बोले गोण्डा : जिले में आलू भंडारण व्यवस्था बढ़े तो बदले किसानों की तकदीर

Mar 08, 2026 04:02 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गोंडा
share

Gonda News - जिले में आलू की खेती बड़े पैमाने पर होती है, जहां इस बार तीन हजार हेक्टेयर में बुवाई की गई है। हालांकि, किसानों का कहना है कि उत्पादन बढ़ने के बावजूद उन्हें उचित लाभ नहीं मिल रहा है। सीमित भंडारण और गिरते बाजार भाव ने उनकी चिंताओं को बढ़ा दिया है।

बोले गोण्डा : जिले में आलू भंडारण व्यवस्था बढ़े तो बदले किसानों की तकदीर

जिले में आलू की बड़े पैमाने खेती पर होती है। चालू सीजन में तीन हजार हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की बुवाई के साथ बड़े उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है। किसानों का कहना है कि केवल उत्पादन बढ़ाने से समस्या हल नहीं होगी। सब्जियों में प्रमुख फसल माने जाने वाले आलू से हजारों किसानों की आजीविका जुड़ी है, फिर भी उन्हें लागत के अनुरूप लाभ नहीं मिल पाता। कृषि विभाग का दावा है कि उन्नत बीज, संतुलित उर्वरक उपयोग और वैज्ञानिक खेती की जानकारी देकर पैदावार बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। अनुकूल मौसम और बेहतर फसल प्रबंधन से लक्ष्य हासिल करने की उम्मीद जताई गई है।

