
बोले गोण्डा: किसानों की उम्मीदों पर बारिश ने फेरा पानी, भारी नुकसान
संक्षेप: Gonda News - गोंडा जिले में बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। धान और मक्के की फसल को भारी नुकसान हुआ है। खेतों में खड़ी फसलें गिर गई हैं, जिससे धान सड़ने और मक्का के दाने काले पड़ने की आशंका बढ़ गई है। किसान सरकार से राहत और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
जिले में बेमौसम हुई बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। धान और मक्के की फसल को भारी नुकसान हुआ है। खेतों में खड़ी फसलें गिर गई हैं, जिससे धान सड़ने और मक्का के दाने काले पड़ने की आशंका बढ़ गई है। गोण्डा। जिले में दो दिनों तक रुक-रुककर बारिश के साथ हवाओं ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। लंबे समय से अपनी मेहनत की फसल को कटाई और मड़ाई में जुटे किसान अब बारिश से परेशान हैं। खेतों में कटी पड़ी फसलें पूरी तरह भीग चुकी हैं और कई स्थानों पर खेतों में पानी भर गया है।

मौसम के अचानक बदले मिजाज ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। जिन किसानों ने दिवाली के बाद धान की कटाई कर ली थी, वे अब अपनी फसल को सड़ने से बचाने में जुटे हैं। किसानों का कहना है कि मोंथा तूफान की वजह से जिले में बारिश हुई है। कृषि विभाग के अफसरों के अनुसार बताया जाता हैं कि जिले में बारिश और हवाओं से करीब पांच से सात फीसदी किसानों की फसलों के नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। जिले में इस बार किसानों ने सवा लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि पर धान की खेती लगाई है। किसानों ने कटाई के बाद धान खेतों में सुखाने के लिए रखा था, लेकिन बेमौसम बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। बारिश की वजह से खेतों में जलभराव हो गया है, जिससे धान, मक्का और गन्ना की फसलें सड़ने की कगार पर हैं। कई जगह किसानों ने फसल को सड़क किनारे या ऊंचे स्थानों पर पहुंचाकर किसी तरह बचाने की कोशिश की, लेकिन लगातार हो रही बारिश ने स्थिति को और बिगाड़ दिया। जिले के बेलसर,रूपईडीह, परसपुर, तरबगंज, इटियाथोक, मनकापुर अलावल देवरिया और मोतीगंज क्षेत्र में किसानों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन इलाकों में खेतों में पानी भर जाने के कारण न तो कार्बाइन मशीनें चल पा रही हैं और न ही हाथ से मड़ाई संभव हो रही है। धान की बालियां भीग जाने से दाने काले पड़ने लगे हैं। इसके अलावा मक्के की फसल जमीदोंज हो गई है, जिससे धान की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। परसपुर के किसान राम मिलन ने बताया हमारी पूरी फसल कट चुकी है, लेकिन बारिश से सब कुछ भीग गया है। अगर ठीक से धूप नहीं निकली तो पूरा धान सड़ जाएगा। अब खेत में जाना भी मुश्किल है। इसी तरह किसान शिवचरन का कहना है कि उन्होंने कटाई के बाद फसल को खेत में सुखाने के लिए रखा था, लेकिन बारिश ने सब गड़बड़ कर दिया। कार्बाइन मशीन नहीं चल रही। तरबगंज के धौरहरा घाट गांव के किसान रमेश मिश्र ने कहा कि धान की मड़ाई तभी संभव है जब धूप खिल जाएगी। बारिश से फसल नमी में है। अगर दो-तीन दिन धूप नहीं निकली, तो दाने काले पड़ जाएंगे और फसल का भाव भी घट जाएगा। इटियाथोक के किसान राघव राम ने बताया कि खेत में पड़ा धान पूरी तरह भीग गया है। हमने जो उम्मीदें लगाई थीं, अब वो खत्म होती दिख रही हैं। लागत भी नहीं निकल पाएगी। जिले के कई इलाकों