यूपी में नौकरी की तलाश में युवाओं के लिए अच्छी खबर, बड़ी कंपनियों में आसानी से मिलेगा रोजगार
यूपी में कौशल विकास का प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को अब बड़ी कंपनियों में आसानी से रोजगार मिल सकेगा। मारूति इंडिया लिमिटेड, लार्सन एंड टुब्रो, रेमंड व अन्य बड़ी कंपनियों में युवाओं को रोजगार दिलाने पर जोर दिया जा रहा है।

यूपी में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। कौशल विकास का प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं को अब बड़ी कंपनियों में आसानी से रोजगार मिल सकेगा। मारूति इंडिया लिमिटेड, लार्सन एंड टुब्रो, रेमंड व अन्य बड़ी कंपनियों में युवाओं को रोजगार दिलाने पर जोर दिया जा रहा है। फ्लेक्सी एमओयू के तहत 35 बड़े औद्योगिक समूहों के साथ अभी तक एमओयू किया जा चुका है। आगे यह प्रक्रिया अभी जारी है। ऐसे में युवाओं को बड़ा लाभ मिलेगा।
औद्योगिक साझेदारों के लिए प्रशिक्षित किए गए युवाओं में से 80 प्रतिशत तक को रोजगार दिलाने पर जोर दिया जा रहा है। युवाओं को प्रदेश में ही रोजगार मिले इसके लिए प्रशिक्षण साझेदारों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। युवाओं को यूपी में ही रोजगार मिलने से वह अपने वेतन में से काफी धन बचा सकेंगे। बाहर दूसरे राज्यों में नौकरी करने पर उन्हें रहने, खाने सहित अन्य खर्च करना होता है। यही नहीं इस पहल से यूपी की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। हर जिले में बड़े उद्योगों को चिह्नित कर उसके लिए दक्ष युवा तैयार करने का रोडमैप पहले ही तैयार किया जा चुका है। अभी यूपी में कौशल विकास का प्रशिक्षण देने वाली 500 निजी प्रशिक्षण साझेदार व 300 सरकारी प्रशिक्षण साझेदार हैं।
सात साल में तीन हजार से अधिक लोगों को मिला रोजगार
सुलतानपुर में एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी योजना के तहत) के तहत मूंज व बांध उद्योग के लिए जिले का चयन किया गया है। जिले में मूंज का उत्पाद तैयार करने वाले ज्यादातर लोग बांध बनाने तक ही खुद को सीमित रखें हैं। गोमती नदी के किनारे निवास करने वाले लगभग 110 गांवों के निषाद समुदाय के लोग बांध उद्योग से ज्यादा जुड़े है, लेकिन आधुनिक मशीनों का प्रयोग करने के चलते उनका कारोबार वक्त के साथ बढ़ नहीं रहा। इसका उदाहरण है कि बीते सात वर्षो में केवल 2332 लोगों ने मूंज क्राप्ट के कारोबार को बढ़ाने के लिए बैंक से लोन लिया है। इसमें बांध का करोबार करने वाले लोगों की संख्या अधिक है।
बीते सात वर्षो में इस योजना से करीब तीन हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला चुका है। शासन ने ओडीओपी योजना के तहत वर्ष 2018-19 में जिले का चयन हुआ था। जिसके तहत एक जनपद एक उत्पाद में मूंज क्राप्ट शामिल किया गया है। मूंज क्राप्ट में ऋण व प्रशिक्षण का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाने पर इसमें स्टील आयरन फ्रैब्रिकेशन को भी शामिल कर लिया गया। ताकि जिले का लक्ष्य पूरा किया जा सके। जिले में अभी तक मूंज का बांध बनाने के कारोबार में अधिक लोग शामिल थे। मूंज का बांध आसपास के जनपदों के साथ अन्य राज्यों में भी निर्यात किया जाता है।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल
वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।
पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो
उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


