विश्व हीमोफीलिया दिवस पर किया जागरूक, दी गई जानकारी
Gonda News - विश्व हीमोफीलिया दिवस शुक्रवार को मनाया गया। डा चेतन पाराशर ने कर्मचारियों को हीमोफीलिया के बारे में जागरूक किया। यह एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें खून का थक्का ठीक से नहीं बन पाता। समय पर उपचार से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। लोगों से अपील की गई कि खून बहने की समस्या पर तुरंत जांच कराएं।

गोण्डा, संवाददाता। विश्व हीमोफीलिया दिवस शुक्रवार को मनाया गया। ब्लडबैंक प्रभारी डा चेतन पाराशर ने कर्मचारियों को बीमारी के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि यह दिन एक दुर्लभ लेकिन गंभीर रक्त विकार हीमोफीलिया के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर वर्ष मनाया जाता है। इस बीमारी में खून का थक्का (क्लॉट) ठीक से नहीं बन पाता, जिससे छोटी चोट भी लंबे समय तक खून बहने का कारण बन सकती है। बताया कि हीमोफीलिया एक आनुवंशिक बीमारी है, जो अधिकतर पुरुषों में पाई जाती है, जबकि महिलाएं इसके वाहक होती हैं। शरीर में क्लॉटिंग फैक्टर की कमी के कारण मरीज को बार-बार आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव की समस्या होती है।
समय पर इलाज न मिलने पर जोड़ों में सूजन, दर्द और गंभीर जटिलताएं भी हो सकती हैं।उनका कहना है कि हीमोफीलिया का स्थायी इलाज अभी संभव नहीं है, लेकिन नियमित इलाज और सावधानी से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी और समय-समय पर जांच से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि यदि परिवार में किसी को बार-बार खून बहने की समस्या हो तो तुरंत जांच कराएं। साथ ही मरीजों को चोट से बचाने और समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। विश्व हीमोफीलिया दिवस के मौके पर जिले में और भी कई जगह जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। मरीजों और उनके परिजनों को इस बीमारी से जुड़ी जानकारी और बचाव के बारे में बताया गया।
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