में खेतों में भरा पानी, फसल सड़ने की आशंका जिले में हाल में हवाओं के साथ करीब 54 घंटे तक हुई बारिश से धान की बालियों में फफूंदी लगने का खतरा बढ़ गया है। इससे दाने काले पड़ जाते हैं और बाजार में उनकी कीमत काफी कम हो जाती है। यदि खेतों में पानी भरा रह गया तो सड़ी फसल से मिट्टी की उर्वरता पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों को तत्काल फसल को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और धूप निकलते ही सुखाने की सलाह दी जा रही है। वही बारिश और हवाओं के चलते मक्के की फसल खेतों में जमीदोंज हो चुकी है। मक्के के दाने भी खराब होने लगे हैं। राजस्व विभाग ने शुरू किया नुकसान का आकलन जिले में हवाओं के साथ हुई बारिश के नुकसान का आंकलन कराने के लिए राजस्व विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर फसल के नुकसान का आकलन कर रही हैं। अभी तक जितनी बारिश हुई है, उससे उन्हीं किसानों को नुकसान होगा, जिनकी फसल कटकर खेतों में पड़ी थी, जिनकी फसलें अभी खड़ी हैं, उन्हें फिलहाल कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने आगे कहा कि हाल में बोई गई सरसों, चना और राई की फसलों पर भी बारिश का कुछ असर पड़ सकता है। लगातार नमी रहने से बीज सड़ने का खतरा बढ़ जाता है। किसानों को सलाह दी गई है कि फसल को यथासंभव सुरक्षित स्थानों पर रखकर,धूप निकलते ही सुखाने की प्रक्रिया शुरू करें। भाकियू ने उठाई किसानों को मुआवजा देने की मांग किसान अब सरकार से राहत और मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं। जिले के कई किसान संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि किसानों को फसल की क्षति का उचित मुआवजा दिया जाए। किसानों का कहना है कि बीमा योजना में पंजीकृत किसानों को जल्द से जल्द राहत राशि दी जानी चाहिए ताकि वे अगली फसल की तैयारी कर सकें। भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष शिवराम उपाध्याय ने कहा कि धान की फसल किसानों की सालभर की मेहनत का नतीजा होती है। बेमौसम बारिश से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। प्रशासन को तुरंत सर्वे कराकर नुकसान का मुआवजा देना चाहिए। प्रस्तुति : सच्चिदानंद शुक्ल / विजय मिश्रा बोले किसान --------------------- बेमौसम बारिश से खेतों में कटी पड़ी धान की फसल पूरी तरह भीग गई है। अब दाने काले पड़ रहे हैं और फसल सड़ने लगी है। मेहनत पर पानी फिर गया। - कृष्ण कुमार मक्का की फसल तैयार थी, लेकिन बारिश से भुट्टे झुककर सड़ने की आशंका बढ़ गई है। फसल सड़ने से बाजार में कीमत घट जाती है। - हनुमंत लाल मिश्रा धान की कटाई के बाद खेत में रखा अनाज भीग गया। बारिश का पानी कई इलाकों में खेतों में भर गया है। इससे दाने अंकुरित होने लगे हैं। - विपिन बिहारी तिवारी सब्जी की फसल पूरी तरह खराब हो गई। टमाटर, मिर्च खेत में ही गलने की संभावना बढ़ गई है। बीज बोने की स्थिति नहीं बची, नुकसान हजारों में पहुंच गया। - रमाकांत मिश्रा बोले किसान ------------------- किसानों से अपील है कि जिन किसानों को फसल का नुकसान हुआ है और जिन्होंने फसल बीमा कराया है वे संबंधित ब्लॉक कार्यालय में सूचना दें, ताकि बीमा दावा प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सके। अब तक चार सौ से ज्यादा किसानों ने फसल नुकसान की सूचना विभाग को दी है। - चंद्र प्रकाश सिंह, जिला कृषि अधिकारी

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