जिले में सिर्फ एक कोल्ड स्टोरेज है जहां डेढ़ लाख बोरे से अधिक आलू भंडारण की क्षमता है। किसानों का कहना है कि यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। हिन्दुस्तान बोले गोण्डा मुहिम के तहत किसानों ने सब्जियों के लिए अतिरिक्त स्टोरेज निर्माण और आलू की सरकारी खरीद शुरू करने की मांग उठाई है। जिले में इस बार रबी सीजन के दौरान करीब तीन हजार हेक्टेयर में आलू की बुवाई कराई गई है। मौसम अनुकूल रहा और समय पर सिंचाई होने से फसल की स्थिति संतोषजनक बताई जा रही है। खेतों से निकल रही भरपूर पैदावार किसानों के चेहरों पर उम्मीद की चमक जरूर ला रही है, लेकिन बाजार के हालात और सीमित भंडारण व्यवस्था ने उनकी चिंताएं बढ़ा रखी हैं। उत्पादन बढ़ने के बावजूद किसानों को यह भरोसा नहीं है कि उन्हें लागत के अनुपात में लाभ मिल पाएगा। बीते वर्षो के अनुभव बताते हैं कि जब भी आवक अधिक होती है, मंडियों में आलू का भाव गिर जाता है। ऐसे में जिन किसानों के पास भंडारण की सुविधा नहीं होती, वे मजबूरी में कम दाम पर बिक्री करते हैं।पैदावार का आंकड़ा मजबूत लेकिन कमाई का गणित कमजोर: जिले में आलू की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। सब्जियों में आलू की भूमिका सबसे ऊपर मानी जाती है। बताया जाता है कि जिले में औसतन 80 से 150 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन हो रहा है। कई प्रगतिशील किसानों ने उन्नत बीज और वैज्ञानिक तकनीकों के सहारे 200 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक उपज ली है। बाजार में आलू का भाव 1000 से 1200 रुपये प्रति कुंतल के बीच रहता है तो एक हेक्टेयर से लगभग दो से तीन लाख रुपये तक आय मुमकिन है। हालांकि खेती की लागत भी लगातार बढ़ रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार एक हेक्टेयर में आलू की खेती पर एक से दो लाख रुपये तक खर्च आता है। इसमें बीज, उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी और परिवहन शामिल हैं। बीज की कीमत ही 40 से 60 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। डीजल और खाद के दाम बढ़ने से लागत और बढ़ गई है। मंडी में जब भाव 800 रुपये प्रति कुंतल या उससे नीचे चला जाता है तो किसान के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है। भंडारण की कमी से औने-पौने बेचने पड़ते हैं आलू: जिले में आलू भंडारण के लिए सिर्फ एक निजी कोल्ड स्टोरेज संचालित हैं, लेकिन उनकी क्षमता उत्पादन के मुकाबले कम बताई जा रही है। किसानों का कहना है कि स्टोरेज में जगह पाने के लिए पहले से बुकिंग करनी पड़ती है। छोटे किसानों को अक्सर प्राथमिकता नहीं मिलती। भंडारण शुल्क भी किसानों की चिंता बढ़ाता है। प्रति बोरी या प्रति क्विंटल के हिसाब से किराया देना पड़ता है। यदि किसान फसल को तीन-चार महीने तक स्टोरेज में रखता है तो उस पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। इसके बावजूद भंडारण को किसान जरूरी मानते हैं, क्योंकि फसल कटाई के समय बाजार में आवक ज्यादा होने से भाव कम रहते हैं। बाद में आपूर्ति कम होने पर दाम बढ़ते हैं। आलू की खेती को लाभकारी बनाने के उपाय: जिले में आलू की खेती को लाभकारी बनाने को लेकर विशेषज्ञों और किसानों ने कई ठोस सुझाव दिए हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि प्रमाणित बीज, समय पर रोग-कीट प्रबंधन और ड्रिप सिंचाई जैसी वैज्ञानिक तकनीक अपनाने से उत्पादन बढ़ने के साथ लागत में कमी लाई जा सकती है। केवल एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय दलहन व अन्य सब्जियों के साथ फसल चक्र अपनाने से जोखिम घटता है और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है। प्रोसेसिंग इकाइयों जैसे चिप्स और फ्रेंच फ्राइज निर्माण की स्थापना से स्थानीय स्तर पर खपत बढ़ेगी और किसानों को स्थायी बाजार मिलेगा। किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के माध्यम से सामूहिक बिक्री करने पर सौदेबाजी की ताकत बढ़ती है। एफपीओ से जुड़े कुलदीप मिश्रा का कहना है कि यदि किसान संगठित होकर सीधे कंपनियों से अनुबंध करें तो उन्हें बेहतर मूल्य मिल सकता है। सभी किसानों की मांगों को सरकार द्वारा प्राथमिकता दी जाएं।