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गोंडा के शिक्षक डॉ. दुबे की अनूठी कलम: तुलसी चरित मानस से लेकर ‘वाराह चालीसा’ तक

गोंडा के शिक्षक डॉ. दुबे की अनूठी कलम: तुलसी चरित मानस से लेकर ‘वाराह चालीसा’ तक

संक्षेप:

गोंडा के सेवानिवृत्त शिक्षक डॉ. हनुमान प्रसाद दुबे (75 वर्ष) ने धार्मिक और वैज्ञानिक विषयों पर कई महत्त्वपूर्ण रचनाएं की हैं। उन्होंने 1967-70 के दौरान ‘तुलसी चरित मानस’ (जिसमें 7 कांड, 700 दोहे और 3000 चौपाइयां हैं) की रचना की।

Tue, 28 Oct 2025 04:48 PMGyan Prakash हिन्दुस्तान, गोंडा। रंजीत तिवारी/आरपी सिंह
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मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के अन्नय भक्त गोस्वामी तुलसीदास ने श्रीराम चरित मानस की रचना की है। स्थानीय मान्यता है कि गोस्वामी तुलसीदास का जन्म यहीं हुआ था। परसपुर के ही नारायणपुर साल सरैया निवासी डॉ. हनुमान प्रसाद दुबे ने समाज में तुलसीदास के आचार विचार से सदियों तक संस्कार की तरह शामिल है। 20 जनवरी 1950 को जन्मे शिक्षक डॉ. हनुमान प्रसाद दुबे तुलसी चरित मानस (काव्य पाठ) ने कई रचनाएं लिखी हैं।

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पूर्व माध्यमिक विद्यालय सरैया में नौनिहालों को शिक्षित करने वाले डॉ. हनुमान प्रसाद वर्ष 2013 में सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास में जनमानस को समझने की असाधारण क्षमता थी। इसलिए उनकी राम कथा न केवल देश वरन पूरे विश्व में गाई जाती है। उन्होंने यह महाकाव्य संस्कृत रामायण के आधार पर आम जनता तक भगवान राम की कथा पहुंचाने और उनमें धार्मिक व सामाजिक चेतना जागृत करने के उद्देश्य से लिखा था। इस महाकाव्य की भाषा अवधी है। डॉ हनुमान प्रसाद दुबे ने 1967 से 70 तक तुलसी चरित मानस की रचना की। उन्होंने बताया कि इसमें सात कांड है जिसमें 700 दोहें और 3000 चौपाइयां लिखी है। इसके साथ ही शोध ग्रन्थ की रचना करते हुए हिंदी साहित्य के विकास में गोंडा का योगदान की किताब लिखी है। सेवानिवृत के बाद भी 75 साल की आयु में डॉ. दुबे गांवों में बच्चों में शिक्षा के प्रचार के साथ धार्मिक अलख जगाने का काम करते आ रहे हैं।

उन्होंने अपनी कलम से ‘सूकर खेत गोंडा, तुलसी जन्म भूमि : एक सर्वेक्षण’, तुलसी चरितामृतम (काव्य), विनय मंजरी, सावित्री सत्यवान, जय जय भारत माता, चंद्र लोक की यात्रा काव्य की रचना की है। वह बताते हैं कि जब भी मौका मिलता है तभी तुलसी पर कलम चलने लगती है। उन्होंने वाराह चालीसा, गणेश वंदना, शिव आराधना, गुरुदेव वंदना, ब्रह्मा जी की आरती, आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी विज्ञान सहित अन्य काव्य का शोध कर लिखा है। वह कहते हैं कि तुलसी जिस समय और समाज में थे, वहां समाज की व्यवस्था और अनुशासन के लिए परंपरा के साथ होना जरूरी था।

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