यूपी में 21,508 शिक्षक और अनुदेशकों की होगी भर्ती, सीएम योगी की एक और बड़ी घोषणा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि बेसिक शिक्षा परिषद की कायाकल्प यात्रा को और अधिक मजबूती देने के लिए यूपी सरकार 21508 नए शिक्षक और अनुदेशकों की नियुक्ति करेगी।

Yogi Government Announcement: नौकरी ढूंढ रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। यूपी में अब एक बार फिर भर्ती होने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों और अनुदेशकों की भर्ती को लेकर घोषणा कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि बेसिक शिक्षा परिषद की कायाकल्प यात्रा को और अधिक मजबूती देने के लिए यूपी सरकार 21508 नए शिक्षक और अनुदेशकों की नियुक्ति करेगी।
मुख्यमंत्री को घोषणा पर 11508 नए शिक्षकों का अधियाचन शिक्षा सेवा चयन आयोग प्रयागराज को भेज दिया गया है। ये शिक्षक खासतौर पर नगरीय क्षेत्रों में भर्ती किए जाएंगे। साथ ही मुख्यमंत्री ने 10 हजार और अनुदेशकों की भर्ती की घोषणा की। ये अनुदेशक उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्ति किए जाएंगे। इससे छात्र-शिक्षक अनुपात भी बेहतर होगा। राज्य सरकार वर्ष 2018 में की गई 69000 शिक्षक भर्ती के बाद अब इन भर्तियों को करने जा रही है। मुख्यमंत्री रविवार को लोकभवन सभागार में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित 24,717 अंशकालिक अनुदेशकों के सम्मान समारोह एवं बढ़े हुए मानदेय के चेक वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
सरकार ने खुद मांगा मानदेय वृद्धि का प्रस्ताव
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2011-12 में बेसिक शिक्षा परिषद के तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अंशकालिक अनुदेशकों की नियुक्ति शुरू की गई थी। उस समय उन्हें 7,000 रुपये मासिक मानदेय दिया जाता था। वर्तमान में कला शिक्षा के 8,469, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा के 9,645 तथा कार्यानुभव शिक्षा के 6,192 अनुदेशक कार्यरत हैं और कुल संख्या 24,296 रह गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2011-12 से लेकर 2022 तक इनके मानदेय में कोई वृद्धि नहीं हुई थी। वर्ष 2019 में अनुदेशक महासंघ के साथ बैठक में उन्होंने स्वयं प्रस्ताव मांगा था, लेकिन चुनाव अधिसूचना के कारण निर्णय नहीं हो सका। वर्ष 2022 में सरकार ने 2,000 रुपये की वृद्धि की, लेकिन सरकार स्वयं भी इससे संतुष्ट नहीं थी।
सभी अनुदेशकों को जल्द मिलेगा स्वास्थ्य कार्ड
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का मानना है कि अनुदेशक, शिक्षामित्र और बेसिक शिक्षा से जुड़े प्रत्येक कर्मचारी का सम्मान और मानदेय गरिमापूर्ण होना चाहिए। लंबे समय से चली आ रही मांगों को स्वीकार करते हुए सरकार ने अब अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाकर 17,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया है। उन्हें और उनके परिवारों को 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर भी उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी अनुदेशक बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा तैयार पोर्टल पर तत्काल पंजीकरण कराएं ताकि अगले सप्ताह बड़े समारोह में स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जा सकें।
छात्रों से श्रम दान कराने वाले शिक्षकों को दंडित न करें
मुख्यमंत्री ने मीडिया से भी अपील करते हुए कहा कि यदि बच्चे श्रमदान करते दिखाई दें तो उसे नकारात्मक रूप में प्रस्तुत न किया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों को छुई-मुई न बनाएं, उन्हें मजबूत, अनुशासित और आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है। बेसिक शिक्षा परिषद से उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षकों को दंडित करने के बजाय सम्मानित किया जाना चाहिए जो बच्चों में अनुशासन और स्वच्छता की भावना विकसित कर रहे हैं, उनसे स्पष्टीकरण न मांगा जाए। बच्चों को इतना प्रबल बनाएं कि कोई उन्हें हाथ भी न लगा सके।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
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लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल
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पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
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उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