वजीरगंज क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आलू की खेती की जा रहीवजीरगंज क्षेत्र में आलू की खेती व्यापक स्तर पर की जाती है। कस्बा वजीरगंज के साथ चंदापुर, भगोहर, कोडंर, मझारा, गेडसर, पूरेडाढू, मोहनपुर, कोठा, ढोढियापारा, बलेश्वरगंज, कादीपुर, भटपुरवा, चनहा, अजबनगर, करदा, चड़ौवा और परसापुर महडौर सहित कई गांवों में किसान बड़े पैमाने पर आलू की बुवाई करते हैं। इस खेती से हजारों किसान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। किसानों का कहना है कि आलू नकदी फसल जरूर है, लेकिन लागत और मेहनत के अनुरूप दाम हर साल नहीं मिल पाता। बीज, खाद, कीटनाशक और सिंचाई पर बढ़ते खर्च के कारण मुनाफा घट जाता है। हालांकि जिन किसानों ने समय पर बुवाई की और फसल को सुरक्षित भंडारित किया, उन्हें अपेक्षाकृत बेहतर लाभ भी मिला है। भगोहर स्थित सदगुरुदेव कोल्ड स्टोर में क्षेत्र के किसानों का आलू भंडारित किया जाता है। कोल्ड स्टोर के प्रबंधक भरत मिश्रा के अनुसार यहां 1 लाख 32 हजार बोरा आलू भंडारण की क्षमता है। पर्याप्त भंडारण सुविधा होने से किसान फसल को सुरक्षित रखकर उचित समय पर बाजार में बेचने की योजना बना पाते हैं, जिससे बेहतर दाम मिलने की उम्मीद रहती है।जंगली जानवरों से नुकसान होने पर मिले मुआवजा जिले में जंगली जानवर, छुट्टा मवेशियों के झुंड और बंदर फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं।खेतों में तैयार खड़ी गेहूं, सरसों और सब्जियों की फसल को खासकर रात के समय सबसे अधिक क्षति पहुंच रही है। किसानों का कहना है कि कड़ी मेहनत और बढ़ती लागत के बावजूद उपज सुरक्षित नहीं रह पा रही, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। भाकियू जिलाध्यक्ष शिवराम उपाध्याय ने अफसरों से मांग की है कि जिन किसानों की फसलें नष्ट हुई हैं, उनका तत्काल सर्वे कराया जाए और उचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि फसलों की सुरक्षा के लिए ठोस और प्रभावी इंतजाम किए जाएं, साथ ही छुट्टा मवेशियों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि खेतों को नुकसान से बचाया जा सके। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। उनका कहना है कि फसल सुरक्षा और मुआवजा व्यवस्था मजबूत करना समय की मांग है। बेलसर ब्लॉक क्षेत्र के माधवपुर ग्राम पंचायत के मजरा हन्ना महंगी खाद,बीज पर मिले छूट, कीटनाशी दवाएं मिले सस्ती: जिले में सब्जी खेती करने वाले किसानों का कहना है कि सब्जियों के सीजन में खाद बीज सहित अन्य सामग्री काफी महंगी मिलती है। इसकी वजह से किसानी करने में समस्या होती है। सरकार खाद और सब्जी बीज की कीमतों को सस्ता करें तो किसानों को लाभ होगा। सब्जी की फसलों में विभिन्न प्रकार के कीड़े लगते है। इसके बचाव के लिए कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाता है लेकिन दवाएं काफी महंगी कीमत पर मिलती है। इसकी वजह से फसलों की लागत बढ़ जाती है। कागजी प्रक्रिया सरल हो तो मिलेगा योजनाओं का पूरा लाभजिले में आलू किसानों की समस्याओं को देखते हुए संबंधित विभागों ने विभिन्न योजनाएं संचालित होने का दावा किया है। जिला कृषि अधिकारी के अनुसार किसानों को उन्नत किस्म के बीज, मृदा परीक्षण और संतुलित उर्वरक उपयोग की जानकारी दी जा रही है। आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, ताकि उत्पादन बढ़े और लागत कम हो सके। वहीं, उद्यान विभाग का कहना है कि सरकार की योजना के तहत कोल्ड स्टोरेज निर्माण पर अनुदान दिया जा रहा है। निजी निवेशकों को भी आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे जिले की भंडारण क्षमता बढ़ाई जा सके और किसानों को फसल सुरक्षित रखने की सुविधा मिले। मंडी समिति के अधिकारियों के मुताबिक किसानों को ई-ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है। पारदर्शी नीलामी व्यवस्था लागू है और बाजार भाव की नियमित जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। लोगों का है कहनाआलू की फसल तैयार होते ही दाम गिर जाते हैं, जिससे लागत नहीं निकल पाती। -राम सुघर द्विवेदीहर साल आलू तैयार होते ही कीमतें बढ़ती हैं। सब्सिडी बढ़ाएं व बीज की महंगाई नियंत्रित करे। -अमित तिवारीइस बार जिले में आलू की पैदावार अच्छी होने की उम्मीद जताई जा रही है पर मंडी में भाव गिर जाते हैं। -शैलेंद्र तिवारीआलू फसल तैयार होते ही बाजार में कीमतें घटने से किसानों को नुकसान होता है। -दीप नारायन पांडेय बोले जिम्मेदारजिले में करीब तीन हजार हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की बुवाई कराई गई है। वजीरगंज क्षेत्र में 66 हजार कुंतल क्षमता का कोल्ड स्टोरेज संचालित है, जिससे किसानों को भंडारण सुविधा मिल रही है। शासन द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। -रश्मि शर्मा, जिला उद्यान अधिकारीप्रस्तुति: सच्चिदानंद शुक्ल/आलोक ओझा

Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।