हैं। कॉलेज के शिक्षक पहली बार इन्हें पीएचडी कराएंगे। सभी की पीएचडी डिग्री विवि से ही मिलेगी।

डॉ. एसआर वर्मा, डीन कृषि, डीडीयू

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